समय पर भोजन न करने से होते हैं ये साइड इफ़ेक्ट…

हमारे देश में सात्विक और शुद्ध भोजन पर हमेशा जोर दिया जाता रहा है और यह मान्य तथ्य है कि भोजन यदि समय पर और शरीर की जरूरत के अनुसार ग्रहण किया जाए तो वह दवा का काम करता है और शरीर को निरोग रखता है. भारत में ऐलोपैथिक दवाओं से पहले भोजन ही औषधि का काम करता था, लेकिन समय के साथ खान पान का ढंग बदला और उसी के अनुसार बढ़ीं बीमारियां, पर उसके मुकाबले अंग्रेजी दवाओं का बाजार हजार गुना बढ़ा.अंग्रेजी दवाओं के साइड इफेक्ट को देखते हुए अब वैज्ञानिक पुरानी व्यवस्था की ओर लौट रहे हैं और थेरप्यूटिक फूड के जरिए कई बड़ी बीमारियों का इलाज कर रहे हैं. यह तथ्य उत्साहवर्द्धक है कि ओस्टियोपोरोसिस, अर्थराइटिस, लीवर में गड़बड़ी, मधुमेह, तनाव, अवसाद, उच्च रक्तचाप, सीआरएफ जैसी कई बीमारियों में थेरप्यूटिक फूड रामबाण इलाज सिद्ध हो रहा है. थेरप्यूटिक फूड पर काम कर रही ब्लू प्लैनेट सोसाइटी की कंपनी रायन थेरप्यूटिक फूड (आरटीएफ) आने वाले समय में देशभर में अपनी सेवाएं देने की तैयारी में है. इस कंपनी ने प्रयोग के तौर पर 25 बीमार लोगों को थेरप्यूटिक फूड दिया जिसमें से 15-16 लोग पूरी तरह से ठीक हो गए. जिन लोगों ने आधा अधूरा फूड लिया, उन्हें भी बहुत हद तक लाभ हुआ.

ब्लू प्लैनेट सोसाइटी के सचिव एस.के. चौहान ने पीटीआई भाषा को बताया कि किसी भी क्षेत्र का व्यक्ति अपने क्षेत्र में पैदा होने वाली मौसमी सब्जियां और फलों का सेवन कर रोग मुक्त हो सकता है, बशर्ते उसे पता हो कि उसके शरीर में किन पोषक तत्वों की कमी से अमुक रोग हुआ है. चौहान ने बताया कि वैसे तो थेरप्यूटिक फूड के नाम पर डिब्बा बंद फूड बाजार में उपलब्ध हैं, लेकिन असल में थेरप्यूटिक फूड का रीजनल और सीजनल होना आवश्यक है. हम लोगों को उनके क्षेत्र में होने वाले फल और सब्जियों की रेसिपी उनकी बीमारी के हिसाब से उपलब्ध कराएंगे.

उन्होंने बताया कि कंपनी ये सभी खाद्य उत्पाद आस-पास के इलाकों में पैदा होने वाले फल-सब्जियों और खाद्यान्नों से तैयार करती है. भविष्य में यूनिसेफ ने आरटीयूएफ (रेडी टू यूज थेरप्यूटिक फूड) योजना के तहत विश्व में कुपोषण से ग्रसित बच्चों को खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने की तैयारी की है. सामाजिक संस्था ब्लू प्लैनेट सोसाइटी से जुड़ी कंपनी रायन थेरप्यूटिक फूड्स (आरटीएफ) अगले दो महीने में देशभर में अपनी सेवाएं देने की तैयारी में है. थेरप्यूटिक फूड पर काम कर रही यह कंपनी बीमारियों का प्रबंधन खाद्य पदार्थों के माध्यम से करती है और 30 प्रतिशत उत्पाद गरीब और बीमार लोगों को निःशुल्क उपलब्ध कराती है.

रायन थेरप्यूटिक फूड की प्रबंधक खुशबू चौबे ने बताया कि लोगों को उनके क्षेत्र में पैदा होने वाले मौसमी फल और सब्जियां सस्ते दाम में मिल जाते हैं. इससे गरीब लोग भी अपना इलाज भोजन के माध्यम से कर सकेंगे. उन्होंने बताया कि इस उपक्रम के लिए कंपनी में 7 लोगों की टीम काम कर रही है जिसमें पैथोलॉजिस्ट, डाइटीशियन और प्रबंधक शामिल हैं. कंपनी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की डाइटीशियन डाक्टर गुरदीप कौर द्वारा डिजाइन सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रही है जिसमें अलग अलग रोगों के लिए अलग अलग आहार का विवरण है.

चौहान ने कहा कि पहले भोजन एक आवश्यकता थी, लेकिन आज यह मनोरंजन बन गया है और मनोरंजन हमेशा जरूरत से अधिक हो जाता है. हालांकि यदि भोजन की मात्रा और समय निर्धारित कर दिया जाए तो यह दवा का काम करता है. उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय और मौसमी खाद्य पदार्थ जहां आसानी से सभी को उपलब्ध होते हैं, वहीं शरीर इन्हें सहजता से ग्रहण भी कर लेता है, जबकि बाहर (विदेशी) से आने वाला खाद्य पदार्थ महंगा होता है और शरीर को इसका लाभ नहीं मिलता.

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