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उच्चाधिकारियों के सह पर करोड़ों का काला खेल

बाराबंकी। राजस्व से जुड़े मामलों में पिछले 5 वर्षों में जो काले कारनामे हुए हैं। वह किसी से छुपे नहीं हैं। वह चाहे फर्जी रजिस्ट्री करवाकर दूसरे की जमीन को लिखाने का मामला हो या फिर किसी की जमीन पर जबरदस्ती राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से कब्जा करने का मामला हो। ऐसा कुछ भी बाकी नहीं रहा जो पिछले पांच सालों में हुआ न हो। यूपी की योगी सरकार के आने के बाद से जहां गुंडों, माफियों और अवैध कब्जेदारों से लोगों को राहत मिली है। वहीं अब उच्चाधिकारियों के काले कारनामें भी सामने आ रहे हैं। जिससे एक बार फिर सरकार की मंशा पर पानी फेरने का काम जिलों के आलाधिकारियों के रहमों करम पर उनके अधीनस्थ कर रहे हैं। योगी सरकार में खुलेआम चोरी छिपे अवैध कार्यों को राजस्व विभाग कर रहा है। इंदिरा नहर से सटे गढ़ी, पपनामऊ, छतेना, पल्हरी के साथ अन्य गांव के गाटा संख्या के रकबे में हेरफेर के काले कारनामों की शिकायते सामने आ रही हैं। जिस पर कर्मचारियों से लेकर उच्चाधिकारी भी कमाई के चक्कर में अनसुना करने में लगे हैं। ऐसे मामलों में राजस्व विभाग करोड़ों की काली कमाई करने में लगा है। किसानों की जमीनों को जबरदस्ती पैमाइश नोटिस थमाकर बीघों खेत गायब करने की शिकायतें लोग कर रहे हैं। पहले से सेट नये खरीदारों के गाटे में अवैध रूप से जमीन का रकबा बढ़ाये गये। जिससे नहर के किनारे पड़ने वाले ज्यादातर किसानों की जमीनों के साथ हेराफेरी की गई। यही नहीं नये खरीदारों के खरीदे गये रकबे को बढ़ाने के बाद उसे नहर में दिखाकर सरकारी धन की लूट की जा रही है। वहीं किसानों का हक मारा जा रहा है। जिसका एनएचएआई के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से करोड़ों का अवैध भुगतान भी कराया जा रहा है। दूसरी ओर किसानों से कागजी कार्रवाई सादे फार्म पर पूरी करवाने का भी मामला सामने आया है। जिसमें निरक्षर किसानों की कितनी जमीन का कितना मुआवजा दिया जायेगा, उसका विवरण किसानों को बताया ही नहीं जा रहा और न उसमें सुधार किया जा रहा है। अधिकतर किसानों को कागजी फेरों में भी लटकाने की कोशिशें की जा रही है।

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