लखनऊ। स्कूल लीडर्स (School leaders) के लिए आयोजित एक विशेष आर्ट एक्सपो और वर्कशॉप, Quantum Impact-2025 में लखनऊ शहर में कला, नवाचार और नेतृत्व का संगम (Confluence OF Art, Innovation and Leadership) देखा गया। यह प्रतिष्ठित कार्यक्रम फीनिक्स पलासियो के सहयोग से फ्लोरेसेंस आर्ट गैलरी (Florescence Art Gallery) द्वारा प्रस्तुत समकालीन भारतीय कला मेले के साथ साझेदारी में प्रस्तुत किया गया था और शिक्षा में कला के एकीकरण पर सार्थक चर्चा को बढ़ावा देने के लक्ष्य के साथ आयोजित किया गया था। इस अवसर पर डॉ रूपाली पटेल, भारती गोसाईं, मीना टांगरी और कई अन्य प्राचार्यों सहित 70 से अधिक प्राचार्यों ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता कला व्यवसाय से जुड़े समर्थ नारायण ने कला और व्यवसाय के अंतर्संबंध पर अपनी अंतर्दृष्टि साझा की। नारायण ने कहा कि कला केवल कैनवास पर रंगों के बारे में नहीं है, यह कहानी कहने, रचनात्मकता और बौद्धिक इनपुट के बारे में है। उन्होंने कहा कि कला अभिव्यक्ति का एक सुलभ रूप है जिसके लिए न्यूनतम सामग्री निवेश की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि कला की कोई कीमत नहीं होती, लेकिन उसका मूल्य उसकी रचना में लगाई गई बौद्धिक गहराई और प्रयास से आता है। नारायण ने उद्यमियों के रूप में कलाकारों की भूमिका पर चर्चा की, करते हुए उन्हें अपने ब्रांड के निर्माण में सक्रिय कदम उठाने और अपने काम में व्यावसायिक क्षमता को पहचानने के लिए प्रोत्साहित किया। है बल्कि अपने जुनून से आर्थिक रूप से आगे बढ़ने की भी अनुमति देता है।
कार्यक्रम में इस बात पर भी चर्चा हुई कि उभरते कला उद्यमी रचनात्मक अभिव्यक्ति और व्यावसायिक सफलता के बीच की खाई को कैसे पाट सकते हैं। समर्थ नारायण के मुख्य भाषण को आधुनिक अर्थव्यवस्था में कला की संभावनाओं का पता लगाने के इच्छुक कलाकारों और व्यावसायिक पेशेवरों दोनों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
कला और मनोविज्ञान के अंतर्संबंध पर शिवानी धामा ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से कहा कि शिवांगी विभिन्न युगों में कला की परिवर्तनकारी क्षमता में गोता लगा रही है। शिवानी ने कला और मनोविज्ञान के बीच जटिल संबंधों की खोज करने वाले एक आगामी कार्यक्रम में अपने विचार प्रस्तुत किया।
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कार्यक्रम के मुख्य आकर्षणों में से एक फ्लोरेसेंस आर्ट गैलरी की संस्थापक और निदेशक नेहा सिंह ने विभिन्न भारतीय राज्यों से प्राप्त कलाकृतियों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। सावधानी से तैयार किए गए कला संग्रह में पारंपरिक से लेकर समकालीन शैलियों तक की विविध प्रकार की अभिव्यक्तियाँ प्रदर्शित की गईं, जिससे मेहमानों को क्यूरेटर भूपेन्द्र अस्थाना और राजेश कुमार द्वारा अच्छी तरह से तैयार की गई कला की परिवर्तनकारी शक्ति को देखने का एक अनूठा अवसर मिला।
अपने स्वागत भाषण में नेहा सिंह ने कहा कि कला न केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति का साधन है, बल्कि बच्चों के समग्र विकास का मार्ग भी है। आयोजन को सफल बनाने में लखनऊ पब्लिक स्कूल और कॉलेज के महाप्रबंधक हर्षित सिंह का अहम योगदान रहा।