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अमेरिका आने से पहले पिचाई के पास नही था कंप्यूटर,लेकिन जानते थे तकनीक की ताकत को इसीलिए…

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई चेन्नई में पले-बढ़े हैं. अमेरिका आने से पहले उनके पास अपना कंप्यूटर नहीं था. परिवार को टेलीफोन कनेक्शन के लिए 5 वर्ष इंतजार करना पड़ा था. पिचाई ने एक साक्षात्कार में ये बातें कहीं. उन्होंने बताया- उन दिनों फोन बहुत कम थे. कंप्यूटर  इंटरनेट की तो बात ही छोड़ दीजिए. घर में फोन लगा तो पड़ोसी अपने बच्चों को कॉल करने के लिए आते थे. वह सामुदायिक कनेक्शन हो गया था. लेकिन, इन्हीं बातों से मुझे तकनीक की ताकत पता चली.

  1. पिचाई ने बताया- गूगल के को-फाउंडर लैरी पेज  सर्गे ब्रिन ने सीईओ की जिम्मेदारीके बारे में बात की तो मैं चौंक गया था. मैं प्रोडक्ट बनाने में व्यस्त था  बिल्कुल नहीं सोचता था कि यह सिलसिला कितना आगे जाएगा. गूगल का सीईओ बनने को पिचाई लाइफटाइम अपॉर्च्यूनिटी बताते हैं.
  2. पिचाई ने कहा- मैं अभी भी सोचता हूं कि अमेरिका अवसरों का देश है. इस बात को ठीक साबित करने के लिए हमें कड़ी मेहनत की आवश्यकता है. इसमें बड़ी किरदार यह होगी कि अप्रवासी लोग सफलता हासिल करें. पिचाई ने अमेरिकी संसद से ऐसे लोगों के संरक्षण की मांग की है जो यूएस आकर सफल होने का सपना देखते हैं. वे हुनरमंद लोगों के इमिग्रेशन का समर्थन भी कर चुके हैं.
  3. पिचाई के मुताबिक- आप टेक इंडस्ट्री को देखिए, वहां कई बड़ी कंपनियों की स्थापना अप्रवासियों ने की है. तकनीक में हमारी लीडरशिप सबसे अच्छे कंप्यूटर साइंटिस्ट रिसर्चरको आकर्षित करने की योग्यता से आती है. मुझे लगता है कि इसे जारी रखना अहम बात है.
  4. पिचाई को बीते कुछ वर्षों में प्राइवेसी  लिंगभेद जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. गूगल के विरूद्ध अमेरिका में एंट्रीट्रस्ट की जाँच भी हो सकती है. पिचाई का बोलना है कि सीईओ को अपनी कंपनी का चीफ एथिक्स अधिकारी भी होना चाहिए. इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कौनसी तकनीक समाज पर कैसा प्रभाव डालेगी. मैं इसे अपनी मूलभूत जिम्मेदारी समझता हूं लेकिन, संस्थान के बाकी स्तरों पर भी नैतिकता होनी चाहिए.
  5. पिचाई ने 1993 में आईआईटी खड़गपुर से बीटेक किया. उसी वर्ष स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप मिल गई. पिचाई ने वहां से इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री ली  यूनिवर्सिटी ऑफ पेनिनसेल्वेनिया के वार्टन स्कूल से एमबीए किया. 2004 में गूगल ज्वॉइन करने से पहले सॉफ्टवेयर कंपनी एप्लाइड मैटेरियल्स  मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म मैकेंजी में कार्य किया था. गूगल में प्रोडक्ट चीफ  हेड ऑफ एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे पदों पर रहने के बाद 2015 में उन्हें सीईओ बनाया गया.

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