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जेएनयू दीक्षांत में राष्ट्रीय स्वाभिमान सन्देश

कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेएनयू में स्वामी विवेकानन्द जी प्रतिमा का अनावरण किया था। जेएनयू की पृष्ठिभूमि में यह अभिनव कल्पना थी। इसमें राष्ट्रीय गौरव का समावेश था। भारतीय चिंतन का उद्घोष था। उस समय राष्ट्रवाद की विचारधारा को मजबूत करने का विचार व्यक्त किया गया था। नरेंद्र मोदी ने कहा था कि वैचारिक लड़ाई से उपर हमेशा राष्ट्र हित को रखना चाहिए। इसका प्रभाव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में देखने को मिला। समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद थे।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि समग्र शिक्षा के संदर्भ की जहां तक बात है तो मुझे बताया गया है कि जेएनयू युवाओं के कौशल विकास और उन्हें रोजगार दिए जाने के उद्देश्य से अध्ययन के नए क्षेत्रों में केंद्र स्थापित करने के लिए कदम उठा रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह ज्ञान आधारित उद्यम बनाने में सक्षम होगा और हमारी अर्थव्यवस्था में भी योगदान देगा। शिक्षामंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु शिष्य परंपरा की संस्कृति है। इस संस्कृति में पहले शिक्षा,फिर दीक्षा,उसके बाद दीक्षांत और अंत में गुरु दक्षिणा का क्रम आता है।

छात्र छात्राओं को इस संस्कृति का सन्देश दिया। कहा कि से गुरु दक्षिणा विद्यादान व ज्ञानदान का संकल्प लेना चाहिए। साथ ही अपनी क्षमताओं से अपने संस्थान एवं राष्ट्र को भी मजबूत बनाने का प्रयास करना चाहिए। अनुसंधान तथा नवाचार की संस्कृति जेएनयू की विशेषता रही है। इस क्रम में विश्वविद्यालय से जो कुछ भी हासिल किया गया वह विद्यार्थियों की विरासत है। इस शैक्षिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए अपनी आने वाली पीढ़ियों को प्रोत्साहित करना भी प्रमुख कर्तव्य है। इक्कीसवीं सदी ज्ञान की सदी है। विचारधारा को राष्ट्रीय धारा से जोड़कर ही हम राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य को पूरा कर सकते हैं।

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नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में जेएनयू जैसे विश्वविद्यालय की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालय ने अनुसंधान की संस्कृति को बढ़ावा देते हुए NIRF रैंकिंग में पिछले पांच वर्षों से काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। इस वर्ष भी इस विश्वविद्यालय को रैंकिंग में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। साथ ही विश्वविद्यालय चार सौ पचपन करोड़ के हेफा फंड के साथ रिसर्च सुविधाओं की वृद्धि हेतु भी सार्थक कदम बढ़ा रहा है। किसी भी संस्थान की क्षमता का पता इस बात से चलता है कि उसके विद्यार्थी जीवन में किन उपलब्धियों को हासिल कर पा रहे हैं,साथ ही राष्ट्र निर्माण में अपना कितना योगदान दे पा रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि जेएनयू के छात्र छात्राएं भारतीय शैक्षिक व्यवस्था के ब्रांड एंबेसडर के तौर पर पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं।

रिपोर्ट-डॉ. दिलीप अग्निहोत्री
डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

 

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