बांगरमऊ उपचुनाव : विरासत, जातीय समीकरण या सत्ता की ताकत कौन पड़ेगा भारी!

बांगरमऊ। विधानसभा उपचुनाव केलिए सभी पार्टियों के उमीदवार घोषित होने के बाद बांगरमऊ का चुनाव दिलचस्प होता जा रहा है. एक तरफ बीजेपी, सपा और बसपा ने पिछड़ी जाति के उम्मीदवारों पर अप्नादांव लगया है, तो वहीं कांग्रेस की तरफ से महिला और ब्राह्मण उम्मेदवार आरती बाजपेई मैदान में हैं। बीजेपी के सामने अपनी साख बचाने की चुनौती है तो वहीं सपा के सामने पिछले चुनावों में दूसरे नंबर से पहले पर आने की कोशिश करनी है।

इन सब के बीच कांग्रेस का आरती बाजपेई को उम्मीदवार बनाना उसके पक्ष में जाता दिखाई दे रहा है। आरती बाजपेई न केवल महिला उम्मीदवार हैं बल्कि वे ब्राह्मण जाति से भी आती हैं। जिस तरह से हाल ही विपक्षियों ने सूबे की बीजेपी सरकार पर ब्राह्मण विरोधी होने का आरोप लगाया है और इस समुदाय में कहीं न कहीं बीजेपी को लेकर नाराजगी दिख रही है, वह आरती बाजपेई के पक्ष में माहौल बनाती दिख पड़ती है. यही नहीं कानून-व्यवस्था और किसानों के मुद्दे पर भी इस समय बीजेपी कहीं न कहीं बैकफुट पर जाती नजर आ रही है। साथ ही श्रीकांत कटियार का नाम घोषित होने के साथ ही बीजेपी में भितरघात की संभावना बढ़ गई है। पार्टी के उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज ने ही श्रीकांत कटियार के नाम पर खुलकर आपत्ति जता दी है।

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अल्पसंख्यक समुदाय नाराजगी

सपा ने पिछले चुनावों में दूसरे नंबर पर रहे बदलू खान का टिकट काटकर अल्पसंख्यक समुदाय नाराजगी का भाव पैदा कर दिया है। सपा की तरफ सुरेश पाल को टिकट मिला है जिनके खिलाफ कई आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं. गौरतलब यह है कि यह सभी मुकदमे राजनितिक न होकर आपराधिक हैं, इससे भी सपा मैदान में कमजोर पडती दिख रही है। बसपा ने भी पिछड़ी जाति के महेश पाल को टिकट दिया है. इससे पिछड़ी जाति का वोट सीधा-सीधा बंटता दिख रहा है।

स्व. गोपीनाथ दीक्षित की विरासत

वहीँ आरती बाजपेई पिछले 20 वर्षों से बिना किसी पद के होते हुए भी इलाके में सक्रिय रहकर इलाके के लोगों की समस्या उठाती रहीं हैं और विकास कार्यों में अपनी अहम भूमिका निभाई है। उनके पक्ष में जो एक अन्य फैक्टर जाता दिख रहा है वो है उनके पिता स्व. गोपीनाथ दीक्षित की विरासत। गोपीनाथ दीक्षित उन्नाव जिले और खासतौर से बांगरमऊ के लिए विकास पुरुष के नाम से याद किए जाते हैं। कांग्रेस के चुनाव प्रचार में यह भी देखने को मिला है कि मतदाताओं के घर के बड़े-बुजुर्ग आरती बाजपेई को देखते ही गोपीनाथ दीक्षित को याद कर भावुक हो जा रहे हैं। ऐसे में आरती बाजपेई द्वारा किए गए विकास कार्य और यह भावनात्मक जुड़ाव दोनों मिलकर उनके पक्ष में हवा बनाते दिख रहे हैं।

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