Breaking News

चीन के बाद तुर्की-सऊदी अरब भी कर रहे G-20 सम्मेलन से किनारा, जानिए पूरा मामला

जम्मू कश्मीर में होने वाले ऐतिहासिक जी-20 सम्मेलन पर बाहरी ताकतों द्वारा भारत को नापाक घेरने की कोशिश की जा रही है। पहले चीन ने कश्मीर को विवादित क्षेत्र बताकर सम्मेलन से खुद को किनारा कर दिया।

👉मुख्‍तार अंसारी के छोटे बेटे उमर पर कसा शिकंजा, कोर्ट ने जारी किया गैर जमानती वारंट

जी-20 सम्मेलन

अब खाड़ी देशों तु्र्की और सऊदी अरब भी सम्मेलन में भाग लेने को कतरा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की और सऊदी अरब ने अभी तक सम्मेलन में भाग लेने की इच्छा नहीं जताई है। पाकिस्तान पहले ही इस कश्मीर में सम्मेलन के आयोजन को लेकर बखेड़ा खड़ा चुका है। अब चीन और खाड़ी देशों के कदम से साफ है कि बाहरी ताकतें कश्मीर पर राजनीति करने की कोशिश कर रही हैं। चीन के दोगलेपन से तो दुनिया वाकिफ है लेकिन, तुर्की और सऊदी अरब के जी-20 सम्मेलन से खुद को दूर रखने की वजह क्या है, समझते हैं।

जम्मू कश्मीर में होने वाले जी20 टूरिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक शुरू होने से तीन दिन पहले तक तुर्की और सऊदी अरब ने पंजीकरण नहीं कराया है। चीन इस मामले में अपनी बात स्पष्ट कर चुका है। रिपोर्ट में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन के हवाले से कहा गया है: “चीन विवादित क्षेत्र पर किसी भी प्रकार की जी20 बैठक आयोजित करने का दृढ़ता से विरोध करता है … हम ऐसी बैठकों में शामिल नहीं होंगे।”

हालांकि तुर्की या सऊदी अरब की ओर से कोई आधिकारिक शब्द नहीं आया लेकिन, उन्होंने अभी तक इस सम्मेलन में भाग लेने को लेकर चुप्पी साधी हुई है। इस बीच केंद्रीय पर्यटन सचिव अरविंद सिंह ने जानकारी दी कि सम्मेलन के लिए पंजीकरण 22 मई किया जा सकेगा।

👉सीएम पुष्कर सिंह धामी ने किया राजाजी नेशनल पार्क का भ्रमण, कहा यह क्षेत्र बने पर्यटन हब , लोग यहां देखने आए…

जी20 सदस्यों के अलावा अतिथि देशों और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है। इनमें बांग्लादेश, मिस्र, मॉरीशस, नीदरलैंड, नाइजीरिया, ओमान, सिंगापुर, स्पेन और यूएई शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि मिस्र को छोड़कर बाकी सभी देशों ने अपने प्रतिनिधि भेजने के लिए पंजीकरण कराया है। अधिकारियों ने पुष्टि की कि शेष देशों के प्रतिनिधियों ने तीन दिवसीय आयोजन के लिए हस्ताक्षर किए हैं।

दरअसल, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन कश्मीर को लेकर कई बार पाकिस्तान का खुलकर समर्थन कर चुके हैं। फरवरी 2020 में पाकिस्तानी संसद में संबोधन के दौरान उन्होंने कहा था कि कश्मीर जितना पाकिस्तान के लिए अहम है, उतना ही अहम तुर्की के लिए भी है। तुर्की ने 2019 में कश्मीर में धारा 370 हटने पर विरोध भी दर्ज किया था। जिस पर भारत ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह उसका आंतरिक मामला है।

इस मामले में वह किसी बाहरी देश से हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेगा। उधर, दूसरे खाड़ी देश सऊदी अरब ने इस मामले में भले ही कोई प्रतिक्रिया नही दी थी। लेकिन ऐतिहासिक रूप से देखें तो सऊदी अरब भी पाकिस्तान का हितैषी रहा है।

भारत के अलावा, G20 में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ शामिल हैं।

About News Room lko

Check Also

संयुक्त अरब अमीरात के दौरे पर जयशंकर, विदेश मंत्री नाहयान से मुलाकात कर कई अहम मुद्दों पर करेंगे चर्चा

विदेश मंत्री एस जयशंकर आज संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जाएंगे। इस दौरान वह अपने समकक्ष ...