15 सालों बाद जर्मनी की राजनीति में वामपंथी विचारधारा ने ली करवट, एंजला मर्केल की पार्टी को करना पड़ा हार का सामना

जर्मनी में 15 सालों बाद चांसलर एंजला मर्केल के राजनीतिक सन्यास लेने की घोषणा के बाद हुए चुनाव में उनकी पार्टी को गहरा झटका लगा  है और 15 सालों के बाद जर्मनी की राजनीति में वामपंथी विचारधारा ने करवट ली है।

जर्मनी के राष्ट्रीय चुनाव में केंद्र-वामपंथी दल सोशल डेमोक्रेट्स (एसपीडी) ने वोट का सबसे बड़ा हिस्सा जीत लिया है और निवर्तमान चांसलर एंजेला मर्केल के केंद्र-दक्षिणपंथी यूनियन ब्लॉक को कांटे के टक्कर में हरा दिया है।

जर्मनी के चुनाव अधिकारियों ने सोमवार सुबह सुबह घोषणा की है कि, सभी 299 निर्वाचन क्षेत्रों की गिनती से पता चलता है कि सोशल डेमोक्रेट्स ने 25.9 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं, जबकि यूनियन ब्लॉक के लिए 24.1 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं और सोशल डेमोक्रेट्स ने चुनाव में जीत हासिल कर ली है।

जर्मनी चुनाव अधिकारियों के मुताहिक, जर्मनी की 730 सीटों की संसद में एसपीडी पार्टी को 205 सीटें, सीडीयू/सीएसयू पार्टी को 194 सीटें, एलायंस को 90 सीटें, ग्रीन्स को 116 सीटें और डेमोक्रेटिक पार्टी को 91 सीटें मिली हैं।

जर्मनी में एक मतदाता को एक बार में दो वोट देने का अधिकार होता है। एक वोट में वो अपने संसदीय क्षेत्र के लिए प्रतिनिधि का चुनाव करता है और दूसरे वोट में वो अपने संसदीय क्षेत्र के लिए राजनीतिक पार्टी का चुनाव करता है। अब संसद में जिस पार्टी को सबसे ज्यादा जिलों के लोगों ने चुना है, वो पार्टियां और सांसद मिलकर तय करेंगे, कि देश का नया चांसलर कौन बनेगा।

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