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माध्यमिक कालेजों के तदर्थ शिक्षक अधर में, तीन माह से नही मिला है वेतन

जिले के 86 तदर्थ शिक्षकों पर लटकी है तलवार
रायबरेली। जिले 46 अशासकीय सहायताप्राप्त (एडेड) माध्यमिक कालेजों में कार्यरत तदर्थ शिक्षकों को झटका लगा है। जिले के 86 शिक्षक जो तदर्थ हैं।उन्हे तीन माह का वेतन नही मिला है। जिससे शिक्षक परेशान हैं। कई सालो तक सर्विस में रह कर वेतन ले रहे थे अब वह पैदल हो गए हैं। उनके यहां अब स्थित यह है की उधार लेकर काम चलाना पड़ रहा है। अभी यह भी असमंजस है की नौकरी रहेगी या जायेगी।30 दिसंबर 2000 से पहले से नियुक्त शिक्षकों को विनियमित करने के लिए वित्त व न्याय विभाग की सहमति नहीं है। एडेड माध्यमिक कालेजों में तैनात तदर्थ शिक्षकों का मुद्दा इन दिनों सतह पर है। माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र की ओर से कराई गई लिखित परीक्षा में गिने-चुने तदर्थ शिक्षकों को नियुक्ति मिल सकी है। बड़ी संख्या में शिक्षकों को वेटेज अंक नहीं मिले या परीक्षा उत्तीर्ण न कर पाने से वे बाहर हो गए। अब तदर्थ शिक्षकों का वेतन जिला विद्यालय निरीक्षक रोक रहे हैं।
शिक्षा निदेशक माध्यमिक डा. सरिता तिवारी ने सदन में पूछे गए सवाल पर शासन को पत्र लिखा है, इसमें शिक्षकों को विनियमित करने में दी जा रही सहूलियत और तदर्थ शिक्षकों को भारांक आदि देने का उल्लेख किया गया है। निदेशक ने लिखा कि 26 अगस्त 2020 को शीर्ष कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश पर सात दिसंबर 2021 को लिखित परीक्षा कराई गई। इसमें असफल या परीक्षा में शामिल न होने वाले तदर्थ शिक्षकों को विनियमित करने की कोई व्यवस्था नहीं है। यह भी लिखा है कि इस प्रकार के शिक्षकों को सेवा में बनाए रखना या वेतन देना भी सही नहीं होगा। इसी तरह से एडेड माध्यमिक विद्यालयों में 30 दिसंबर 2000 के पूर्व नियुक्त व इस समय कार्यरत ऐसे शिक्षक जो न्यायालय के अंतिम या अंतरिम आदेश से वेतन पा रहे हैं के विनियमितीकरण के संबंध में न्याय व वित्त विभाग ने सहमति नहीं दी है। कार्मिक विभाग ने 16 दिसंबर 2021 को तदर्थ नियुक्तियों की विनियमितीकरण नियमावली में संशोधन किया था।

लगभग खत्म है उम्मीद

तदर्थ शिक्षकों को अब न नौकरी, न ही वेतन, अशासकीय सहायता प्राप्त कॉलेजों में हैं तैनात, शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने 2000 के बाद की नियुक्तियों के संबंध में  स्थिति साफ की है। जिसमे उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. सरिता तिवारी ने साफ कर दिया है कि तदर्थ शिक्षकों को नियमित नहीं किया जा सकता। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. सरिता तिवारी ने साफ कर दिया है कि तदर्थ शिक्षकों को नियमित नहीं किया जा सकता। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) और प्रवक्ता (पीजीटी) भर्ती 2021 में तदर्थ शिक्षकों को अवसर दिया था।
नियुक्ति के आधार पर भारांक देते हुए सफल तदर्थ शिक्षकों को नियमित शिक्षक के रूप में पैनल व कार्यभार ग्रहण कराने के आदेश जारी किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के सात दिसंबर 2021 के आदेश में परीक्षा में असफल या प्रतिभाग न करने वाले तदर्थ शिक्षकों को विनियमित करने की कोई व्यवस्था नहीं है। इस प्रकार 30 दिसंबर 2000 के बाद नियुक्त तदर्थ शिक्षकों को सेवा में बनाए रखना या वेतन दिया जाना नियम संगत नहीं है। 30 दिसंबर 2000 के पूर्व से नियुक्त एवं वर्तमान में कार्यरत ऐसे शिक्षक जो कोर्ट के अंतरिम आदेश से वेतन प्राप्त कर रहे हैं। उनके विनियमितीकरण के संबंध में वित्त एवं न्याय विभाग की सहमति नहीं है।

क्या बोले शिक्षक नेता

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष राकेश मिश्र ने बताया अभी शासन की ओर से वेतन रोकने का आदेश लिखित रुप से नही आया है। फिर भी इन शिक्षको को तीन महीने से वेतन नही मिला है। जो चिन्ता का विषय है। इस सम्बंध में जिला विद्यालय निरीक्षक ओमकार राणा से बात करने का प्रयास किया गया पर बात नही हो सकी।
रिपोर्ट-दुर्गेश मिश्रा 

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