मन की बात : ढील है पर ना हो ढिलाई

रिपोर्ट-डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

कयास लगाए जा रहे थे कि पीएम नरेंद्र मोदी मन की बात में उपलब्धियों का बयान करेंगे। उनके दूसरे कार्यकाल के एक वर्ष पूरा हुआ था। इस एक वर्ष में ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज है। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू हो गया है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से प्रताड़ित हिन्दू, बौद्ध, सिख आदि को नागरिकता देने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

इन उत्पीड़ित परिवारों का भारत के अलावा कोई सहारा भी नहीं था। यह मानवीय कार्य था,जो पूरा हुआ। ऐसी अनेक ऐतिहासिक उपलधियाँ इस एक वर्ष में हासिल हुई है।
लेकिन नरेंद्र मोदी ने मन की बात को कोरोना आपदा के इर्द गिर्द सीमित रखा। उन्होंने कहा कि लॉक डाउन में ढील दी गई है, लेकिन लोगों को इसमें ढिलाई नहीं देनी चाहिए। दो गज दूरी व मास्क का प्रायोग अनिवार्य रूप से करना चाहिए। यह वायरस की बीमारी है।

बात बीमारी की चली तो मोदी ने आयुष्मान योजना, योग और राहत आपदा कार्यो का उल्लेख किया। एक करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त में चिकित्सा सुविधा मिली। यह आयुष्मान योजना से संभव हुआ। इनमें अस्सी प्रतिशत लोग गांव के थे। सत्तर प्रतिशत लोगों की सर्जरी की। इसका राष्ट्रीय पहलू भी है।

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देश का कोई भी नागरिक किसी भी स्थान पर अपना इलाज करा सकता है। इसके लिए मोदी ने कर दाताओं का भी आभार व्यक्त किया। स्वास्थ की दृष्टि से उन्होंने विश्व योग दिवस और पर्यावरण दिवस की ओर ध्यान आकृष्ट किया। जून में ही योग व पर्यावरण दिवस है। योग से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। कोरोना आपदा के इस दौर में योग के महत्व को विश्व में स्वीकार किया जा रहा है।

पर्यावरण का मानव जीवन में बहुत महत्व है। इसके लिए हम सबको पर्यावरण का संरक्षण व संवर्धन करना है। इस वर्षा काल में लोगों यथासंभव वृक्ष लगाने चाहिए। लॉक डाउन में गरीबों,श्रमिकों को जो परेशानी उठानी पड़ी,उसकी व्यथा मोदी को भी है। वह इस परेशानी से लोगों को उबारने का प्रयास भी करते रहे है।

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