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एलयू में सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान

लखनऊ विश्वविद्यालय से इस वर्ष सेवानिवृत्त होने वाले सभी अध्यापकों के लिए एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय प्रोफेसर आलोक कुमार राय द्वारा उनके प्रथम वर्ष में शुरू की गई इस संस्कृति को कायम रखते हुए आज दूसरे साल भी यह समारोह मनाया गया। उक्त समारोह में विश्वविद्यालय के 17 सेवानिवृत्त शिक्षकों को सम्मानित किया गया। एकेडमिक सेल के अधिष्ठाता प्रो राकेश चंद्र ने सभी अध्यापकों का स्वागत किया और सभी के शिक्षक जीवन की उपलब्धियों को सभा के साथ साझा किया।

प्रोफेसर आलोक कुमार राय ने सभी अध्यापकों को अभीवादित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय सभी अध्यापकों का ऋणी रहेगा। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के सभी अध्यापकों ने अपने जीवन काल में और खासकर कोविद महामारी के समय आने वाले विश्वविद्यालय के समक्ष आने वाली चुनौतियों का सामना कर विश्वभर के सामने शिक्षकों के समाज की ओर किए जाने वाले अभूतपूर्व योगदान का प्रमाण दिया है। उन्होंने सभी को धन्यवाद दिया और कहा कि विश्वविद्यालय को उनका सम्मान करने का यह अवसर देने के लिए विश्वविद्यालय उनका सदैव आभारी रहेगा।

समारोह में सम्मानित अध्यापक हैं: प्रो. यूएन द्विवेदी, प्रो. कालीचरण सनेही, प्रो. नवीन खरे, प्रो. केके अग्रवाल, प्रो. एनएनएस यादव, डॉ. नीरज जैन, प्रो. पीएस तिवारी, प्रो. गीता अस्थाना, प्रो. एसके जैसवाल, प्रो. आरिफ अयूबी, प्रो. पल्लवी भटनागर, प्रो. पीसी मिश्र, प्रो. राम सुमेर यादव और प्रो. अरुणा शुक्ला। प्रो. पी तिवारी, प्रो. कीर्ति सिन्हा और प्रो. टीपी राही भी आज सेवानिवृत्त हो रहे हैं, परंतु वे निजी कारणवश सम्मान समारोह में उपस्थित नही रह पाए। सम्मानित होने के बाद सभी शिक्षकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन का एवं माननीय कुलपति महोदय का आभार व्यक्त किया। रसायन विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नवीन खरे ने विश्वविद्यालय के इतिहास में सबसे कठिन समय में अर्थात कोविड-19 महामारी के प्रथम लहर के दौरान दिखाई गई माननीय कुलपति महोदय की नवोन्मेष इस सोच को सराहा और विश्वविद्यालय को अपना सर्वोत्तम सेवा प्रदान करने के लिए अध्यापकों को प्रेरित करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

शारीरिक शिक्षा विभाग के डॉ नीरज जैन जो वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड होल्डर हैं ने कहा कि उनकी समस्त जीवन का श्रेय एकमात्र विश्वविद्यालय को जाता है। उन्होंने अपने छात्र संघ के अध्यक्ष रहने के दिनों को याद किया और कहा कि वे केवल यह सपने देखते हैं कि विश्वविद्यालय को अपनी तरफ से वह क्या वापस देकर जा सके। उन्होंने सभा में प्रस्तुत सभी शिक्षकों से एवं माननीय कुलपति महोदय से यह वादा किया कि वे अपने विभाग में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आने वाले स्पोर्ट्स के छात्रों के लिए एक 40 कमरे का छात्रावास तैयार करने की पूरी कोशिश करेंगे।

हिंदी और आधुनिक भारतीय भाषा विभाग के प्रोफेसर कालीचरण स्नेही ने अपने पूरे कार्यकाल में किए गए सभी अच्छे कामों का श्रेय विश्वविद्यालय को दिया और अपने जीवन के बारे में कहते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को अपने जीवन में एक अच्छे स्कूल में और एक अच्छे कॉलेज में पढ़ने का सौभाग्य ना प्राप्त हुआ हो उस व्यक्ति को विश्वविद्यालय ने समस्त पृथ्वी की सैर कराई। उन्होंने बताया कि वह किस तरह विश्वविद्यालय में रहते हुए अपने शोध में और शिक्षण में समान रूप से लगे रहे जिसकी वजह से उन्हें विश्व के 10 देशों में सम्मान प्राप्त हुआ।

मनोविज्ञान विभाग की प्रोफेसर पल्लवी भटनागर ने भी समारोह के आयोजन की सराहना की और यह आह्वान किया कि जिस तरह इस महामारी के दौरान विश्वविद्यालय अपने समस्त परिवार का और उनके मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान दे रहा है उसी तरह महामारी के बाद भी रखेगा। समारोह में कुलसचिव डॉ. विनोद सिंह, कुलानुशाशक प्रो. दिनेश कुमार और छात्र कल्याण अधिष्ठता प्रो पूनम टंडन के साथ विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ अध्यापक भी मौजूद थे।

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