तहसील दिवस में भी नहीं ली जा रही विधवा की सुध

बाराबंकी। राजधानी से सटे बाराबंकी जिले में पीड़ितों की अनदेखी चरम पर है। जहां तहसील दिवस में भी एक विधवा औरत की सुनवाई नहीं हो रही है। उसका कहना है कि वह पिछले चार महीने से दौड़ रही है। लेकिन उसकी कोई सुन ही नहीं रहा। पति की मृत्यु हुए लगभग चार महीने से ज्यादा समय बीत चुका है। जिसके बाद से अब उसके सामने मुशीबतों का पहाड़ सा टूट पड़ा है। नवाबगंज तहसील के देवा थाने के इसरहना गांव निवासी रामावती के पति परशुराम सिंह की मौत के बाद अब उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। ऐसे में वह पिछले 4 महीने से परशुराम सिंह के नाम 14 बीघा जमीन के लिए दौड़ रही है। जिस पर परशुराम की दूसरी पत्नी राजमती की पुत्री दुर्गा व उसके पति ने कब्जा कर रखा है। रामावती की मांग है कि उसके हिस्से की जमीन का मालिकाना हक उसके नाम कर दिया जाये। लेकिन राजमती इस बात से सहमत नहीं है जिससे वह न तो रामवती का समर्थन कर रही है और न ही विरोध। लेकिन ऐसे में रामावती के लिए उसका हक गले की हड्डी की तरह है। वहीं विभागीय अफसर भी अपनी लाचारी दिखाते हुए किसी भी तरह की मदद कर पाने में अपनी लाचारी दर्शा रहे हैं। इससे रामवती लोगों के पैर छूकर लोगों से न्याय मांगती घूम रही है।

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