लोकसभा की हर सीट पर बीजेपी की मुश्किलें बढ़ाएगा महागठबंधन

लखनऊ। सपा-बसपा, कांग्रेस और रालोद महागठबंधन को तैयार हैं। वहीं, उपचुनाव में हार से सतर्क बीजेपी विपक्षी एकता को मात देने की तैयारी में है। सभी दलों को भान है कि यूपी जीतने का मतलब आसानी से दिल्ली की कुर्सी के नजदीक पहुंच जाना। 2014 में बीजेपी ने सूबे की 80 में 73 सीटें जीतकर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया था। इस बार भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बेदखल करने के लिये गठबंधन आकार ले रहा है। प्लान के मुताबिक, बीजेपी के प्रत्याशी को हराने के लिये संयुक्त गठबंधन सभी लोकसभा सीटों पर संयुक्त प्रत्याशी उतारेगा।

महागठबंधन की रूपरेखा

महागठबंधन की रूपरेखा तय हो चुकी है, लेकिन सीटों के बंटवारे का पेंच अभी फंसा है। सूत्रों की मानें तो गठबंधन में बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव को 40-40 सीटें मिल सकती हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी को अपने कोटे से कांग्रेस और रालोद को सीटें देनी होंगी। माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी यूपी की 8 सीटों पर और रालोद 3 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस 10 से 12 सीटों की डिमांड कर रही है, वहीं रालोद भी अपने लिये कैराना, बागपत और मथुरा की सीट चाहती है। पूर्वांचल की निषाद पार्टी के लिये भी अखिलेश यादव सपा के ही कोटे से दो सीटें छोड़ सकते हैं। भले ही गठबंधन की सीटों का बंटवारा अभी फाइनल नहीं हुआ हो, लेकिन सोशल मीडिया पर बाकायदा सीट बंटवारे की लिस्ट भी फाइनल हो गई है।

सम्मानजनक सीटें मिलने पर ही

बसपा सुप्रीमो साफ कह चुकी हैं कि सम्मानजनक सीटें मिलने पर ही वह गठबंधन में शामिल होंगी। बसपा यूपी की 80 में से 40 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ना चाहती है। कांग्रेस पार्टी भी कम से कम 12 सीटों की मांग पर अड़ी है। रालोद पार्टी भी 03 सीटें मांग रही है। निषाद पार्टी से सपा का पहले ही गठबंधन है, जिसे कम से कम 02 सीटें देनी ही पड़ सकती हैं। ऐसे में अगर समाजवादी पार्टी उपरोक्त सीटें दे देती है तो उसके पास खुद के लिये 23 सीटें ही बचेंगी। सूत्रों की मानें तो सपा अपने लिये कम से कम 30 सीटें चाहती हैं। हालांकि, अखिलेश यादव गठबंधन को लेकर अपना नरम रुख जाहिर कर चुके हैं। उनका साफ कहना है कि लोकसभा चुनाव से पहले ऐसा कोई भी अडंगा न खड़ा हो, जिसकी वजह से गठबंधन न हो और बीजेपी को इसका फायदा मिल जाये।

अतुल मोहन
अतुल मोहन

 

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