Amit Shah : खींचा मिशन 2019 का खाका

लखनऊ। मिशन 2019 को ध्यान में रखते हुए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह Amit Shah ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, भाजपा संगठन और सरकार के साथ समन्वय बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान रखते हुए तमाम मुद्दों पर चर्चा की। इस बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ , डिप्टी सीएम केशव मौर्य, दिनेश शर्मा और संगठन से राष्ट्रीय संगठन मंत्री शिव प्रकाश, महासचिव भूपेंद्र यादव, राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामलाल प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र पांडे भी शामिल हुए।

Amit Shah  ने आरएसएस के फीडबैक

बैठक में एक तरफ राम मंदिर का मुद्दा छाया रहा तो दूसरी तरफ Amit Shah अमित शाह ने आरएसएस के फीडबैक के बाद सरकार के कामकाज को लेकर भी चिंता जताई।आरएसएस से लिया फी़डबैक दिया, उसके मुताबिक भाजपा के मौजूदा हालात में प्रदेश में हालात बेहतर नही है, जिसका मुख्य कारण प्रदेश की मौजूदा रणनीति को जिम्मेदार बताया गया है।

कानून व्यवस्था व भ्रष्टाचार से जुड़े मामले भी उठे। इसको लेकर अमिता शाह ने काफी चिंता जताई। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने सीएम योगी व दोनों डिप्टी सीएम से इमेज मेकओवर की बात भी कही। वहीं कानून व्यवस्था को लेकर उठ रहे तमाम सवालों को जल्द सुलझाने को कहा। अमित शाह के मुताबिक सरकार को हर मामले का डैमेज कंट्रोल जल्द से जल्द करना चाहिए वरना इसका असर पार्टी की छवि पर भी पड़ जाता है। इसके अलावा बैठक में मंत्रिमंडल विस्तार पर भी चर्चा हुई। नवंबर के पहले सप्ताह में मंत्रीमंडल में फेरबदल संभव है।युवा वोटरों को लुभाने के लिए इस बार नए चेहरों को इसमें तरजीह मिलेगी।

कई मंत्रियों के कामकाज से खुश नहीं

सूत्रों का कहना है कि भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व कई मंत्रियों के कामकाज से खुश नहीं है, इस वजह से उनके काम की भी समीक्षा की जाएगी। साथ ही लोकसभा चुनाव में प्रत्याशियों के चयन के बारे में भी अमित शाह ने कुछ दिशा-निर्देश दिए। साफ छवि व जिताऊ उम्मीदवारों को ही टिकट दिए जाने के संकेत दिए। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान और मंदिर बनाने के लिए अन्य हिंदूवादी संगठनों के बढ़ रहे दबाव को देखते हुए माना जा रहा था कि इस मुद्दे पर भी बैठक में चर्चा होगी। इस बारे में जनता की नब्ज टटोलते हुए पार्टी का स्टैंड तय करने पर भी बात हुई। अमित शाह ने संकेत दिए कि चुनाव में ये मुद्दा अहम साबित होने वाला है लिहाजा सोच-समझकर ही पार्टी पदाधिकारी इस पर बयान दें।

 

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