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यूं ही नहीं किसी को बच्चे प्यार से टॉफी बाबा कहते

गोरखपुर। टॉफी बाबा, वनटांगिया बस्ती गोरखपुर के बच्चे करीब दो दशक से योगी आदित्यनाथ को इसी नाम से जानते हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनको इसी नाम से जानते हैं। यूं ही नहीं बच्चों में कोई टॉफी बाबा बन जाता है। इसकी वजह बच्चों के प्रति उनका निश्छल और नैसर्गिक प्रेम है। किसी भी अवसर पर उन्हें बच्चे मिल जाते हैं तो वह उन पर प्यार-दुलार लुटाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं। शनिवार को सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज में बाढ़ पीड़ितों के बीच जब वह पहुंचे, तब भी यही नजारा दिखा। सीएम ने नौनिहालों को गोद में उठा लिया, प्यार-दुलार किया और उन्हें बिस्किट भी खिलाया।

नौनिहालों को गोद में लिए सीएम अपनी दैहिक भाषा (बॉडी लैंग्वेज) से यह भी साफ संदेश दे रहे थे कि उनके रहते कोई भी दुख शेष नहीं रहेगा। यह सही भी तो है, पूर्वांचल के बच्चों को असमय काल कवलित करने वाली इंसेफेलाइटिस को काबू में करने की बात हो या फिर कोरोना में बेसहारा हुए बच्चों के भरण पोषण के लिए मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना को लागू करने की, योगी ने एक से बढ़कर एक मिसाल कायम की है।

नौनिहालों के लिए इंसेफेलाइटिस को लेकर सांसद के रूप में उनका संघर्ष और सीएम बनने पर नियंत्रण की समग्र कार्ययोजना पूरा देश जानता है। कोरोना काल मे यूं तो उन्होंने पूरे प्रदेश को संकट से उबारा लेकिन इस दौरान बच्चों के लिए उनकी ‘मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ तो नजीर ही बन गई। इस योजना के जरिये उन्होंने कोविड से अनाथ हुए बच्चों के भरण पोषण, पढ़ाई और भविष्य निर्माण तक की जिम्मेदारी उठा ली है।

आज जब वह सिद्धार्थनगर जिले में बाढ़ पीड़ितों के बच्चों को गोद में उठाकर दुलार रहे थे तो एक बार फिर यही संदेश था कि नौनिहालों का वर्तमान और भविष्य, दोनों को सुव्यवस्थित करने के लिए उनकी प्रतिबद्धता है। इस दौरान उन्हें इन नौनिहालों के परिजनों को उनकी उचित देखभाल करने की नसीहत भी दी और कहा कि उनकी सरकार हर समय साथ में है इसलिए बाढ़ या अन्य किसी भी परिस्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है।

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