Uttar Pradesh : बिल्डर नहीं कर पायेंगे धोखाधड़ी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश Uttar Pradesh की राजधानी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट में र्कइ बड़े फैसले लिए गए हैं। राज्य सरकार ने जमीन और प्लॉट लेने वाले लोगों के लिए रेरा में नियम सख्त कर दिए हैं। इसके बाद बिल्डर या प्रमोटर ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी नहीं कर पायेंगे। कैबिनेट ने रेरा के तहत बिल्डरों को ग्राहकों के साथ एग्रीमेंट फॉर सेल करने के नियमों को परिभाषित कर दिया है।

Uttar Pradesh सरकार के प्रवक्ता

उत्तर प्रदेश Uttar Pradesh सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बताया कि रेरा के गठन से पूर्व व्यवस्था में जमीन या फ्लैट लेने पर प्रमोटर की शर्तों पर एग्रीमेंट होता था। इसमें खरीदार के हितों का ध्यान नहीं रखा जाता था। भारत सरकार ने इसे लेकर एक ड्राफ्ट जारी किया है जिसे राज्य सरकार ने कुछ संशोधन के बाद जारी करने का निर्णय लिया है। इसके तहत बतौर एडवांस 10 फीसद से अधिक भुगतान बिल्डर नहीं ले सकेंगे।

प्राइमरी रजिस्ट्रेशन के समय

प्राइमरी रजिस्ट्रेशन के समय एग्रीमेंट फॉर सेल भी साइन किया जाएगा। एग्रीमेंट में परियोजना की भूमि पर प्रमोटर के स्वत्व से संबंधित समस्त विवरण के साथ भू-उपयोग का विवरण भी देना होगा।एग्रीमेंट में बिल्डर या प्रमोटर को आवंटी के आवंटन पत्र में निहित अपार्टमेंट की संख्या, कारपेट एरिया, कॉमन एरिया, प्रकार, तल, टॉवर/ ब्लॉक/ बिल्डिंग तथा गैराज/ कवर्ड पार्किंग का विवरण तथा प्लॉट आवंटन की दशा में प्लॉट का नंबर, क्षेत्रफल, गैराज, कवर्ड पार्किंग के बारे में बताना होगा।

साथ ही एलॉटमेंट वापस लेने पर पैसा वापसी की शर्तें, कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिलने पर वेलफेयर एसोसिएशन की स्थापना के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी होगी। अपार्टमेंट या प्लान का कारपेट एरिया के आधार पर कुल मूल्य का विवरण प्रति वर्ग फिट के मुताबिक देना होगा। विकास प्राधिकरणों द्वारा विकास शुल्कों में वृद्धि की दशा में ही आवंटी से अतिरिक्त धनराशि ली जा सकेगी जिसके लिए प्रमोटर द्वारा आवंटी को अधिसूचना/आदेश/नियम की प्रति देना अनिवार्य होगा।

आवंटी द्वारा पेमेंट प्लान

एग्रीमेंट उसी दशा में बाध्यकारी होगा जबकि आवंटी द्वारा पेमेंट प्लान के अनुसार भुगतान के साथ एग्रीमेंट की प्रति 30 दिन के भीतर प्रमोटर को वापस कर दी जाए और प्रमोटर की सूचना पर आवंटी द्वारा सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकरण करा लिया जाए। यह नियम सभी नये प्रोजेक्ट्स पर लागू होगा हालांकि पुराने प्रोजेक्ट्स में नई खरीद पर भी एग्रीमेंट फॉर सेल करना अनिवार्य किया गया है।राज्य सरकार ने व्यापारियों को भी जीएसटी के कुछ नियमों में संशोधन कर बड़ी राहत देने का निर्णय लिया है।

अब कंपोजीशन की सीमा को एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ रुपये कर दिया गया है। जीएसटी के मूल अधिनियम में रेस्टारेंट को छोड़कर अन्य सेवा प्रदाताओं को कंपोजीशन की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इसके लिए धारा-10 में संशोधन किया गया है जिसके बाद ऐसे व्यापारी जिनके द्वारा अपने कुल टर्नओवर का दस फीसद अथवा पांच लाख रुपये जो भी अधिक हो, की सीमा तक सेवाओं की आपूर्ति किए जाने पर कंपोजीशन की सुविधा प्रदान की जाएगी। खास बात यह है कि पांच करोड़ तक का टर्नओवर करने वाले व्यापारियों को अब हर महीने के बजाय प्रत्येक तीन माह में रिटर्न दाखिल करना होगा।

ऐसे ई-कॉमर्स ऑपरेटर्स

वहीं ऐसे ई-कॉमर्स ऑपरेटर्स जिन्हें टीडीएस काटने का अधिकार है, केवल उन्हें ही जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। छोटे ऑपरेटर्स को इसमें छूट प्रदान कर दी गयी है। इसके अलावा कर चोरी के मामले में जांच के दौरान भी पंजीकरण निरस्त रहेगा, पहले यह जांच पूरी होने पर निरस्त होता था। वहीं अन्य राज्यों की तरह विशेष श्रेणी के राज्यों जैसे जम्मू-काश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश व मेघालय के लिए भी थ्रेसहोल्ड की सीमा बीस लाख रुपये कर दी गयी है।

शारदीय नवरात्र के शुभ अवसर पर कैबिनेट ने प्रदेश स्थित तीन शक्तिपीठों सीतापुर के नैमिषारण्य स्थित मां ललितादेवी शक्तिपीठ, देवीपाटन स्थित मां पाटेश्वरी देवी शक्तिपीठ व मिर्जापुर स्थित मां विंध्यवासिनी शक्तिपीठ का प्रांतीयकरण करने का निर्णय लिया है।

शक्तिपीठों का पूरा प्रबंधन

अब इन शक्तिपीठों का पूरा प्रबंधन डीएम के द्वारा किया जाएगा। दरअसल यहां लगने वाले मेलों का महत्व स्थानीय होने के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय भी है। इसी वजह से सराकर इनका प्रांतीयकरण करके अनुदान देगी ताकि यहां पर श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जा सकें। अब डीएम यहां की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था देखेंगे और मूलभूत सुविधाओं का इंतजाम करेंगे। इसके लिए राज्य सरकार ने क्रमशः 60 लाख, 48 लाख और 30 लाख रुपये का अनुदान देने का निर्णय लिया है।

कैबिनेट ने नयी पर्यटन नीति-2018 का विस्तार किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। अपर मुख्य सचिव पर्यटन अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि पर्यटन नीति के तहत तमाम ऐसे इलाके भी छूट गये थे जहां प्राइवेट कंपनियां निवेश करने को इच्छुक हैं। नीति में उनका उल्लेख नहीं होने के कारण कंपनियों को राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी, छूट इत्यादि दे पाना मुमकिन नहीं था।

अलग-अलग सर्किट

इसे ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया गया है कि प्रदेश के अलग-अलग सर्किट जैसे रामायण सर्किट, बुद्धा सर्किट, कृष्णा सर्किट आदि में क्षेत्र का विस्तार किया जाए ताकि वहां पर भी प्राइवेट कंपनियां होटल, रिसॉर्ट इत्यादि का निर्माण कर सकें। उन्होंने बताया कि पर्यटन में बीते कुछ दिनों में दस गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। यूपी में भी पांच हजार करोड़ निवेश का आधा लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। नीति का विस्तार करने से बाकी लक्ष्य भी आसानी से पूरा हो जाएगा।कैबिनेट ने नगर निगमों और नगर पालिका में सौ साल से चली आ रही लेखा प्रणाली को समाप्त कर दोहरी लेखा प्रणाली की व्यवस्था लागू करने की मंजूरी प्रदान कर दी है।

नगर निगम और पालिका

इस फैसले से अब नगर निगम और पालिका अपनी बैलेंस शीट बना सकेंगे और जनता का उनकी आर्थिक स्थिति का पता लग सकेगा कि वे कितने घाटे अथवा मुनाफे में है। इससे नगर निगमों की जवाबदेही बढ़ेगी और जनता को मिलने वाली सुविधाओं में सुधार भी होगा। यह व्यवस्था दो साल के भीतर पूरी तरह लागू कर दी जाएगी। इसके लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट और राज्य स्तरीय विशेषज्ञ सलाहकार की मदद भी ली जाएगी।

कैबिनेट ने झांसी शहर में साफ पीने का पानी मुहैया कराने के लिए माताटीला डैम से पानी लेने की योजना को मंजूरी दे दी है। इसके तहत डैम से लिए गये पानी को ट्रीट कर झांसी नगर निगम की सीमा में रहने वाले लोगों को मुहैया कराया जाएगा। इस योजना में करीब 600 करोड़ रुपये की लागत आएगी। यह वर्ष 2048 तक चलेगी। अमृत योजना के तहत होने वाले इस कार्य के लिए केंद्र सरकार 50 फीसद, राज्य सरकार 30 फीसद और नगर निगम को 20 फीसद अंशदान देना होगा।

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