प्रयागराज : जिलों का नाम बदलने की परम्परा!

इलाहाबाद का नाम बदलकर “प्रयागराज” किये जाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फैसले के बाद यूपी की राजनीती में एक बार फिर से गर्मी देखने को मिल रही है। कोई इसे आस्था से जोड़कर अपना पक्ष रख रहा है तो कोई इसे राजनितिक स्टंट बता रहा है। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपना पक्ष रखते हुए सीएम योगी को अड़े हांथों लिया। बहरहाल यह परम्परा सपा-बसपा-कांग्रेस-भाजपा के शासन काल से चली आ रही है।

शासक केवल ‘प्रयागराज’ नाम बदलकर

अखिलेश यादव ने ट्वीट करते हुए सीएम योगी पर कटाक्ष करते हुए लिखा “राजा हर्षवर्धन ने अपने दान से ‘प्रयाग कुम्भ’ का नाम किया था और आज के शासक केवल ‘प्रयागराज’ नाम बदलकर अपना काम दिखाना चाहते हैं। इन्होंने तो ‘अर्ध कुम्भ’ का भी नाम बदलकर ‘कुम्भ’ कर दिया है। ये परम्परा और आस्था के साथ खिलवाड़ है।

पहले भी बदले गए नाम

यह पहली बार नहीं है जब किसी जनपद का नाम बदला जा रहा हो। इसके पूर्व वर्ष 2012 में अखिलेश यादव ने बतौर मुख्यमंत्री रहते हुए आठ जिलों के नाम बदले थे। ये वो जिले थे जनके नाम बसपा शासन में बदले गए थे। इनमें छत्रपति शाहूजी महाराज नगर जिसे बदलकर गौरीगंज कर दिया गया,पहले इस जिले का नाम अमेठी था।

इसी क्रम में पंचशील नगर का नाम हापुड़, ज्योतिबा फूले नगर का नाम अमरोहा, महामाया नगर का नाम हाथरस, काशीराम नगर का नाम कासगंज, रमाबाई नगर का नाम कानपुर देहात, प्रबुद्ध नगर का नाम शामली व भीमनगर का नाम बदलकर बहजोई कर दिया गया।

अभी हाल ही में मुगलसराय जंक्शन का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन कर दिया गया। कभी यह जंक्शन “मुगलों के सराय” नाम से जाना जाता था जो मुगलसराय और अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम से जाना जाता है। कांग्रेस सरकार ने दिल्ली में कनॉट प्लेस का नाम बदलकर राजीव चौक और कनॉट सर्कस का नाम इंदिरा गांधी चौक कर दिया था।

अपनी बात

यहां यह सोचना बेहद जरुरी है कि क्या किसी जनपद का नाम रमाबाई, प्रयागराज या पंडित दीनदयाल रखने मात्र से ही लोगों की आस्था, समर्पण, भाव और सम्मान बदल जायेंगे। बेहतर होगा कि सरकारें जिलों का नाम बदलें के फेर में न पड़े बल्कि आमजन की दशा सुधारने और जनपदों के विकास पर ध्यान केंद्रित करें।

अनुपम चौहान
अनुपम चौहान

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