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अजब गजब

कमाल का ट्रक

इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली कंपनी टेस्ला ने एक जबरदस्त ट्रक पेश किया है। ये इलेक्ट्रिक ट्रक सिर्फ 30 मिनट चार्ज करने के बाद करीब 650 किलोमीटर की दूरी तय करेगा। एक बार चार्ज हो जाने पर ये करीब 800 किलोमीटर तक चल सकेगा। इस ट्रक की प्रति माइल्स ऑपरेटिंग कॉस्ट (1 मील चलने पर होने वाला खर्च) परंपरागत डीजल सेमी ट्रक के मुकाबले 20 फीसदी कम है। ऑटो पायलट सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए टेस्ला के कई ट्रक हाईवे पर एक काफिला बना सकते हैं, जिससे इनकी ऑपरेटिंग कॉस्ट और घट जाती है। नया ट्रक फुली इलेक्ट्रिक क्लास 8 ट्रक है, यह ऐसे व्हीकल्स की कैटेगरी है, जो कि 33,000 पाउंड से ज्यादा का वजन ढो सकते हैं। ये ट्रक हाईवे स्पीड पर अधिकतम वजन के साथ 500 माइल्स (800 किलोमीटर) की रेंज ऑफर कर रही है. अगर सेफ्टी फीचर की बात की जाए तो इस इलेक्ट्रिक ट्रक में ऑटोमैटिक ब्रेकिंग, लेन ट्रैकिंग और विंडशील्ड के लिए न्यूक्लियर एक्सप्लोजन-प्रूफ ग्लास जैसे फीचर हैं।

एक मिनट में 16 लाख गोलियां दागने वाली गन


दुनिया भर के देश ऐसे हथियारों पर रिसर्च कर रहे हैं जो कि ज्यादा असरदार हों और जिससे सैनिकों की जान पर कम से कम खतरा हो। यूएस नेवी, इजराइल और ऑस्ट्रेलिया ऐसे देश हैं जिन्होंने इस दिशा में बड़ी कामयाबी भी हासिल की है। XM29 राइफल और कॉर्नर शॉट जैसी बंदूक इसका बढ़िया उदाहरण है। आज हम आपको ऐसी ही टॉप 5 एडवांस्ड गन बंदूकों के बारे में बता रहे हैं जो युद्ध का भविष्य बदलने की क्षमता रखती हैं।
यूएस नेवी ने वेपन डवलपमेंट प्रोग्राम के तहत XM29एडवांस्ड कॉम्बैट राइफल तैयार की है. फिलहाल अमेरिकी सेना बेहद उन्नत ड16 राइफल का इस्तेमाल करती है।XM29 की खासियत है इसका एक ही वक्त पर 2 जगह निशाना लगाने की क्षमता। ये राइफल किसी भी मूविंग ऑब्जेक्ट को निशाना बनाने में सबसे बेहतर मानी जा रही है। ये अपने निशाने को तो लॉक करती ही है साथ ही एक फायर उस दिशा में भी करती है जिस तरफ को ऑब्जेक्ट के मूव करने की आशंका होती है। इसी तकनीक का इस्तेमाल लेजर बॉम्बिंग के लिए भी किया जाता है। यूएस नेवी के मुताबिक आने वाले दो सालों में ये गन उपलब्ध हो जाएगी।

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भिखारन ने दिये ढाई लाख


कमजोर सी दिखने वाली 85 साल की एमवी सीतालक्ष्मी जो मैसूर के एक मंदिर के आगे भीख मांगती है। उसी सीतालक्ष्मी ने वोन्टीकोप्पल मंदिर में अब ढाई लाख का रुपये का दान दिया है। सीतालक्ष्मी ने यह दान मंदिर की देख रेख के लिए दिया है। बता दें कि सीतालक्ष्मी पहले एक घरेलू कर्मचारी थीं लेकिन उम्र के साथ कमजोर होती गईं और भीख मांगने का रास्ता पकड़ लिया। हालांकि ढाई लाख रुपये का चंदा देकर सीतालक्ष्मी के प्रति सबका नजरिया पूरी तरह बदल गया है। अब श्रद्धालू सिर्फ मंदिर में भगवान के ही नहीं, सीतालक्ष्मी के दर्शन के लिए भी आते हैं।

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