rakshabandhan should be considered as national festival of india
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रक्षाबंधन घोषित हो राष्ट्रीय पर्व : आर.के. चेत्र

लखनऊ। राष्ट्रीय एकता मिशन के तत्वाधान में बीस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल क्राइस्ट चर्च काॅलेज के प्रधानाध्यापक श्री आर.के. चेत्री के नेतृत्व में राज्यपाल से मिला। दल ने राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेजे गए मांग के माध्यम से रक्षाबंधन को राष्ट्रीय पर्व घाषित करने की मांग की है।

रक्षाबंधन ऐसा पर्व जो एक रक्षासूत्र

राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरमेश सिंह चौहान का मानना है कि संगठन प्रत्येक साल सर्वसमाज और दिव्यांग बच्चों के बीच रक्षाबंधन मनाता आया है। इन कार्यक्रमों में भारत के सभी धर्म, जाति, पंथ-उपपंथों के लोग भागीदार रहते हैं। विगत कई वर्षों से ईसाई समाज के बीच भी रक्षाबंधन मनाया गया। जब उन्हें रक्षाबंधन के मूलभावों की जानकारी हुई तो समाज से आवाज आई कि क्यों न इसे राष्ट्रीय पर्व के रूप में केंद्र सरकार से मान्यता ली जाए।

क्राइस्ट चर्च काॅलेज के प्रधानाध्यापक श्री आर.के. चेत्री ने राज्यपाल राम नाईक को यह प्रस्ताव सौंपने के बाद कहा कि हम सभी विभिन्न समुदाय के लोग चाहते हैं कि देश में एकता की लहर बनें। चाहें हम जिस भी धर्म,जाति के हो लेकिन हमें एक होकर रहना चाहिए। रक्षाबंधन ऐसा पर्व है जो एक रक्षासूत्र के माध्यम से हम सबमें यह भाव पैदा करता है कि हमें समाज में सामाजिक समरसता और सहिष्णुता को फैलाना है। हम सब एक राष्ट्र के हैं। पहले हम हिन्दुस्तानी है फिर किसी मजहब से पहचाने जाते है। अतः हम सबके बीच एक ऐसा मानवीय पर्व होना चाहिए जो इंसानियत ओर प्रेम का पर्व हो,जो किसी धर्म से संबंध न रखता हो।

रक्षाबंधन ऐसा ही पर्व है जिसमें एक दूसरे की रक्षा करने के अधिकारों को प्रेरित करने का संदेश मिलता है। आज हम भले ही अलग-अलग धर्मों से आते हों पर सभी अपने धर्म के प्रतिनिधि के रूप में राष्ट्रपति को प्रस्ताव भेजने आए थे। जिसमें मांग की गई है कि भारत में रक्षाबंधन को राष्ट्रीय पर्व घोषित किया जाए। केंद्र का यह निर्णय निश्चय ही समाज में प्रेम और भाईचारे को नई दिशा देने का प्रयास होगा।

प्रतिनिधिमंडल में डॉ. निर्मल गुप्ता, गोपाल प्रसाद, सैय्यद हसन कौसर, बग्गा साहब, मनीष मिश्र, अरुणेश, डॉ. सुनील अग्रवाल, कर्नल निशीथ सिंघल, सतीश दीक्षित, भारत सिंह, सत्या पाठक, सुरेश तिवारी, लक्ष्मण भाव सिंह, रेखा त्रिपाठी, ररेव्ह एफ बक्श, रेव्ह. आर पौल, पंकज अग्रवाल, आर.पी. सिंह और सतीश दीक्षित मौजूद रहे।

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