CBI जांच में एसएससी पेपर करवाने वाली सिफी टेक्‍नोलॉजी की खुली पोल

नई दिल्ली। सिफी टेक्नोलॉजी ने एसएससी छात्रों के भविष्य के ​साथ खिलवाड़ करने के लिए पूरी तरह से सॉफ्टवेयर को भी इस्तेमाल किया। यही नहीं काला कारनामा CBI जांच में सामने आया है। यह उस समय खुला जब सोशलमीडिया पर एसएससी का पेपर लीक हुआ। पेपर लीक होने के बाद जब एसएससी छात्रों के सामने वह पेपर आया तो छात्रों की नींद गायब हो गई। जिसके बाद छात्रों ने एसएससी कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच कराने के लिए सीबीआई को सौंप दिया। जिसके बाद परत दर परत पूरा मामला खुलकर सामने आ गया।

CBI, सात प्रश्नपत्र हुए थे लीक

हर साल औसतन 4 लाख से अधिक नौजवानों को रोजगार मुहैया कराने वाले स्टॉफ सेलेक्‍शन कमीशन (एसएससी) की साख आज खतरे में पड़ गई है। इस खतरे की वजह बना है कंबाइंड ग्रेजुएट लेबल (सीजीएल) के प्रश्‍न पत्र लीक होना। दरअसल, यह मामला 21 फरवरी 2018 को सामने आया था। सरकारी नौकरी पाने की उम्‍मीद लिए हजारों नौजवान 21 फरवरी की सुबह स्‍टाफ सेलेक्‍शन कमीशन (एसएससी) की परीक्षा के लिए तैयार थे। ये नौजवान परीक्षा केंद्र में दाखिल होते, इससे पहले कुछ परीक्षार्थियों की निगाह फेसबुक पर आए एक पोस्‍ट पर चली गई। इस फेसबुक पोस्‍ट पर एसएससी परीक्षा से जुड़े सात प्रश्‍न पत्र मौजूद थे। फेसबुक पोस्‍ट में दावा किया गया था कि 21 फरवरी की सुबह 10:30 बजे से होने वाली एसएससी की परीक्षा के प्रश्‍न पत्र हैं।

केंद्र सरकार की हरकत के बाद सीबीआई जांच में खुली पोल

एसएससी छात्रों ने इसकी शिकायत स्‍टाफ सर्विस कमीशन के साथ प्रशासन और शासन का दरवाजा खटखटाया। लेकिन प्रारंभिक तौर पर नतीजा कुछ खास नहीं रंग लाया। जिसके बाद छात्रों ने खुद मोर्चा संभाला और परीक्षार्थी लोधी रोड के सीजीओ कॉप्‍लेक्‍स स्थित एसएससी हेडक्‍वाटर के बाहर विरोध प्रदर्शन के लिए पहुंच गये। देखते ही देखते हजारों परीक्षार्थियों ने अपना विरोध दर्ज कराने सीजीओ कॉप्‍लेक्‍स पहुंचने लगे। परीक्षार्थियों का प्रयास रंग लाया और एसएससी की किरकिरी होती देख सरकार और विपक्ष इन परीक्षार्थियों के पक्ष में खड़े हो गये। जिसके बाद 14 मार्च को केंद्र सरकार ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश दे दिये। सीबीआई के अनुसार सुबह करीब 10:10 बजे फेसबुक के SSCTUBE पेज पर 7 प्रश्‍न पत्र वायरल हो गए, जबकि इन प्रश्‍नपत्रों को सुबह 10:30 बजे अनलॉक होना था।

7 परीक्षार्थियों के प्रश्नपत्रों के स्क्रीन शॉट सोशल नेटवर्किंग साइट पर डाला

सीबीआई के अनुसार नकल को रोकने के लिए एक विशेष साफ्टवेयर का इस्‍तेमाल किया जाता था। यह सॉफ्टवेयर परीक्षा में पूछे गए प्रश्‍नों के क्रम को बदल देता था। जिसके चलते हर परीक्षार्थी को कंप्‍यूटर सेट पर प्रश्‍नपत्रों का अलग-अलग सेट मिलता था। जांच के दौरान यही सॉफ्टवेयर सीबीआई के लिए पहला मददगार बना। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से सीबीआई को पता चला कि जो प्रश्‍न पत्र सोशल मीडिया में वायरल हुए थे, वह किन परीक्षार्थियों को दिया गया था। जांच में पता चला कि यह प्रश्‍न पत्र सचिन चौहान, शंभु कुमार, धीरज, दीपक राणा, सोनम, अनूप और सुमन नामक परीक्षार्थियों को परीक्षा के लिए दिए गए थे। इन्‍हीं 7 परीक्षार्थियों को दिए गए प्रश्‍न पत्रों का स्‍क्रीन शॉट लेकर सोशल नेटवर्किंग साइट में डाला गया था।

रिमोट सॉफ्टवेयर से जुड़े थे सातों परीक्षार्थियों के कंप्‍यूटर

सीबीआई जांच के दौरान स्‍क्रीन-शॉट से एक रिमोट एक्‍सेस सॉफ्टवेयर का सुराग मिला है। जांच में पता चला कि सातों छात्रों के कंप्‍यूटर में एक रिमोट एक्‍सेस सॉफ्टवेयर मौजूदा था। जिसकी मदद से परीक्षा केंद्र के बाहर बैठा व्यक्ति परीक्षार्थियों के प्रश्‍न पत्र हल करने में मदद कर रहा था। सीबीआई के अनुसार, परीक्षा आयोजित कराने वाली कंपनी सिफी टेक्‍नोलॉजी की जिम्‍मेदारी थी कि परीक्षा केंद्र में लगे किसी भी कंप्‍यूटर में कोई भी ऐसा सॉफ्टवेयर नहीं होना चाहिए, जो परीक्षार्थियों को नकल करने में मदद कर सके। इस सॉफ्टवेयर के सामने आने के बाद सीबीआई के जांच दल को पूरे षडयंत्र में सिफी टेक्‍नोलॉजी की ओर से तैनात किए गए सेंटर हेड की मिलीभगत का सबूत खोज लिया।

भूल गई सिफी टेक्‍नोलॉजी अपनी जिम्‍मेदारियां

ऑन लाइन परीक्षा के लिए एसएससी ने 12 अप्रैल 2016 को मेसर्स सिफी टेक्‍नोलॉजी लिमिटेड नामक कंपनी के साथ समझौता किया। समझौते के अंतर्गत प्रश्‍न पत्र तैयार करने से लेकर सेंटर का चुनाव और परीक्षा आयोजित करने की पूरी जिम्‍मेदारी सिफी टेक्‍नोलॉजी को सौंपी गई थी। सीबीआई से समझौते के अंतर्गत एसएससी ने सिफी टेक्‍नोलॉजी प्रमुख के तौर पर 8 जिम्‍मेदारियां सौंपी थीं। इसमे पहली जिम्‍मेदारी देश के विभिन्‍न शहरों में परीक्षा सेंटर को खोजना और उन्‍हें परीक्षा के लिए तैयार करना था। दूसरी जिम्‍मेदारी एसएससी की गाइडलाइन के अनुरूप पर्याप्‍त संख्‍या में प्रश्‍न पत्रों के सेट तैयार करना था। तीसरी जिम्‍मेदारी सभी परीक्षार्थियों का रजिस्‍ट्रेशन कराना, उनके बायोमैट्रिक लेना था। समझौते के अनुसार सिफी टेक्‍नोलॉजी को परीक्षा आयोजित कर सभी परीक्षा लैब की सीसीटीवी रिकार्डिंग एसएससी को उपलब्‍ध कराना था। इसके अलावा, एसएससी ने प्रश्‍न पत्रों की लीकेज रोकने की पूरी जिम्‍मेदारी सिफी टेक्‍नोलॉजी को सौंप थी।

  • परीक्षा से पहले सिफी टेक्‍नोलॉजी को सुनिश्चित करना होता था कि किसी भी कंप्‍यूटर में ब्राउसिंग, चैटिंग सहित अन्‍य फग्‍शन कीज को ब्‍लॉक कर कॉपी-पेस्‍ट के ऑप्‍शन को बंद दिया गया है।

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