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यहाँ हुआ था भगवान श्रीकृष्‍ण्‍ा का मुंडन

शक्‍त‍ि पीठों को लेकर मान्‍यता है क‍ि जहां-जहां देवी सती के अंग ग‍िरे थे वहां-वहां पर शक्तिपीठ है। ऐसे में इन 51 शक्‍त‍िपीठों में हरि‍याणा के प्रस‍िद्ध स्‍थान कुरुक्षेत्र में देवी भद्रकाली शक्तिपीठ है। मान्‍यता है क‍ि यहां पर माता सती के पैर का न‍िचला भाग ग‍िरा था। इसके अलावा भगवान श्रीकृष्‍ण का मुंडन हुआ था। आइए जानें इस शक्‍त‍िपीठ के बारे में…

भक्‍तों की होती भीड़
मान्‍यता है क‍ि यहां पर सती जी के दाएं पैर का न‍िचला भाग ग‍िरा था। जि‍ससे यहां पर भद्रकाली देवी शक्तिपीठ की स्‍थापना हुई है। इस मंद‍िर में मां भद्रकाली की सुंदर प्रतिमा बेहद शांत मुद्रा में विराजमान है। यहां पर बड़ी संख्‍या में भक्‍त दर्शन करने आते हैं। यहां केवल हर‍ियाणा से ही नहीं बल्‍क‍ि दूर-दूर से भी लोग दर्शन के ल‍िए आते हैं। नवरात्रों के समय तो यहां पर भक्‍तों की अथाह भीड़ होती है। इस शक्तिपीठ को लेकर एक और मान्‍यता है। यहां एक खूबसूरत सा तालाब है। ज‍िसके एक छोर पर तक्षेश्वर महादेव मंदिर भी है।

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श्रीकृष्‍ण का मुंडन
माना जाता है क‍ि यही वह जगह है जहां पर भगवान श्रीकृष्‍ण का मुंडन हुआ था। ज‍िसके कारण इस जगह का महत्‍व और ज्‍यादा माना जाता है। इसका संबंध महाभारत से है। एक यह भी मान्‍यता है क‍ि यहां पर महाभारत के युद्ध से पूर्व अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण की प्रेरणा से मां भद्रकाली की पूजा की थी। अर्जुन ने मां से कहा था क‍ि अगर उनकी कृपा से वह युद्ध जीतते हैं तो वह यहां पर घोड़े चढ़ाने आएंगे। अर्जुन समेत पूरे पांडवों ने व‍िजय हास‍िल करने के बाद ऐसा ही किया था। इसके बाद से यहां पर मन्‍नत पूरी होने पर सोने, चांदी व मिट्टी के घोड़े चढ़ाने का र‍िवाज चल गया।

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