Transmission line : टावर लगने पर मिलेगा मुआवजा

कैबिनेट ने सूबे के किसानों को पहली बार बिजली की ट्रांसमिशन लाइनों (Transmission line) का टावर खेत में लगवाने पर मुआवजा देने जा रही है। इसके लिए डीएम सर्किल रेट का 85 फीसद भुगतान किया जाएगा।

Transmission line : फसल के क्षतिग्रस्त होने पर

राज्य सरकार का कहना है कि अभी तक केवल ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे फसल के क्षतिग्रस्त होने का मुआवजा ही मिलता था। बीते कुछ वर्षों में ट्रांसमिशन लाइन के टावरों का साइज बढ़ता जा रहा है जिससे किसानों को खासा नुकसान होता है। इसे ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं

कैबिनेट ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर स्थापित 2मुख्य टोल प्लाजा, 15 रैंप प्लाजा, 5एंबुलेंस और 10 पेट्रोलिंग वाहनों के संचालन के लिए मेसर्स ईगल इंफ्रास्ट्रक्चर को काम देेने का निर्णय लिया है। यह एजेंसी इसके लिए करीब एक हजार कार्मिकों को तैनात करेगी। इससे यूपीडा पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा बल्कि टोल वसूली के रूप में उसे 220 करोड़ रुपये की आय होगी।

निर्बाध बिजली आपूर्ति

कैबिनेट ने नोएडा के सेक्टर 148 और 123 में 400 केवीए का बिजली उपकेंद्र बनाने को मंजूरी दी है। इसमें 165.65 व 141.41 करोड़ की लागत आएगी। इसके अलावा बस्ती के भौखरी में 400 केवीए का उपकेंद्र भी बनाया जाएगा। इसमें 829.59 करोड़ की लागत आएगी। इसके बनने से बस्ती के अलावा गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर व महराजगंज में बिना बाधा बिजली आपूर्ति की जा सकेगी।

श्रेणी सुपर मेगा से मेगा में परिवर्तित

राज्य सरकार ने चार मेगा इंडस्ट्री को लेटर ऑफ कंफर्ट जारी करने का निर्णय लिया है। इनमें बुलंदशहर की सर्वश्री सीमेंट लिमिटेड को 60.96 करोड़, रायबरेली की रिलांयस सीमेंट कंपनी को 42.28 करोड़, संडीला की वरुण बेवरेजेस को 20.51 करोड़ और मेरठ की पसवारा पेपर्स लिमिटेड को 1.38 करोड़ की वित्तीय सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा नोएडा की एलजी इलेक्ट्रानिक्स प्राइवेट लिमिटेड के अनुरोध पर उसकी श्रेणी सुपर मेगा से मेगा में परिवर्तित कर दी गयी है। उल्लेखनीय है कि पहले एलजी द्वारा 1328 करोड़ का निवेश किया जाना था जो अब घटकर 674 करोड़ हो गया है।

काशी विश्वनाथ क्षेत्र के विस्तारीकरण

कैबिनेट ने वाराणासी स्थित काशी विश्वनाथ क्षेत्र के विस्तारीकरण एवं सौंदर्यीकरण के लिए 24 सेवईत संपत्तियों को विनिमय के आधार पर लेने का फैसला लिया है। इसके एवज में उन्हें दूसरी जगह उनकी संपत्ति की लागत के बराबर संपत्ति खरीदकर दी जाएगी।

इसमें करीब 14.55 करोड़ रुपये का व्यय होगा।

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