Pulkit Khare : डीएम उठाएंगे रिक्शा चालक के बेटे की जिम्मेदारी

हरदोई। प्रशासनिक अधिकारी व संपन्न वर्ग की जनता अगर चाहे तो देश के हर गरीब के परिवार के चेहरे पर खुशी ला सकती है। ऐसा ही एक सराहनीय कार्य हरदोई जिलाधिकारी Pulkit Khare पुलकित खरे ने किया है, जिनके कामों की सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही हैं। उन्होंने एक रिक्शा चालक के बेटे के पढ़ाई की जिम्मेदारी अपने कंधो पर लिया है।

Pulkit Khare : पढ़ाई से लेकर हॉस्टल, सभी की जिम्मेदारी

जिलाधिकारी पुलकित खरे

युवा जिलाधिकारी पुलकित खरे के इस पुनीत कार्य की खूब प्रशंसा की जा रही है। दरअसल ये मामला हरदोई के भरावन ब्लाक के मड़ौली मजरा कौड़िया का है। जहाँ कुछ दिनों पहले गांव की प्रधान नीलम देवी के पति संतराम कश्यप के साथ उनका बेटा भानु डीएम पुलकित खरे के आवास पंहुचा तो डीएम ने मुलाकात करते हुए भानु की प्रतिभा को परखा।

  • भानु ने डीएम को 1 से 40 तक का पहाड़ा बिना रुके सुना दिया था और कई प्रश्नों के उत्तर भी दिए थे।

उसकी इस प्रतिभा को देख डीएम पुलकित खरे ने उसकी स्नातक तक कि पढ़ाई का खर्च निजी स्तर पर उठाने का वादा किया था। अपने इसी वादे को निभाते हुए भानु के पिता को लेकर माधौगंज स्थित लखनऊ पब्लिक स्कूल पंहुचे जंहा पर उन्होंने भानू का एडमीशन अपने निजी खर्चे पर कराया।

जिलाधिकारी पुलकित खरे कालेज के संस्थापक पूर्व एमएलसी एसपी सिह व प्रधानाचार्य सरोज कटियार से एडमिशन सम्बन्धी जानकारी लेकर भानु के दाखिले का फॉर्म भर, अभिभावक के स्थान पर खुद हस्ताक्षर किये।

रिक्शा चालक के बच्चे का भाग्य उसकी छिपी प्रतिभा से उजागर हुआ। बच्चे की मां माधुरी गृहणी है। भानु के ग्राम की प्रधान के पति सन्तराम कश्यप ने बताया कि भानुप्रताप प्राथमिक विद्यालय मड़ौली में कक्षा एक मे पढने जाता था और उसमें विलक्षण प्रतिभा है जिसे डीएम ने पहचानकर उसकी पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी ली है।

सामान्य बच्चों से अधिक सोचने, समझने की क्षमता

डीएम पुलकित खरे ने भानु का दाखिला कराने के बाद कहा कि,” भानू के अन्दर सामान्य बच्चों की अपेक्षा सोचने व समझने की क्षमता अधिक है और उसकी इसी क्षमता से प्रभावित होकर उन्होंने अपने निजी खर्चे पर उसे अच्छी शिक्षा दिलाने का संकल्प लिया है।”

उन्होंने कहा ,” भानू की केजी से लेकर इण्टर तक की शिक्षा यही से होगी और उसके बाद की शिक्षा भानू की रूचि के अनुसार कराएगें। साथ ही स्थानान्तरण के बाद वह जहां भी होगें वही से प्रधानाचार्य व बच्चे के पिता से सम्पर्क बनाए रखेगें। पिता का एकाउन्ट नम्बर व मोबाइल नम्बर उन्होंने ले रखा है जिससे वह बराबर सम्पर्क में बने रहेगें।”

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