साहित्य/वीडियो

खुद पर रोशनी कम डालिए, तभी तो दूसरों को देख पाओगे

🔊 खबर सुनने के लिए क्लिक करें लोहड़ी और मकर सक्रांति आ रहे हैं। ये नए साल के ये पहले त्योहार हैं। पुराने साल के ज्यादातर त्योहार हम मना नहीं पाए। पुराने साल की कड़वी यादें सभी के पास हैं, पर अच्छी बात यह है कि हम सभी का वह ...

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मौन का संगीत

🔊 खबर सुनने के लिए क्लिक करें मौन का संगीत अब किसी के दिल में बस कर फिर कहीं जाना ना हो। जिंदगी की धूप छांव चाहे तीखी हों हवाएं साथ चलते ही रहें कोई अनजाना ना हो।। Loading... धड़कनों का राग अपना मौन का संगीत कितना चल रही है ...

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चांद और स्मृति

🔊 खबर सुनने के लिए क्लिक करें चांद और स्मृति विस्तृत, अनंत, शांत नभमंडल में, काली घटा की कालिमा घटाकर। नीरवता को समेटे शनै:शनै: विचरता, पूर्ण रात्रि का अर्द्ध-चन्द्र। अनगिनत प्रेमी प्रेमिकाओं के प्रेम संदेश लिए, भटक रहा है, यत्र-तत्र हल्कारे-सा। उसके इस भटकाव की सहचर हैं, निहारिका परिवार की ...

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मैं शहर हूं

🔊 खबर सुनने के लिए क्लिक करें ◆◆ मैं शहर हूं ◆◆  हाँ, मैं शहर हूँ जागा हुआ रहता रात भर हूं चैन की नींदें कहां भाग्य मेरे व्यस्तता ही रहती हमेशा साथ मेरे चाहता हूं मैं भी कभी हो सवेरा ऐसा जब ना कोई बेसबर हो शांति भरी हो ...

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उसकी याद

🔊 खबर सुनने के लिए क्लिक करें उसकी याद कितने दिनों के बाद उसकी याद आई है, यूं ही नहीं ये दिल की कली मुस्कराई है। अपना रखूं ख़याल कि दुश्मन की देख भाल, अल्लाह जाने क्या मिरे दिल में समाई है। दिखने लगा है मेरी मुहब्बत का अब असर, ...

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तब प्रेम नहीं कर पाऊंगी

🔊 खबर सुनने के लिए क्लिक करें तब प्रेम नहीं कर पाऊंगी कोई और होता तो समझ आता। दिल ये मेरा कुछ सम्भल जाता।। जो ये तूने किया तो कहाँ जाऊं मैं। शीतलता दिल की कैसे पाऊं मैं।। मैंने तुमसे निस्वार्थ प्रेम किया था। अपना तन-मन तुमको दिया था।। धन-दौलत, ...

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रिश्तों की अहमियत

🔊 खबर सुनने के लिए क्लिक करें रिश्तों की अहमियत मात-पिता के रिश्ते की जो ना जाने कद्र वो कुलांगार है, सच्चा रिश्ता वो होता है जो रिश्तों की माला करता कण्ठागार है। रिश्तों को रखें उलझाए हर पल जो वो रिश्तों का कसूरवार है, कभी हद से बढ़ जाती ...

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महिषासुरमर्दिनि

🔊 खबर सुनने के लिए क्लिक करें महिषासुरमर्दिनि मातृ रूप शक्ति रूप दिव्य रूप जननी दीनन पर दया करो महिषासुरमर्दनी। भटक रहे निराधार आशंकित मन विचार सम्बल कोई मिले नैया तब लगे पार। Loading... व्यथित जन की पुकार करुणा से तार तार विनती है बार बार कृपा करो जननी महिषासुरमर्दनी।। ...

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निर्वाह

🔊 खबर सुनने के लिए क्लिक करें निर्वाह गोदी में शिशु को लिए पत्थर तोड़े मां काम करे ना एक दिन कैसे हो निर्वाह। झोपड़ पट्टी धूम में ना बिजली ना छांव खाली करने का कभी आ सकता फरमान। व्यस्त है इतने आज में कल की सोचे कौन बीत रही ...

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पर्वत 

🔊 खबर सुनने के लिए क्लिक करें पर्वत  पिता पर्वत समान जहाँ मिलता है सुखद विश्राम। वह रोक लेते है अपने ऊपर प्रतिकूल आंधी और तूफान।। मिलता है सहज संरक्षण तपिश में वर्षा जल की शीतल बूंदे। दूर रहता है संताप…पिता पर्वत समान पिता के जाते ही अदृश्य हो जाता है।   ...

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