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भारत में हमेशा एडवांस्ड लिवर रोग का सबसे बड़ा कारण अल्कोहल 

लिवर सबसे लचीला अंग होता है जो कुछ समय बाद अपनी मृत कोशिकाओं को पुनर्जीवित कर लेता है, लेकिन कई वर्षों तक अल्कोहल का अत्यधिक सेवन करने से पुनर्जीवित करने की यह प्रक्रिया रुक जाती है और सिरोसिस का कारण बनती है और आखिरकार लिवर नाकाम हो जाता है।

डॉ. मानव वधावन

अल्कोहलिक लिवर डिजीज (एएलडी) भारत में सिरोसिस का सबसे बड़ा कारण है। कई वजहों से महिलाओं को इससे ज्यादा नुकसान होता है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के शरीर में अल्कोहल की मात्रा ज्यादा रह जाती है। साथ ही पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अल्कोहल की गंदगी दूर करने वाले एंजाइम का स्तर पर कम होता है।

अल्कोहल सेवन करने वाली महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले लिवर क्षतिग्रस्त होने की संभावना दोगुनी

एक अनुमान के मुताबिक, आधी मात्रा में अल्कोहल सेवन करने वाली महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले लिवर क्षतिग्रस्त होने की संभावना दोगुनी होती है। हालांकि अल्कोहल का सेवन बंद कर देने या कम कर देने से यह नुकसान रोका जा सकता है। महिलाओं में अल्कोहलिक लिवर रोग अधिक होता है और बड़े पैमाने पर उनकी डायग्नोसिस भी नहीं हो पाती है। अल्कोहल का सेवन कम करने, स्वस्थ खानपान रखने और नियमित व्यायाम करने से महिलाएं कई तरह के लिवर रोगों की संभावना कम कर सकती हैं। वैश्विक स्तर पर लिवर संबंधी बीमारियों के मामले में भारत का बड़ा योगदान है।

हम वैश्विक स्तर पर अल्कोहल सेवन करने वाले शीर्ष दस देशों की सूची में लगातार बने हुए हैं (विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक)। अल्कोहल से होने वाले लिवर रोग भारत में हमेशा एडवांस्ड लिवर रोग का सबसे बड़ा कारण रहा है लेकिन पहले ऐसे मामले ज्यादातर पुरुषों में ही देखे जाते थे। हाल के वर्षों में (खासकर शहरी क्षेत्रों में) अल्कोहल से होने वाले लिवर रोगों के मामले महिलाओं में भी तेजी से बढ़ रहे हैं। महामारी के बाद श्नई पीढ़ी की महिलाओं में अल्कोहल सेवन की प्रवृत्ति में तेज वृद्धि हुई है।

लिवर सबसे लचीला अंग होता है जो कुछ समय बाद अपनी मृत कोशिकाओं को पुनर्जीवित कर लेता है, लेकिन कई वर्षों तक अल्कोहल का अत्यधिक सेवन करने से पुनर्जीवित करने की यह प्रक्रिया रुक जाती है और सिरोसिस का कारण बनती है और आखिरकार लिवर नाकाम हो जाता है।

अल्कोहल की बड़ी मात्रा में सेवन करने से क ही दिनों में लिवर में फैट जमा हो जाता है। इसे अल्कोहल के सेवन से होने वाला फैटी लिवर रोग कहा जाता है और यह एएलडी का पहला चरण कहा जाता है। फैटी लिवर रोग में आम तौर पर कोई लक्षण नजर नहीं आता, लेकिन यह अपने आप में एक महत्वपूर्ण चेतावनीपूर्ण लक्षण है जब आप नुकसानदेह लेवल पर शराब का सेवन करते हैं। यदि आप अल्कोहल का सेवन बंद कर देते हैं तो फैटी लिवर रोग से निजात मिल सकती है।

अल्कोहलिक हेपेटाइटिसक यह संभावित रूप से गंभीर स्थिति होती है जो लंबे समय तक अल्कोहल के दुरुपयोग के कारण होता है। यह स्थिति आने पर मरीज आम तौर पर पीलिया से पीडि़त हो जाता है। यदि आप अल्कोहल का सेवन बंद कर देते हैं तो आंशिक रूप से अल्कोहलिक हेपेटाइटिस के कारण लिवर के नुकसान को ठीक किया जा सकता है। हालांकि अल्कोहलिक हेपेटाइटिस का गंभीर रूप जानलेवा होता है और इस स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने तथा आईसीयू में इलाज कराने तक की नौबत आ जाती है।

सिरोसिस इस चरण में लिवर क्षतिग्रस्त होने लगता है। आम तौर पर यह पूरी तरह से ठीक नहीं होता है लेकिन अल्कोहल का सेवन बंद कर देने से और नुकसान नहीं होता है और आपका जीवनकाल बढ़ सकता है। जिस व्यक्ति को अल्कोहल संबंधी सिरोसिस है और मदिरा सेवन नहीं छोड़ते, उसमें अगले पांच साल के दौरान जीवित रहने की संभावना 50 फीसदी से भी कम रह जाती है।

500 से अधिक कार्य करने वाला लिवर मानव शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। इसके कुछ खास कार्यों में खून की गंदगी को छानकर निकालना, ऊर्जा एकत्रित करना, हार्मोन और प्रोटीन को सिंथेसाइज करना और कोलेस्ट्रॉल तथा ब्लड शुगर को नियमित करना शामिल है। लिवर में अल्कोहल पहुंचने के बाद इसके कई खतरनाक बाय प्रोडक्ट्स बनते हैं। अल्कोहल से भी अधिक ये उत्पाद लिवर को अल्कोहल से होने वाले नुकसान में इजाफा करते हैं। हर बार लिवर अल्कोहल को फिल्टर करता है जिस कारण लिवर की कुछ कोशिकाएं नष्ट हो जाती है। हालांकि इन कोशिकाओं को पुनर्जीवित करने में लिवर सक्षम होता है, लेकिन लंबे समय तक अल्कोहल के सेवन से इसकी क्षमता कम पड़ती जाती है।

सबसे महत्वपूर्ण, अल्कोहल को लेकर आनुवांशिक प्रवृत्ति और कुछ खास एचएलए फेनोटाइप महिलाओं में अल्कोहल से लिवर को होने वाले नुकसान का खतरा दोगुना बढ़ा देते हैं। हालांकि अल्कोहल सेवन की एक सुरक्षित सीमा तय है लेकिन सबसे अच्छा तरीका है कि इसका सेवन ही न किया जाए। अल्कोहल से लिवर को होने वाले नुकसान से बचने का सबसे प्रभावी तरीका इसका सेवन ही बंद कर देना है या इसकी निर्धारित मात्रा में सेवन करना है स्वस्थ लिवर वाली महिलाओं को दिन में एक पेग (या सात दिन में सात पेग) से अधिक नहीं पीना चाहिए। साथ ही ध्यान रखें कि किसी भी प्रकार का अल्कोहल (बियर, व्हिस्की, वाइन) लिवर को नुकसान पहुंचाता है, लिहाजा अल्कोहल का निर्धारित मात्रा में सेवन करना महत्वपूर्ण है न कि इसका प्रकार।

जिन मरीजों को पहले से कोई लिवर रोग है (मसलन फैटी लिवर, हेपेटाइटिस बी या सी, अनियंत्रित डायबिटीज) उनके लिए अल्कोहल सेवन की कोई सुरक्षित सीमा नहीं होती। अल्कोहल प्रत्यक्ष रूप से हीपेटोटॉक्सिक एजेंट है और जिन्हें पहले से लिवर संबंधी कोई बीमारी है, उनके इसके दुष्प्रभाव का खतरा अधिक रहता है। इन मरीजों को लिवर रोगों से बचने का एकमात्र तरीका अल्कोहल से दूर रहना ही है।

यह भी ख्याल रखना होगा कि बहुत ज्यादा शराब सेवन (एक बार में तीन से ज्यादा पेग का सेवन) नियमित सेवन की तरह ही नुकसानदेह है। यदि कोई महिला कभी कभार शराब का सेवन करती है लेकिन एक ही बार में तीन पेग गटक जाती है, उसे उतना ही नुकसान पहुंचेगा। सभी व्यक्तियों से मेरी गुजारिश है कि अल्कोहल का सेवन त्यागकर या निर्धारित मात्रा में सेवन का पालन कर अपने लिवर को बचाएं। याद रखें कि स्वस्थ लिवर से ही शरीर स्वस्थ रहेगा और बेहतर जीवन बना रहेगा।

(डॉ मानव वधावन, नई दिल्ली के बीएलके मैक्स इंस्टीट्यूट फॉर डायजेस्टिव एंड लिवर (गैस्ट्रोइंटरोलॉजी एंड हीपेटोलॉजी) डिजीज के वरिष्ठ निदेशक हैं।)

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