महाविद्यालयों की ठेका प्रथा एवं Brokers ने उच्चशिक्षा को किया बर्बाद

फतेहपुर। स्नातक व परास्नातक के परीक्षा परिणाम किसी से छिपे नही हैं, ज्यादातर विद्यार्थी Brokers के चक्कर में पड़कर इन परीक्षाओं की लक्ष्मण रेखा पार करने में असमर्थ रहे। कई छात्रों से बात करके गहराई से अध्ययन करने के पश्चात ऐसा सच सामने आया जिसने समूचे इलाहाबाद मण्डल की शिक्षा प्रणाली को कठघरे में ला खड़ा किया । 2,632,733 से अधिक जनसंख्या वाले जिले फतेहपुर मे जहां साक्षरता का प्रतिशत 58.6 प्रतिशत है वहां शिक्षा की दयनीय स्थिति हो गई है । जहाँ कि महाविद्यालयों के बीएससी फाइनल के 50 फीसदी छात्र फेल हो गए व कुछ महाविद्यालयों में बीएससी तृतीय वर्ष का परीक्षाफल शून्य घोषित किया गया है।

Brokers  ने बच्चों का भविष्य किया चौपट

कुछ विद्यार्थियों ने बताया कि वे घाटमपुर के ग्रामीण क्षेत्र के एक डिग्री कॉलेज में दाखिला लिए हुए थे, जहां उन्हें दाखिले के समय यह लॉलीपॉप दिया गया था कि सरकार की सख्ती के कारण परीक्षाकक्ष में कैमरे की नज़र में इम्तिहान देना होगा परन्तु तनिक भी चिंता की बात ना होगी क्योंकि ठेके पर लगाये गए लोग मुँह से बोलकर नकल करवाएंगे।

ज्यादातर परीक्षार्थी स्नातक/परास्नातक में हुए चित

परीक्षाफल में उपरोक्त बिंदुओं को ध्यान में रखकर कॉपियां जांची गयीं जिसके चलते इस कालेज के ज्यादातर परीक्षार्थी चारो खाने चित हो गए ।

  • स्वर्गीय परशुराम महाविद्यालय के फाइनल ईयर के 150 छात्रों में सभी फेल हैं।
  • स्वर्गीय दिलीप कुमार स्मारक महाविद्यालय के ढाई सौ में से मात्र 7 छात्र पास है।
  • भोलानाथ उत्तम महाविद्यालय जहानाबाद में बीएससी थर्ड ईयर में 240 में से सिर्फ 3 छात्र पास है।
  • श्री शक्ति डिग्री कॉलेज में बीएससी थर्ड ईयर की छात्रा सुरभि ने बताया कि इतना बुरा रिजल्ट आने पर हम छात्रों का भविष्य अंधकार में चला गया है।
मान्यताविहीन विद्यालय पढ़ाते रहे नकल का पाठ

तिरहर क्षेत्र दफसौरा व अमौली क्षेत्र में सक्रिय एडमीशन दलाल विभिन्न कॉलेजों में ठेके पर एडमीशन करते है और कॉलेज न जाने का, परीक्षा में नकल कराने का, प्रैक्टिकल में अनुपस्थित रहते हुए भी प्रैक्टिकल की कॉपी लिखवाने का, यहां तक की परीक्षा में दूसरे लड़के को बैठाकर परीक्षा दिलवाने का, ठेका ले लेते हैं और इन सब गलत सुविधाओं की एवज में छात्र से एक मोटी रकम वसूल करते हैं। इस कार्य में चाहे-अनचाहे छात्रों के अभिभावक भी शामिल होते हैं और छात्रों के भविष्य को अंधकार में कर देते हैं।

इन दलालों के मकड़जाल में एक बार फंसने के बाद छात्र तीन साल तक इनके कर्ज तले दबा रहकर मानसिक रूप से प्रताड़ित होता रहता है। यहां तक की सूदखोर साहूकारों की तरह अवैध शुल्क , अतिरिक्त शुल्क की उगाही हेतु छात्रों को जरूरत पड़ने पर मार्कशीट तक नहीं देते हैं जिससे कि वह बहुत सारी प्रतियोगिता परीक्षाओं में भाग नहीं ले पाते है।

पीडित संदीप ने बताया कि उसकी और कुछ अन्य दोस्तों की मार्कशीट इस दलाल के पास फसी हुई है जो एक साल हो गया पर अभी तक नहीं मिल पा रही है। नंबरों के खेल का लालच होने के कारण यह दलाल और उनकी दलाली अमौली क्षेत्र में खूब फल-फूल रही है। मवई क्षेत्र का एक दलाल तो बाकायदा बहीखाता लेकर अपने झोले में विभिन्न महाविद्यालयों के एडमीशन फार्म लेकर चलता है और समानांतर झोलाछाप महाविद्यालय चलाता है।

छात्र को कहीं भी एडमिशन कराना हो इस दलाल के चंगुल से नहीं बच सकते। यह दलाल एडमिशन करने, बैंक में खाता खुलवाने और वजीफा आने तक का लालच छात्र को पूर्व में देकर अपने चंगुल में फंसा लेता है। इसने बहुतेरे छात्रों के सुनहरे भविष्य को चौपट कर अंधकारमय कर दिया।

थोक के भाव मे गैर मान्यता प्राप्त विद्यालय हो रहे संचालित

इन दलालों के लिए महाविद्यालयों ने बीए, बीएससी, BCA आदि में एडमिशन हेतु बाकायदा दलाली के रेट प्रति छात्र निश्चित कर रखे हैं और इन दलालों का संरक्षण क्षेत्रीय महाविद्यालयों के प्रबंधक अपने यहां छात्र संख्या बढ़ाने की एवज में करते हैं। इसकी एवज में ये दलाल महाविद्यालयों से भी मोटी रकम वसूल करते हैं। महाविद्यालय और इन दलालों की मिलीभगत से पनप रहे शिक्षा के अवैध धंधे ने अमोली क्षेत्र के छात्र छात्राओं का भविष्य चौपट कर रखा है। यह महाविद्यालय और सक्रिय दलाल छात्र-छात्राओं की मेहनत की कमाई से अपनी जेबें भर रहे हैं। इस पर लगाम तभी लग सकती है जब क्षेत्र के अभिभावक स्वयं जागरूक हो।

महाविद्यालयों के खराब परीक्षा परिणामों में गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों का अहम योगदान

खराब परीक्षा परिणामों के आने का दूसरा सबसे बड़ा कारण यह है कि बच्चों के भविष्य को चौपट करने पर तुले थोक के भाव मे संचालित गैरमान्यता प्राप्त माध्यमिक स्कूल पहले ही बच्चों की नींव कमज़ोर करके उनको नकल की शिक्षा देकर नकल करना सिखाकर बच्चों के भविष्य को अंधकार के गर्त में धकेलने का कार्य कर देते हैं।

गैर मान्यता प्राप्त स्कूल 800 से लेकर 1500 तक के मासिक वेतन में हाईस्कूल से लेकर इंटर पास/अध्ययनरत विद्यार्थियों को विद्यालय में अध्यापन कार्य सौंपकर विद्यार्थियों के अभिभावकों से 200 से 800 रुपये प्रतिमाह तक फीस वसूलकर शिक्षा माफिया अपनी जेबें भरकर बच्चों के भविष्य की बखिया उधेड़ देते हैं। जिले के अंदर व अमौली क्षेत्र में थोक के भाव मे संचालित ऐसे मानकविहीन ग़ैरमान्यता प्राप्त विद्यालयों की फेहरिस्त बहुत लंबी है, और सबसे हैरानी की बात तो यह है कि ये विद्यालय ना सिर्फ बैनरों पोस्टरों द्वारा प्रचार-प्रसार में बल्कि अभिभावकों को भी बेधड़क होकर स्वयं के विद्यालय को सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त बता देते हैं, ऐसे में अभिभावकों के लिए पहचान करना बहुत मुश्किल होता है कि कौन सा विद्यालय मान्यता प्राप्त है और कौन सा नही।

गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों/कॉलेजों में पड़े ताला

क्षेत्रीय जनता के हित में जिलाधिकारी/डीआइओएस महोदय से मांग है कि शिक्षा विभाग की गतिविधियों पर नज़र रखते हुए शिक्षा के साथ खिलवाड़ करके देश के भविष्य कहे जाने वाले बच्चों/विद्यार्थियों के भविष्य को बर्बाद कर रहे कुकुरमुत्तों की तरह उग आए ऐसे संस्थानों पर निश्चित तौर पर हमेशा के लिए ताला जड़े व प्रशासन के सामने हार ना मानने वाले शिक्षा माफियाओं पर सख्त से सख्त कार्यवाही की जाए।

क्षेत्र के अभिभावक स्वयं हो जागरूक

इसके साथ ही अभिभावकों से भी विनम्र अपील है कि अपने बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ ना करते हुए जिन विद्यालयों में प्रवेश लें उनके अध्यापकों , अध्यापन प्रणाली , विद्यालय के वातावरण और विद्यालय की मान्यता के अतिरिक्त अन्य संसाधनों के बारे में संपूर्ण जानकारी अवश्य कर लें क्योंकि इन्हीं सब का प्रलोभन देकर यह संस्थान आप की जेबें हल्की करते हैं और बाद में आपको सुविधा देने के नाम पर सिर्फ छलावा मिलता है और अभिभावक स्वयं को ठगा हुआ महसूस करता है।

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