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Nilkanth Mahadev's sight will give you a boon

नीलकंठ महादेव के दर्शन से मिलेगा मनचाहा वरदान

हिमालय पर्वत से घिरा और गंगा नदी के किनारे बसा ऋषिकेश सिर्फ रिवर रॉफ्टिंग और बंजिंग जंपिंग के लिए ही नहीं बल्कि कई सारे धार्मिक स्थलों जैसे नीलकंठ महादेव के लिए भी जाना जाता है।

नीलकंठ महादेव : 1330 मीटर की ऊंचाई पर स्थित

ऋषिकेश में अनगिनत मंदिर और आश्रम होने की वजह से पूरे साल ही यहां भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है लेकिन सावन के महीने में यहां का नजारा कुछ अलग ही नजर आता है। यहां भगवान शिव का बहुत ही खास, नीलकंठ रूप देखने को मिलता है। मनीकूट, विष्णुकूट और ब्रह्मकूट पहाड़ों से घिरा नीलकंठ मंदिर 1330 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर तक पहुंचने का रास्ता थोड़ा कठिन है।

मंदिर की बनावट बहुत ही खूबसूरत है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर आपको समुद्र मंथन की तस्वीर नज़र आएगी। मंदिर के अंदर शिवलिंग के अलावा भगवान गणेश और कपिल मुनि की मूर्तियां भी हैं. इसके अलावा भक्तों के नहाने के लिए यहां एक झरना भी है।

नीलकंठ महादेव मंदिर की खासियत

पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवता और असुरों द्वारा किए गए समुद्र मंथन के दौरान जो विष निकला था उसे भगवान शिव ने पी लिया था। इसे निकालने के लिए पार्वती जी ने भगवान शिव का गला दबा दिया था जिससे विष गले में ही रह गया और इससे उनका गला नीला हो गया।

मंदिर की दीवारों पर समुद्र मंथन की पूरी गाथा के साथ भगवान शिव द्वारा किए बलिदान को साफ तौर से देखा जा सकता है। मंदिर के परिसर में एक विशाल पीपल का पेड़ है जिसके बारे में कहा जाता है कि दिल से याद करते हुए इस पर धागा बांधने से आत्मा की शुद्धि होती है और साथ ही मन की मुराद भी पूरी होती है।

सावन के महीने में शिव भक्त यहां कांवड़ लेकर पहुंचते हैं। कांवड़ के गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। साल में दो बार शिवरात्रि के मौके पर यहां मेले का भी आयोजन होता है।

ऋषिकेश से नीलकंठ महादेव मंदिर जाने की विधी – ऋषिकेश बस टर्मिनल से नीलकंठ महादेव मंदिर की दूरी महज 32 किमी है। वैसे आप यहां तक प्राइवेट और शेयर टैक्सी द्वारा भी पहुंच सकते हैं। इसके अलावा कुछ बसें भी हैं जो आपको मंदिर के आसपास उतारती हैं। और अगर आप एडवेंचर पंसद है तो रामझूला से यहां तक 22 किमी का ट्रैक करके भी पहुंच सकते हैं।

नीलकंठ महादेव मंदिर जाने का सही अवसर – वैसे तो ये मंदिर पूरे साल भक्तों के लिए खुला रहता है लेकिन सावन महीने में और शिवरात्रि के दौरान यहां अलग ही नजारा देखने को मिलता है.

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