Villagers ने इकठ्ठा किए 5 करोड़

नई दिल्ली।  इंदौर से 35 किलोमीटर दूर होलकर राजवंश की राजधानी रहे ग्राम कंपेल में देवी अहिल्या द्वारा 319 साल पहले बनवाए गए गोवर्धननाथ मंदिर का Villagers ग्रामीणों ने लगभग पांच करोड़ रुपए की लागत से जीर्णोद्धार कराया है। भगवान गोवर्धननाथ की दस भुजाओं वाली दुर्लभ मूर्ति इस मंदिर में विराजित है। मूर्ति साढ़े चार सौ साल पहले कंपेल के पास उन्हेल के ही तालाब से निकली थी। तब इसे देवी अहिल्या ने यहीं मंदिर बनवाकर स्थापित किया था।

Villagers ने जीर्ण-शीर्ण हो चुके पुराने मंदिर

अब ग्रामीणों Villagers ने जीर्ण-शीर्ण हो चुके पुराने मंदिर की जगह 51 फीट ऊंचा भव्य मंदिर बनवाया है। इसमें पीतल के कलश, नक्काशी वाले सुंदर दरवाजे सहित संगमरमर का प्रयोग किया गया है। राधाकृष्ण व भगवान भोलेनाथ की नई मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा भी हुई है। यह सभी कार्य कंपेलवासियों के साथ ही इंदौर व अन्य जगह से लोगों के सहयोग से किया गया। आचार्य संतोष दुबे के अनुसार 10 से 13 अप्रैल तक प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव मनाया गया। तीन दिनों तक हुए यज्ञ में 26 जोड़े शामिल हुए।

शनिवार 13 अप्रैल को भगवान गोवर्धननाथ की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। शाम को हुए भंडारे में लगभग 20 हजारों ने प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर के पुजारी व गांव वालों के अनुसार भगवान की इस स्वरूप की यह मूर्ति पूरे विश्व में एक मात्र है। भगवान कृष्ण ने महाभारत के समय जो दिव्य दर्शन दिया था, उसी स्वरूप का इस मूर्ति में चित्रण किया गया है। यहां निःसंतान दंपती संतान प्राप्ति की मनोकामना मांगने आते हैं।

भगवान की छोटी मूर्ति

ग्राम उदयपुर से द्वारकादास, रामदास व परमहंस महाराज कंपेल आए थे। तब उनके पास द्वारकाधीश भगवान की छोटी मूर्ति थी। तीनों संत छोटी कुटिया बनाकर वहीं पर पूजा-अर्चना करने लगे। ग्रामीणों के अनुसार उन्हें स्वप्न आया कि गोवर्धननाथ भगवान की मूर्ति गांव से तीन किलोमीटर दूर तालाब में है। इस पर गांव के सालम सिंह व सक्षम पटेल के सहयोग से शक्‌ संवत्‌ 1620 में तालाब से मूर्ति निकाली गई। इसके दो साल बाद शक्‌ संवत 1622 में अहिल्या देवी को इसकी जानकारी लगी तो वे दर्शन के लिए आईं। तब उन्होंने मूर्ति को इंदौर के राजवाड़ा में स्थापित करने की मंशा जताई लेकिन मूर्ति अपने स्थान से नहीं हटी। उसके बाद उन्होंने उसे वहीं स्थापित करवाकर मंदिर निर्माण कराया था। मंदिर के पुजारी पवन बैरागी ने मंदिर की रावजी (भाट) संभालकर रखी है, जिसमें इस बात का उल्लेख है।

भगवान श्रीकृष्ण की यह अद्भुत मूर्ति काले पाषाण से निर्मित है। मूर्ति की ऊंचाई दो फीट है। दस भुजाओं वाली मूर्ति में भगवान दोनों हाथ से बांसुरी बजा रहे हैं। एक हाथ में गोवर्धन पर्वत उठाया है। एक हाथ में शंख, एक हाथ में पद्य, एक हाथ में गदा और एक हाथ मस्तक पर है। एक हाथ से तिलांजलि, एक हाथ में गदा व एक हाथ से आशीर्वाद दे रहे हैं। मूर्ति के आसपास छह गोपियां नृत्य करते दर्शाई गई हैं। वहीं मूर्ति की दायीं व बायीं ओर गाय अपने बछड़े को दूध पिला रही है। भगवान गरूड़ पर सवार हैं व गरूड़ शेषनाग पर सवार है। गोवर्धन पर्वत के ऊपर अग्नि नारायण विराजमान हैं, जिनके दोनों ओर मोर है। गोवर्धननाथ बाल स्वरूप में हैं, इसलिए यहां पर संतान प्राप्ति के लिए मनोकामना मांगी जाती है।

 

About Samar Saleel

Check Also

बीजेपी के बड़े नेता अरुण जेटली ने 66 साल की आयु में दुनिया को कहा ‘अलविदा’

पूर्व वित्त मंत्री व बीजेपी के बड़े नेता अरुण जेटली का शनिवार की दोपहर करीब 12 बजे ...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *