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साहित्य/वीडियो

दुम दबा के ड्रैगन भागा

आशुतोष, पटना (बिहार)

दुम दबा के ड्रैगन भागा जिनको हमने दोस्त बनाया। वही पीठ पर भोके खंजर।। जिनको हमने अपना माना। उनके हाथ खून से लता पथ।। देखो चीन पुनः सीमा पर। युद्ध करने के लिए आया है।। भारत ने भी ठान लिया है। अक्साई भारत बनाना है।। तम्बू गाड़े या बनाये बंकर। ...

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मां

प्रेम बजाज, जगाधरी (यमुनानगर)

मां क्या तुलना उस मां की सुरज- चांद – सितारों से गंगा से ,जमुना से , समुद्र से या नदियां हज़ारों से । मां की ममता का कोई मोल नहीं , दुनियां में इसके बराबर दुनियां में कोई मीठा बोल नहीं । सुख का सागर है मां , प्यार की ...

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वो कौन है

भावना ठाकर 'भावु', बेंगुलूरु

वो कौन है एक साया पल-पल उन्मादित करता, मेरी उर धरा को क्या जाने वो कौन है। उस पार से दूर के संगीत सा बजता, मेरे मन विना के तार को झंकृत करता वो कौन है। मुझे बुलाता दर्द के दाग को अश्कों से जब धोती हूँ, तब शून्य नभ ...

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संकीर्ण दायरे

निधि भार्गव मानवी

संकीर्ण दायरे नकार दो न, उस शोर को जो जबरन टकराता है कानों की अंदरूनी सतह पर जाकर…क्यूं सुनते हो बेवजह बेबुनियाद,दलीलों को? तोड़ दो न ये दायरे दखलंदाजी के आख़िर कब तक कैद रहोगे.. दड़बे नुमा… खोखले विचारों के अंधेरे खंडहर में, घुटे और सहमें हुए, गुजारिश है वक्त ...

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खुश हूँ मैं

आशीष तिवारी निर्मल

खुश हूँ मैं जिससे मिला ही नहीं उसकी जुदाई से खुश हूँ मैं। गैरों से की मेरी बुराई उसकी इस अच्छाई से खुश हूँ मैं। अपनों की तारीफों से भी यदि खुशी नही मिलती खुद की ही मुसलसल खुद्सिताई से खुश हूँ मैं। किसी कमनीय कन्या को बनाया ही नही ...

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लाॅकडाउन

इलाहाबाद यानी प्रयागराज अपने आप में एक सम्पूर्ण और गौरवशाली नगरी रही है। महानगरों की तुलना में बिल्कुल शांत शहर मगर शिक्षा के क्षेत्र में उनसे कहीं आगे।यह शहर प्रतिभाओं की नगरी भी कहा जाता है। किसी समय यहां बाहरी लोग भी यदि पानी मांग लें तो उन्हें पानी के ...

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कोरोना की लड़ाई

ओटेरी सेल्वा कुमार

कोरोना की लड़ाई फेस मास्क पहने हाथों पर दस्ताने पहनें सिर पर टोपी पहने हुए युद्ध के एक सैनिक की तरह जहां लोग वायरस के खिलाफ लड़ रहे हैं वायरस जरूर है इस लड़ाई में जीतने के लिए जा रहे हैं कारण … वायरस दिखाई नहीं देता है किसी भी ...

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चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से…खादी अउ खाकी केरे संरक्षण महियां

मैं आज जब प्रपंच चबूतरे पर पहुंचा तो चतुरी चाचा, ककुवा व बड़के दद्दा खादी-खाकी-अपराधी गठजोड़ पर चर्चा कर रहे थे। तीनों लोग कानपुर की घटना के परिपेक्ष्य में गम्भीर बातें कर रहे थे। तभी दक्खिनय-हार से नदियारा भौजी आ गईं। नदियारा भौजी ने आते ही कोरोना महामारी पर सवाल ...

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39 साल बाद हुआ है यूपी पुलिस पर बड़ा हमला!

डकैत छविराम के साथ 7 अगस्त 1981 में हुई मुठभेड़ में नौ पुलिस कर्मियों के साथ तीन ग्रामीण शहीद हुए थे। दस्यु छविराम नेता द्वारा किये गए हत्याकांड से उत्तर प्रदेश पुलिस थर्रा गई थी। अपनों की गद्दारी के कारण 1981में हुए नथुआपुर कांड की पुनरावृति है कानपुर का बिकरू ...

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घाव बहुत गहरे हैं

प्रो.शरद नारायण खरे

घाव बहुत गहरे हैं रोदन करती आज दिशाएं, मौसम पर पहरे हैं ! अपनों ने जो सौंपे हैं वो, घाव बहुत गहरे हैं !! बढ़ता जाता दर्द नित्य ही, संतापों का मेला कहने को है भीड़, हक़ीक़त, में हर एक अकेला रौनक तो अब शेष रही ना, बादल भी ठहरे ...

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