RSS: प्रणब दा ने कहा एकता और सहिष्णुता महत्वपूर्ण

नागपुर में आयोजित RSS के कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हिस्सा लिया। देशभर में आरएसएस के कार्यक्रम में प्रणब दा के पहुंचने से मचे हड़कम्प पर वार करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबो​धन की शुरूआत राष्ट्रवाद से की। इससे पहले जैसे ही बिगुल बजा, आरएसएस का झंडा फहराने के साथ ही समारोह की शुरुआत हुई। सभी आरएसएस कार्यकर्ताओं के साथ मंचाशीन अतिथियों ने हिदू ध्वज को सलामी दी। आरएसएस प्रमुख ने प्रणब की यात्रा से जुड़े विवादों का ज़िक्र करते हुए कहा ‘प्रणब दा प्रणब दा बने रहेंगे और आरएसएस हमेशा आरएसएस रहेगा।’

RSS, प्रणब दा ने भारत की खोज व राष्ट्रीयता को किया परिभाषित

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के स्वागत संबोधन के बाद पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने भाषण की शुरूआत की। उन्होंने इस दौरान राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति के बारे में परिचय दिया। भारतीय राष्ट्रवाद और राष्ट्रीयता को परिभाषित करना आरएसएस की विचारधारा का मौलिक हिस्सा है। आरएसएस के अनुसार लोगों के जीने का मकसद भी यही चीजें हैं। आरएसएस के नागपुर स्थि​त हेडक्वॉर्टर में 700 से भी अधिक कैडेट ने बड़े ध्यान से प्रणब मुखर्जी का भाषण सुना। इसके साथ उनके भाषण को लाखों लोगों ने टीवी पर देखा।

  • उन्होंने अपने भाषण में भारत की खोज और राष्ट्रीयता को परिभाषित किया।

आधुनिक भारत को किया परिभाषित

प्रणब दा ने आधुनिक भारत के बारे में अपने भाषण में भारत के पूर्व राष्ट्रपति ने 1985 में एसएन बनर्जी के दिए भाषण के माध्यम से परिभाषित किया। उन्होंने बाल गंगाधर तिलक के स्वराज, जवाहरलाल नेहरू की भारत की खोज और स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल के क्षेत्रीय बंटवारों के प्रयासों के लिए किए गए आह्वान का जिक्र किया। प्रणब मुखर्जी ने ‘संवैधानिक देशभक्ति’ के माध्यम से भारतीय राष्ट्रवाद के निर्माण का जिक्र किया। उन्होंने कहा ‘हमारा संविधान हमारे अंदर राष्ट्रवाद की भावना जगाता है। जिसमें हमारी साझा विविधता की झलक दिखाई पड़ती है।’ उन्होंने एमएस गोलवलकर की पुस्तक में परिभाषित राष्ट्रवाद के पांच लेखों का जिक्र किया। प्रणब दा ने कहा ‘भारत का राष्ट्रवाद एक भाषा, एक धर्म, एक दुश्मन नहीं है।

  • यहां 1.3 अरब लोग 122 से अधिक भाषाओं और 1,600 बोलियों का उपयोग करते हैं।
  • यहां सात अलग-अलग धर्म हैं व तीन प्रमुख जातीय समूहों – आर्य, मंगोलोइड्स और द्रविड़ियन – एक प्रणाली के तहत रहते हैं। इसके साथ देश का झंडा और भारतीय होने की एक पहचान है।’

प्रणब दा ने नागपुर आने का किया जिक्र

प्रणब दा ने नागपुर में अयोजित आरएसएस कार्यक्रम में आने के बार में बताया। ‘प्रणब ने समझाया कि वो आरएसएस के नागपुर मुख्यालय में क्यों आए हैं। उन्होंने कहा लोकतंत्र में, राष्ट्रीय महत्व के सभी मुद्दों पर लोगों का जुड़ना काफी ज़रुरी है। संवाद आवश्यक है और सिर्फ बातचीत के माध्यम से हम जटिलता को हल करने के लिए समझ विकसित कर सकते हैं।’

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