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भारत में हिंदी भाषा की उपयोगिता

  अमरजीत कुमार “फरहाद”

हिंदी भाषा दुनिया की प्राचीनतम भाषाओं में से एक है। दुनिया में सर्वप्रथम संस्कृत भाषा का उद्भव हुआ एवं कालांतर में संस्कृत से ही हिंदी भाषा का जन्म हुआ। संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि हिंदी भाषा संस्कृत का अपभ्रंश रूप है। कालांतर में हिन्दी का व्यापक प्रचार-प्रसार होने से हिन्दी भारत ही नहीं अपितु विश्व की एक प्रमुख भाषा के रूप में उभरी। भारत सरकार के द्वारा हिन्दी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 14 सितंबर 1949 को संविधान के अनुच्छेद 343 में हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया तथा इसे 8 वीं अनुसूची मे भी शामिल किया गया। जिसके अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी। आज के समय में हिंदी विश्व की सबसे प्रसिद्ध भाषाओं में से एक है एवं विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है, जिसका विस्तार विश्व के लगभग 46 देशों तक है एवं विगत 10 वर्षों में हिंदी बोलने एवं समझने वाले लोगों की संख्या में 10 करोड़ की वृद्धि दर्ज की गई है। भारत एक बहुभाषी राष्ट्र है, जिसमें हर प्रांत की अपनी एक भाषा और बोली है। हमारी राजभाषा हिन्दी एकता एवं अखंडता की कड़ी है, जो संपूर्ण राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने का काम करती है। हिंदी भाषा बहुत ही सरल, सहज एवं मधुर है। देश के सभी जगहों पर आम जनता अपने नियमित कार्यों में हिंदी भाषा का उपयोग करती हैं। राजभाषा हिंदी संपूर्ण देश में अधिकांश लोगों द्वारा बोली एवं समझी जाती है।

विश्व के लगभग 137 विश्वविद्यालयों में हिंदी का शिक्षण होता है। विदेशों में भी हिंदी भाषा का प्रचार एवं प्रसार बढ़ रहा है।
इंटरनेट के इस युग में हिंदी को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिल रही है। 22 वीं विश्व भाषा एथनोलॉग रिपोर्ट, वर्ष 2019 के अनुसार विश्व में हिंदी जानने वालों की संख्या अंग्रेजी व मंदारिन (चीन की भाषा) के बाद सर्वाधिक है। हिंदी भाषा पर जारी किए गए इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 में विश्व में हिंदी जानने वालों की संख्या 615 मिलियन है। विश्व के लगभग 12 प्रतिशत लोग हिंदी भाषा जानते हैं एवं भारत देश के लगभग 80 प्रतिशत लोगों द्वारा हिन्दी का प्रयोग किया जाता हैं।
भारतवर्ष में उदारीकरण एवं सार्वभौमीकरण के कारण आर्थिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य में हिंदी भाषा की स्वीकार्यता बढ़ने लगी। इसी प्रकार देश में कंप्यूटर के आगमन के पश्चात हिंदी भाषा के विकास की कल्पना संदिग्ध होने लगी थी, परंतु कालांतर में यह अपना स्थान कंप्यूटर के अनुप्रयोगों में भी बढ़ा चुकी है। साथ ही इंटरनेट के इस युग में हिंदी को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिल चुकी है। हिंदी भाषा के व्यापक प्रसार के कारण विश्व की अनेक वेबसाइट हिंदी अपना चुकी है। ई-मेल, ई-कॉमर्स, इंटरनेट, एस. एम. एस. एवं वेब जगत मे भी हिंदी की उपलब्धता है। माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, आईबीएम तथा ओरेकल जैसे कंपनियां भी हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। एक अध्ययन के अनुसार हिंदी सामग्री की खपत करीब 94 प्रतिशत तक बढ़ी है।
हर पांच में से एक व्यक्ति हिंदी में इंटरनेट प्रयोग करता है। हिंदी में कई प्रकार के सॉफ्टवेयर एवं स्मार्टफोन एप्लीकेशन उपलब्ध है। फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप में हिंदी में लिख सकते हैं। आज के दौर में करोड़ों लोग हिंदी भाषा में कंप्यूटर का प्रयोग करते है। वर्तमान समय संचार प्रौद्योगिकी का है, जिसमें भारत के गांवों को भी इससे जोड़ा गया है। भारत के ग्रामीण इलाके में रहने वाले लोग सिर्फ हिंदी भाषा के साथ ही दुनिया के साथ संपर्क में है। सूचना क्रांति के दौर में लगभग सभी कार्ययोजना हिंदी में उपलब्ध होने के कारण इसकी व्यापकता ग्रामीण स्तर तक पहुंच चुकी है। हिंदी भाषा को वैश्विक विस्तार के कारण हिंदी में लिखे गए उपन्यास की लोकप्रियता विश्व स्तर पर हो रही है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोगों के बीच रोजगार के नए अवसर का सृजन हो रहा है।
आज की हिंदी एक समृद्ध एवं विकासशील भाषा है जो सिर्फ अंग्रेजी के 10,000 से अधिक शब्दों को अपना चुकी है। हिंदी भाषा के शब्दकोश में शब्दों की संख्या 20,000 से बढ़कर 1,50,000 हो चुकी है। हिंदी में इंटरनेट प्रयोग करने वालों की संख्या 94 प्रतिशत से बढ़ी है। आज हिंदी केवल हिंदुस्तान की भाषा ना होकर संपूर्ण विश्व की भाषा बन चुकी है। हिंदी भाषा का इतना विकास हुआ हैं कि स्टार चैनल ने अपना टीआरपी बढ़ाने के लिए हिंदी भाषा का प्रयोग प्रारंभ कर दिया। हिंदी आज विश्व में मनोरंजन की दुनिया में सबसे आगे है, जिसके कारण सोनी, जी.टी.वी., डिस्कवरी चैनल आदि भी भारत में हिंदी में प्रसारित होने लगे। यहां विदित हो कि भारतीय वेद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात हैं एवं अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 175 देशों के समर्थन से संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की मान्यता प्रदान की है।
विश्व के कई देशों के द्वारा 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। हिंदी संख्या बल की दृष्टि से विश्व में सबसे अधिक है एवं भारत में परोक्ष रूप से हिंदी राजनीतिक एवं आर्थिक शक्ति का आधार स्तंभ है। वर्तमान परिवेश में हिंदी राजनीतिक एवं आर्थिक दृष्टिकोण से सुदृढ़ हो चुकी है। विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों में हिंदी का अध्ययन एवं अध्यापन का कार्य चल रहा है। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी हिंदी की महत्ता तथा उसके अपेक्षाओं के संदर्भ में लिखते हैं- “भारत वर्ष के पड़ोसी देशों में आजकल हिंदी साहित्य पढ़ने एवं समझने की तीव्र इच्छा प्रबल हुई है।“ भारत के वैश्विक पहचान के कारण विश्व के अन्य देश भारत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित रखने के लिए प्रयत्नशील हैं जिसके लिए उन्हें भारत की संपर्क भाषा अर्थात हिंदी का सहारा लेना पड़ रहा हैं। हमारे पड़ोसी मुल्क भी हिंदी के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त हिंदी साहित्य की पहुंच विश्व स्तर पर हो रही है, जिसके विकास के कारण हिंदी साहित्य का अनुवाद विश्व के कई भाषाओं में किया जा चुका है। हिंदी का विस्तार अपनी भौगोलिक सीमा को पार कर, विश्व स्तर पर गहरी पैठ जमा चुका है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार हिंदी साहित्य का वैश्विक अनुवाद होने के पश्चात विश्व के अनेक भाषाओं के साहित्य में हिन्दी पहुंच चुकी हैं। भारत में हिंदी भाषा के बढ़ती लोकप्रियता एवं उपयोगिता के कारण हिंदी अब ग्लोबल भाषा बन चुकी है। विश्व पटल पर भारत की संस्कृति एवं साहित्य का सटीक वर्णन करने में हिन्दी भाषा का प्रमुख योगदान रहा है। भारत के प्रतिष्ठित साहित्यकारों की कृतियों का विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। प्रसिद्ध भारतीय रचनाकारों के कुछ उदाहरण इस प्रकार है- काशीनाथ सिंह, कैलाश बाजपेई, जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, पांडे बेचैन शर्मा ‘उग्र’, प्रेमचंद, निराला, सुभद्रा कुमारी चौहान, सुमित्रानंदन पंत, रामधारी सिंह दिनकर, राही मासूम रजा, भीष्म साहनी, मन्नू भंडारी जिनकी रचनाओं का जापानी भाषा में अनुवाद हो चुका है।
इसी प्रकार रूसी भाषा, चीनी भाषा, इतालवी भाषा, डच भाषा, फ्रेंच आदि अन्य कई भाषाओं में भारतीय साहित्यकारों के कृतियों का अनुवाद हो चुका है। अनुवाद की परंपरा के विस्तार से विश्व साहित्य में हिंदी भाषा का महत्व बढ़ा है, और हिंदी एक विश्व भाषा के रूप में उभरी है। विश्व में हिंदी के प्रति बढ़ती रूचि के कारण विश्व के अधिकांश विकसित राष्ट्र भारतीय भाषा के अध्ययन के प्रति आकृष्ट हुए हैं। दुनिया के लगभग 46 देशों में हिंदी भाषा के पठन-पाठन की सुविधा उपलब्ध है। सूचना क्रांति के कारण हिंदी भाषा का काफी विस्तार हुआ है। वर्तमान समय में हिन्दी के कंप्यूटरीकरण का काम लगभग पूरा हो चुका हैं, जिसके फलस्वरूप देश के 68 प्रतिशत लोगों ने हिन्दी भाषा पर अपना भरोसा जताया है।
भारत विविधताओं में एकता का देश है, इसमें अलग-अलग जाति, धर्म, संप्रदाय एवं वर्ग के लोग निवास करते हैं। जिसमें सभी क्षेत्र के लोगों की जीवन-चर्या, बोलचाल, भाषा व विचार भिन्न होते हैं। भाषा अभिव्यक्ति का एक माध्यम है, जिसके प्रयोग के द्वारा हम सभी अपने विचारों एवं तकनीकों का आदान प्रदान करते हैं। इन विभिन्नताओ में देश का प्रतीक, हम सबों को एकता की प्रेरणा देता है। भारत देश में यह प्रचलित है, कि पानी की तरह हर कुछ किलोमीटर पर भाषा बदल जाती हैं। पिछली जनगणना के अनुसार भारत में 122 भाषाएं एवं 19500 से ज्यादा बोलियां बोली जाती हैं। भाषा व्यक्ति को उसकी संस्कृति के साथ जोड़ती है।
भारत देश में भाषा तथा संस्कृति की विविधता देश को समृद्ध करती है। भाषा एवं सांस्कृतिक विविधता के बावजूद हिंदी संपूर्ण राष्ट्र में एकता का प्रतीक रही है। हमारे देश को आजाद करवाने में महात्मा गांधी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी। गांधी जी ने अहिंदी भाषी प्रांत के निवासी होने के बावजूद हिंदी को आंदोलन की मुख्य भाषा बनाया, क्योंकि हिंदी ही संपूर्ण राष्ट्र में समझी जाने वाली एक मात्र भाषा थी। इसी भाषा के बल पर आंदोलन का सपना साकार हुआ एवं भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र बना। महात्मा गांधी ने कहा था “राष्ट्रीय व्यवहार में हिंदी को काम में लाना देश की एकता और उन्नति के लिए आवश्यक है।” संचार क्रांति के पश्चात हिंदी भाषा के व्यापक प्रयोग होने के कारण आज हम सभी तकनीकी रूप से सुदृढ़ हो चुके हैं। यह लक्ष्य हिंदी भाषा के बेहतर अनुप्रयोगों के कारण संभव हो पाया है।
रोजगार के नए अवसर के साथ ही हिंदी भाषी लोगों की वैश्विक उपयोगिता बढ़ चुकी है एवं विदेशों में भी रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। शिक्षा, रोजगार, साहित्य, पर्यटन एवं तकनीकी के क्षेत्र में हम आत्मनिर्भर हो रहे हैं एवं आर्थिक दृष्टिकोण से हिंदी भाषा के प्रभाव के कारण विदेशों के साथ व्यापारिक रिश्ते मजबूत हो रहे हैं। भारत को ग्लोबल बाजार बनाने की भूमिका में हिंदी की सक्रिय भागीदारी है। वर्तमान समय में देशवासियों के लिए हिंदी भाषा की उपलब्धता एवं उपयोगिता अनिवार्य हो चुकी है। एक उज्ज्वल भविष्य की संकल्पना के साथ राजभाषा हिन्दी अपने लक्ष्य प्राप्ति की ओर अग्रसर है।

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