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बेसिक शिक्षा मंत्री को तत्काल बर्खास्त करें मुख्यमंत्री : लल्लू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री सतीश द्विवेदी को बर्खास्त करने और बिना वैक्सिनेशन परीक्षा ना कराने की मांग को लेकर कांग्रेस ने सोमवार को राज्यव्यापी डिजिटल धरना दिया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा कि सतीश द्विवेदी ने मंत्री पद पर रहते हुए भ्रष्टाचार के बल पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के साथ अपने भाई अरुण द्विवेदी को सामान्य कोटे (ईडब्लूएस) के निर्धन आय वर्ग के पुराने प्रमाणपत्र के आधार पर जिस तरह दूसरे अभ्यर्थी का अधिकार हड़पते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया उसके बाद भी उनके विरुद्ध कार्यवाही न होना इस सरकार द्वारा भ्रष्ट तत्वों को खुले आम संरक्षण दिया जाना साबित हो चुका हैं।

उन्होने कहा कि योगी सरकार भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हुई है। बेसिक शिक्षामंत्री सतीश द्विवेदी स्वयं वह और उनकी पत्नी दोनों की असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर रहते 2016-17 में कुल आय 24 लाख रूपये से अधिक थी जिसमें सतीश द्विवेदी की उस वर्ष आय 17 लाख रूपये से अधिक थी, 36 लाख की चल सम्पत्ति व 76 लाख अचल सम्पत्ति के मालिक थे। इन्होने 2017 के चुनाव में स्वयं 5 लाख रूपये प्रचार में खर्च करने की सशपथ घोषणा चुनाव आयोग में दी थी।

शिक्षामंत्री ने 2021 में दबाव बनाकर 65 लाख रूपये मूल्य की जमीन 12 लाख रूपये में और दूसरी जमीन एक करोड़ 26 लाख रूपये की 20 लाख रूपये में कौड़ियों के भाव खरीदी। उन्होने सत्ता का दुरूपयोग करते हुए राजस्थान की वनस्थली विद्यापीठ असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत अपने भाई अरुण द्विवेदी को सामान्य वर्ग के निर्धन आय वर्ग के कोटे में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए 2019 में एक दिन में बनवाये गए आय प्रमाणपत्र के आधार पर नियुक्ति करायी। वह पूरी तरह से सत्ता का दुरुपयोग रहा जो जांच का विषय था।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि नौकरी से त्यागपत्र देने से न अपराध कम हो जाता और न ही समाप्त हो जाता है। वहीं बेसिक शिक्षा मंत्री बनने के बाद जिस तरह भ्रष्टाचार कर करोड़ाें रूपये की बेशकीमती जमीन सतीश द्विवेदी ने अपने परिजनों के नाम खरीदी है वह आय से अधिक सम्पत्ति का गम्भीर प्रकरण है। उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने मंत्रिमंडल से तत्काल बर्खास्त करने के साथ आय से अधिक अर्जित सम्पत्तियों को जब्त कर उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग व आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही की जाए।

उन्होंने कहा कि मंत्री बनने के बाद से बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार हर तरफ बढ़ा। एक प्रमाणपत्र के बल पर जिस तरह एक अध्यापिका ने 26 जिलों में एक साथ नौकरी कर वेतन प्राप्त किया, मिर्जापुर में मिड डे मील में नमक, रोटी बच्चों को देने के मामले का खुलासा करने वाले पत्रकार का उत्पीड़न किया गया और केजीबीवी में कोरोना काल में पढ़ाई बंद होने के बाद छात्राओं के भोजन आदि के मद के करोड़ों के किये गए भ्रष्टाचार से साबित हो चुका है कि मंत्री के भ्रष्टाचार को सरकार का सीधा संरक्षण प्राप्त है। यह वही मंत्री हैं जिन्होने पंचायत चुनाव में कोरोना संक्रमण के चलते 1621 शिक्षकों की मौत को नकारते हुए मात्र तीन शिक्षकों की मौत होना बताते रहे।

लल्लू ने मांग की परीक्षाओ के पूर्व सभी छात्र, छात्राओं, अध्यापकों के साथ परीक्षा में ड्यूटी करने वाले समस्त कर्मचारियों का वैक्सिनेशन कराया जाए, वैक्सिनेशन के बाद ही परीक्षायें आयोजित की जाएं। उन्होंने कहा कि छात्र, छात्राओं, अध्यापकों व कर्मचारियों के भविष्य व जीवन से खिलवाड़ न किया जाए।

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