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आंबेडकर के विचारों पर सरकार का अमल

डॉ दिलीप अग्निहोत्रीडॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की जीवन यात्रा स्वयं में प्रेरणादायक रही है। इस यात्रा के अनेक पड़ाव थे। प्रत्येक में उनके व्यक्तित्व व कृतित्व की झलक थी। ऐसे में इन स्थानों पर गरिमापूर्ण स्मारक दशकों पहले बनने चाहिए थे। लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के अलावा किसी अन्य ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। अटल बिहारी वाजपेयी ने नई दिल्ली में उनके आवास को स्मारक रूप में विकसित करने का निर्णय लिया था।

किंतु यूपीए सरकार ने इस योजना को अपनी कार्यशैली के अनुरूप लंबित सूची में बनाये रखा। प्रधानमंत्री बनने के शुरुआती दौर में ही नरेंद्र मोदी ने इस ओर ध्यान दिया। इतना ही नहीं उन्होंने डॉ आंबेडकर से संबंधित सभी पांच स्थलों को भव्य स्मारक के रूप में प्रतिष्ठित किया। इसमें महू स्थित उनके जन्मस्थान,नागपुर की दीक्षा भूमि, लंदन के स्मारक निवास,अलीपुर महानिर्वाण स्थली और मुम्बई की चयत्यभूमि शामिल है। इस सरकार ने 2015 को आंबेडकर की एक सौ पच्चीसवीं जयंती वर्ष घोषित किया था। इस वर्ष डॉ. आंबेडकर से संबंधित अनेक कार्यक्रम आयोजित किये गए। उनके जन्मदिन चौदह अप्रैल को समरसता दिवस और छब्बीस नवंबर को संविधान दिवस घोषित किया गया। अनुसन्धान हेतु सौ छात्रों को लंदन स्कूल आफ इकोनॉमिक्स और कोलंबिया विश्विद्यालय भेजने का निर्णय लिया गया। इन दोनों संस्थानों में डॉ. आम्बेडकर ने अध्ययन किया था।

डॉ.आम्बेडकर स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री थे। एक नवंबर 1951 को केन्द्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद,वह 26 अलीपुर रोड, दिल्ली में सिरोही के महाराजा के घर में रहने लगे जहां उन्होंने 6 दिसम्बर 1956 को आखिरी सांस ली और महापरिनिर्वाण प्राप्त किया। डॉ.आम्बेडकर की स्मृति में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2003 को महापरिनिर्वाण स्थल राष्ट्र को समर्पित किया था। प्रधानमंत्री ने मार्च, 2016 को इसकी आधारशिला रखी थी। इस इमारत को संविधान निर्माता बाबा साहब के स्मारक के रूप में निर्मित किया गया है, इमारत को पुस्तक का आकार दिया गया है। इसमें एक प्रदर्शनी स्थल, स्मारक,बुद्ध की प्रतिमा के साथ ध्यान केन्द्र, डॉ. आम्बेडकर की बारह फुट की कांस्य प्रतिमा है।

प्रवेश द्वार पर ग्यारह मीटर ऊंचा अशोक स्तम्भ और पीछे की तरफ ध्यान केन्द्र बनाया गया है। स्मारक की पहल भाजपा की पहली सरकार ने की थी, इसे अंजाम तक भाजपा की दूसरी सरकार ने पहुंचाया। इसी क्रम में योगी आदित्यनाथ भी प्रयास करते रहे है। उत्तर प्रदेश में दलित संतों विचारकों से संबंधित अनेक स्थलों को भव्यता प्रदान की जा रही है। लखनऊ के ऐशबाग में करीब पचास करोड़ की लागत से डॉ.भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र स्थापित होगी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस केंद्र का शिलान्यास किया। इसमें डॉ.आंबेडकर की करीब पच्चीस फुट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी।

इस स्मारक में डॉ. आम्बेडकर से जुड़े महत्वपूर्ण संकलनों को स्थान दिया जाएगा। योगी कैबिनेट लखनऊ में ऐशबाग ईदगाह के सामने खाली पड़ी मौजा भदेवा की करीब साढ़े पांच हजार वर्ग मीटर नजूल भूमि को डॉ. आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना के लिए संस्कृति विभाग के पक्ष में कुछ शर्तों व प्रतिबंधों के तहत निशुल्क आवंटित कर चुकी है।

उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग की ओर से स्थापित होने वाले डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र में साढ़े सात सौ व्यक्ति की क्षमता का प्रेक्षागृह पुस्तकालय व शोध केंद्र,छायाचित्र दीर्घा व संग्रहालय, बैठकों व आख्यान के लिए बहुद्देशीय सभागार व कार्यालय का निर्माण किया जाएगा। साथ ही लैंडस्केपिंग डॉरमेट्री, कैफेटेरिया,पार्किंग व अन्य जनसुविधाएं विकसित की जाएंगी।

राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने इस स्मारक का वर्चुअल शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि लखनऊ से बाबा साहब का खास संबंध रहा है। वह लखनऊ में काफी समय बिताने के साथ ही यहां की संस्कृति को बहुत प्रिय बताते थे। राष्ट्रपति ने कहा कि बाबा साहब कहते थे कि सरकार का मिशन सबकी भलाई होनी चाहिए। इसी कारण सभी सरकार को उनके अनुभव का अनुसरण करना चाहिए। आज लोग हिंदू।मुस्लिम करते हैं। बाबा साहब कहते थे कि हम सब पहले और बाद में भी केवल भारतीय हैं बाबा साहब ने आज ही के दिन तिरानवे वर्ष समता नामक साप्ताहिक पत्र निकालकर मूलक समाज की रचना की थी।

इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार बाबा साहब डॉ. भीम राव आम्बेडकर के दिखाए रास्ते पर चल रही है। भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में जब भी वंचितों,दलितों, उपेक्षितों और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े हुए व्यक्ति की आवाज की बात होगी तो बाबा साहब डॉ.भीमराव आंबेडकर का नाम बड़ी श्रद्धा और सम्मान के साथ विश्व मानवता सदैव लेगी।

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