OBOR सिल्क रोड से चीन के साथ साझेदार देशों पर बढ़ेगा कर्ज

OBOR सिल्क रोड को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने ‘वन बेल्ट वन रोड (OBOR) प्रोजेक्ट में चीन को चेतावनी दी है। आईएमएफ की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टीन लेगार्ड ने गुरुवार को कहा कि चीन का ये महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट तरक्की का सूचक तो है, लेकिन इससे आने वाले वक्त में इस प्रोजेक्ट के पार्टनर देशों पर बड़े कर्ज का खतरा मंडरा रहा है। इसके साथ आगे उन्हें इससे उबरने के लिए चीन पर निर्भर रहना मजबूरी बन जाएगा।

OBOR, साझेदार देशों पर आर्थिक खतरा

क्रिस्टीन लेगार्ड ने बीजिंग में आयोजित बेल्ट एंड रोड कॉन्फ्रेंस में कहा-OBOR प्रोजेक्ट को लेकर दो चुनौतियां है। पहली, इस प्रोजेक्ट के तहत बने रास्ते का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर किया जाएगा। दूसरा, ये प्रोजेक्ट राजकोषीय नीति पर फोकस करेगा। इससे आने वाले समय में इस प्रोजेक्ट के साझेदार देशों के लिए कर्ज का बोझ बढ़ने वाला है। क्रिस्टीन लेगार्ड ने कहा, “हम जानते हैं कि चीन इस संभावित ऋण के खतरों से वाकिफ है। चीन इन खतरों से बचने के लिए जरूरी उपाय भी तलाश रहा है। चीन ने आर्थिक मंदी से उबरने, बेरोजगारी से निपटने और अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए ‘वन बेल्ट, वन रोड’ परियोजना को पेश किया है। चीन ने एशिया, यूरोप और अफ्रीका को सड़क मार्ग, रेलमार्ग, गैस पाइप लाइन और बंदरगाह से जोड़ने के लिए ‘वन बेल्ट, वन रोड’ के तहत सिल्क रोड इकोनॉमिक बेल्ट और मैरीटाइम सिल्क रोड परियोजना शुरू की है।

वन बेल्ट वन रोड बनने के बाद चीन की उम्मीदें

चीन अपनी इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिये दुनिया की 60 फीसदी आबादी यानी 4.4 अरब लोगों पर शिकंजा कसने की कोशिश कर रहा है। वह इन पर एकछत्र राज करना चाहता है। ऐसे में इसके भावी परिणाम बेहद गंभीर साबित हो सकते हैं। इन देशों के लोग भविष्य में चीन के गुलाम बन कर रहे जाएंगे। चीन का रिकॉर्ड रहा है कि वह बिना स्वार्थ के कोई काम नहीं उठाता है। खासकर विदेशी निवेश को लेकर उसका रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है।

इन गलियारों से जाल बिछाएगा चीन

न्यू सिल्क रोड के नाम से जानी जाने वाली ‘वन बेल्ट, वन रोड’ परियोजना के अंतर्गत छह आर्थिक गलियारे बन रहे हैं। चीन इन आर्थिक गलियारों के माध्यम से जमीनी और समुद्री परिवहन का जाल बिछा रहा है।

1. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा
2. न्यू यूराशियन लैंड ब्रिज
3. चीन-मध्य एशिया-पश्चिम एशिया आर्थिक गलियारा
4. चीन-मंगोलिया-रूस आर्थिक गलियारा
5. बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार आर्थिक गलियारा
6. चीन-इंडोचाइना-प्रायद्वीप आर्थिक गलियारा

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