Lymphatic filariasis उन्मूलन के इलाज की नई रणनीति

लिम्फैटिक फाइलेरियासिस Lymphatic filariasis (एलएफ) या हाथी पांव बीमारी (एलीफेंटिएसिस) बेहद दर्दनाक और गंभीर बीमारी है जो मच्छरों के माध्यम से फैलती है। दुनियाभर में एलएफ का 40 फीसदी बोझ अकेले भारत में है और झारखंड में एलएफ के सबसे ज्यादा मामले देखने को मिलते है।

Lymphatic filariasis : ट्रिपल ड्रग थेरेपी शुरू करने की योजना

देश के पांच जिलों में ट्रिपल ड्रग थेरेपी शुरू करने की योजना है। इंडियन काउंसिल आॅफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने आईडीए का अध्ययन किया जिसमें इस थेरेपी की प्रभावकिता और सुरक्षा के प्रमाणित किया और इसे जल्द ही वाराणसी (उत्तर प्रदेश), नागपुर (महाराष्ट्र), अरवल (बिहार), सिमदेगा (झारखंड) और यदगीर (कर्नाटक) में चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा।

6.7 करोड़ लोग इस बीमारी से प्रभावित

आईसीएमआर के पूर्व डाॅयरेक्टर जनरल डाॅ. एन के गांगुली ने कहा कि इस बीमारी में शरीर के अंगों में असामान्य तरीके से वृद्धि हो सकती है और इस वजह से मरीज़ विकलांग हो सकते है। बीमारी को लेकर समाज में कई भ्रांतियां है, जिस वजह से मरीज़ खुद को अकेला महसूस करने लगते है। दुनियाभर में 6.7 करोड़ लोग इस बीमारी से प्रभावित है और 3.6 करोड़ मरीज़ इस बीमारी से विकलांग हो गए है। इस बीमारी को खत्म करनेे के लिए ट्रिपल ड्रग थेरेपी के नाम से मशहूर नई दवाई को लांच किया है। इसमें आइवरमीक्टिन, डायइथाइलकारबामैज़ीन (डीईसी) और एलबेनडाज़ोल को साथ लाकर आईडीए नाम दिया गया है। इसका इस्तेमाल एलएफ की रोकथाम में किया जाता है और इसके इस्तेमाल से लक्षित देशों में तेज़ी से एलएफ की रोकथाम हुई है।

आईडीए को चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की घोषणा

इस वैश्विक मीटिंग में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने भारत में फाइलेरियासिस के उन्मूलन के आगे की रणनीति ‘एक्सीलेरेटिड प्लाॅन फाॅर एलीमिनेशन आॅफ लिम्फैटिक फाइलेरियासिस’ लांच किया और भारत में ट्रिपल ड्रग थेरेपी यानि कि आईडीए को चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की घोषणा की।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एलएफ उन्मूलन में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लोगों में इस बीमारी को लेकर बहुत कम जागरूकता है और लोगों के साथ राजनैतिक स्तर पर भी इस बीमारी की अनदेखी की जाती है।

उत्तर प्रदेश के 51 ज़िलों में इस बीमारी के मामले

उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से 51 ज़िलों में इस बीमारी के काफी मामले देखने को मिल रहे है। इसमें अहमदाबाद, अंबेडकर नगर, औरिया, आज़मगढ़, बरेली, बलिया, बलरामपुर, बांदा, बारांबाकी, बस्ती, बहराइच, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, इटावा, फैज़ाबाद, फ़र्रूखाबाद, फतेहपुर, गाज़ीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हमीरपुर, हरदोई, जालौन, जौनपुर, कनौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, कौशांबी,खैरी, खुशीनगर, लखनऊ, महाराजगंज, माहोबा, मऊ, मिर्जापुर, पीलीभीत, प्रतापगढ़, रायबरेली, रामपुर, संत कबीर नगर, संत रविदस नगर (भदौही), शाहजहांपुर, श्रावस्ती, सिद्वार्थनगर, सीतापुर, सोनभद्र, सुल्तानपुर, उन्नाव, वाराणसी और अमेठी शामिल है।

लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल काॅलेज के एमेरिटस प्रोफेसर (रिटायर) डाॅ. टी सी गोयल का कहना है, ” नई ड्रग थेरेपी ने काफी लोगों को उम्मीद दी है, हालांकि इन क्षेत्रों में दवाई का कोर्स पूरा करना सबसे बड़ी चुनौती है। सरकार द्वारा व्यापक रूप से दवाई वितरित करना तभी सफल हो सकता है, अगर लोग इस पहल के महत्व को समझेगें।”

काम जागरूकता ही सबसे बड़ी चुनौती

राज्य के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार राज्य में साल 2017 में 97,898 लायम्फोडेमा के मामले रिकार्ड किए गए जिसमें से एलएफ संक्रमित रोगियों में से 25,895 मामले हाइड्रोसील के थे। इस बीमारी में मरीज़ गंभीर विकलांगता से जूझते है। एलएफ उन्मूलन में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लोगों में इस बीमारी को लेकर बहुत कम जागरूकता है और लोगों के साथ राजनैतिक स्तर पर भी इस बीमारी की अनदेखी की जाती है।

लिम्फैटिक फाइलेरियासिस उन्मूलन से जुड़े पहलू

दिल्ली में आयोजित मीटिंग में विभिन्न ग्रुप सेशन से कुछ महत्वपूर्ण बिंदु आए, जिसमें लिम्फैटिक फाइलेरियासिस उन्मूलन से जुड़े पहलू सामने आएं। इसमें इलाज के नए तरीकों, रूग्णता प्रबंधन और विकलांगता रोकथाम व रोगियों की मानसिक सेहत शामिल है। इनमें से कुछ महत्वपूर्ण बिंदु इस प्रकार है –

राष्ट्रीय लिम्फैटिक फाइलेरियासिस कार्यक्रमों को डब्लूएचओ के नए एनटीडी (निगलेक्टिड ट्रोपिकल डिसीज़) ढ़ांचे के अंतगर्त शामिल होने की जरूरत को महत्व दिया है व एसडीजी (ससटेनेबल डव्लपमेंट गोल्स) के तहत यूनिवर्सल हेल्थ केयर (यूएचसी) कवरेज में शामिल करने के प्रयास को संबोधित किया है।

देशों में राष्ट्रीय सलाहकार निकायों से केंद्रीय राष्ट्रीय नीतियां व पद्वतियां आनी चाहिए और इन्हे देश के क्षेत्रीय स्तर पर लागू करने के लिए प्रसारित किया जाना चाहिए। प्रत्येक देश को स्वयं के चल रहे कार्यक्रमों के लिए उपयुक्त कुछ कदम और लक्ष्य तय करने चाहिए व उसकी प्राप्ति हेतु कदम तय करने चाहिए। जीएईएलएफ उनके निर्णयों को समन्वयित करने में मदद कर सकता है और डब्लूएचओ जेनेवा में सूचित कर सकता है।

नई ट्रिपल ड्रग थेरेपी (आईडीए) का इस्तेमाल लिम्फैटिक फाइलेरियासिस के प्रसार को तेज़ी से खत्म कर सकता है। यह नई थेरेपी बहुत सुरक्षित है और पांच साल के इलाज को यह दो साल के अंदर तक कम कर सकती है।

लिम्फैटिक फाइलेरियासिस से ग्रस्त मरीज़ो की देखभाल में मनोवैज्ञानिक-सामाजिक पहलू को भी जोड़ा जाना चाहिए और उनके परिवार पर होने वाले प्रभाव को भी स्वीकार करने की जरूरत है।

देशों को लिम्फैटिक फाइलेरियासिस कार्यक्रमों के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी प्रदान करने के लिए मौजूदा परीक्षणों, परिणामों और सूचक उपकरणों के उपयोग के तरीकों पर भी काम करना चाहिए।

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