Water crisis : सरेनी व लालगंज क्षेत्रों में बुंदेलखंड जैसे हालात

रायबरेली। जनपद में चौतरफा लगातार गिर रहे भूजल स्तर के कारण पेयजल की गंभीर समस्या Water crisis उत्पन्न हो गई है। सबसे ज्यादा जल त्रासदी झेल रहे सरेनी व लालगंज क्षेत्रों में तो बुंदेलखंड जैसे हालात उत्पन्न हो गये हैं। एक ओर जल संकट तो दूसरी ओर जो पानी है वह फ्लोराइड युक्त है, जिसे पीने से लोग अपंगता के शिकार हो रहे हैं। डलमऊ क्षेत्र के बरारा बुजुर्ग, सताँव क्षेत्र के कोरिहर, कोन्सा, ओनई पहाड़पुर, लालगंज के खलीलपुर, रजौली व सरेनी में चौतरफा फ्लोराइड घुला पानी आम आदमी को अपाहिज बना रहा है। यहाँ बीते साल जल निगम द्वारा कराई गई पानी की जांच में शत-प्रतिशत फ्लोराइड की मात्रा पाई गई थी, लेकिन यह जांच केवल कागजों तक ही सीमित रह गयी।

Water crisis : क्षेत्र के दो तिहाई हैंडपंप में पानी ही नहीं

सरेनी क्षेत्र में पेयजल समस्या Water crisis गर्मी का मौसम आते ही विकराल हो जाती है। जल स्तर नीचे चले जाने से इंडिया मार्का हैंडपंप से पानी की बूंदे टपकने बंद होने लगती है। क्षेत्र के अधिकांश लोग खारे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। करीब 45 साल पहले सरैनी,पहुरी, रामबख्श खेड़ा, भोजपुर, गोविंदपुर, दुधवन व बेनी माधवगंज में पानी की टंकियों का निर्माण कराया गया था। रख रखाव के अभाव में अब यह क्षमता का 10 फीसदी ही जल आपूर्ति करने में सक्षम है।

यद्यपि इस इलाके में लगभग 7500 इंडिया मार्का-2 हैंड पंप लगे हैं, किंतु इन में से दो तिहाई ने पानी देना बंद कर दिया है। उत्तर प्रदेश के 820 ब्लॉकों में से जिन 76 ब्लॉकों को अतिदोहित और 32 को क्रिटिकल श्रेणी में रेखांकित किया गया है, उनमें यह इलाका सबसे आगे है।

उतरकर 80 फीट तक पहुंचा जलस्तर

जल संकट को लेकर स्थितियाँ यह हैं कि जिले की कोई तहसील ऐसी नहीं, जो आश्वस्त करती हो कि इलाका पानीदार है, लेकिन सबसे खतरनाक स्थिति लालगंज तहसील की ही है। लालगंज ब्लॉक के बेहटाकलां, जगतपुर, भिचकौरा, उदयामऊ, पीरअलीपुर, पलिया, बीरसिंह पुर, लालूमऊ, नरसिंहपुर, जोगापुर, सराय बैहिराखेड़ा, तेजगांव आदि गांवों में जलस्तर उतरकर 80 फीट तक पहुंच गया है।
सरेनी ब्लाक में तो जलस्तर की गिरावट एक वर्ष में 1.6 मीटर तक दर्ज की गई है। यह आंकड़ा भूगर्भ विभाग, उ. प्र. का है। सरेनी ब्लॉक के लोहरामऊ,बरहा,सगरा, सागरखेड़ा,मथुरपुर,तेजगांव,रालपुर,बहादुरपुर, दुलापुर,मदाखेड़ा,उसरु, मुरारमऊ, हसनापुर, रसूलपुर,सब्जी नेवाजी खेड़ा आदि गांवों में 8 महीने पानी के लिए त्राहि-त्राहि रहती है।

कुप्रबंधन के कारण लालगंज की नहरों में भी पानी…

भूजल स्तर में गिरावट व रासायनिक प्रदूषण जैसे संकटों से डलमऊ इलाका भी अछूता नहीं है। इस इलाके में करीब ढाई सौ बड़े तालाब थे, अब उनमें से पचास भी मूल अवस्था में नहीं है। शारदा सहायक जैसी प्रमुख नहर परियोजना रायबरेली में है,किंतु कुप्रबंधन के कारण लालगंज की नहरों में पानी की जगह झाड़-झंखाड़ दिखाई देते हैं। सारी आशाएं जाकर इंडिया मार्का हैंडपम्प,टयूबवेल,बोरवेल और समर्सिबल पर टिक गईं हैं। इंडिया मार्का जैसे 200 फीट गहरे उतरकर पानी खींचने वाली मशीन से भी फ्लोराइड ही बाहर आ रहा है। थारू आबादी वाले डकोली जैसे गांव से सटी एक पूरी पट्टी ही फ्लोराइड का संत्रास झेल रही है। हैजा,आंत्रशोथ,टाइफाइड,विकलांगता जैसी बीमारियां बढ़ रही।

गिरीश अवस्थी

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