डैनी के दमदार डायलॉग

हिंदी फिल्‍मों में सफल खलनायकों का जिक्र हो और उसमें अभिनेता डैनी डेन्जोंगपा का नाम न लिया जाए यह बिलकुल भी संभव नही है। 25 फरवरी 1948 को जन्‍में डैनी डेन्जोंगपा रील लाइफ में अपनी रौबदार आवाज व अपने किरदारों की वजह से दमदार विलेन के रूप में पहचाने जाते हैं। उनकी कुछ चुनिंदा फिल्मों के डायलॉग इतने फेमस हुए की वो आज भी लोगो की जुबान पर हैं।

फिल्में जिनके डायलॉग फेमस हुए:

फिल्म घातक।

फिल्म शेषनाग।

फिल्म सनम बेवफा।

फिल्म क्रांतिवीर।

फिल्म युद्ध।

फिल्म अंधा कानून।

फिल्म फकीरा।

फिल्म अंदर-बाहर।

फिल्म अग्निपथ।

फिल्म पुकार।

10 जबरदस्‍त डायलॉग:

इसकी मौत सोचनी पड़ेगी।

मौत और बदनसीबी दो ही ऐसी चीजें हैं,जो बगैर खबर किए आती हैं।

एक पहाड़ का नाम है शेर खान, और पहाड़ न किसी के सामने चलकर जाता है और न ही किसी के सामने झुकता है।

हम तुम्हें ऐसे जलाएंगे कि तेरे चाहनेवालों को गंगा में बहाने के लिए तेरी राख भी नसीब नहीं होगी।

हम खतरों को पालते नहीं, खत्म कर देते हैं।

मौत से किसकी रिश्तेदारी है, आज हमारी कल तुम्हारी बारी है।

हमारे सामने कोई दूसरा पिस्तौल रखे, ये हमें पसंद नहीं।

जमीन और आसमान के बीच जितनी भी चीजें हैं, मुझे देखकर उनकी रूह फना हो जाती है। आग घबराकर बर्फ हो जाती है और बर्फ घबराकर पानी।

अपना उसूल कहता है दाएं हाथ से जुर्म करो, बाएं हाथ को पता भी न चले।

इतनी लाशें बिछा दूंगा कि लोग जलियांवाला बाग को भूल जाएंगे।

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