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रिया चक्रवर्ती के नाम एक पत्र..

रिया……तुम्हारा कसूर क्या था, मालूम है-तुमने प्यार किया था। वह भी एक स्टार से। क्या तुमको मालूम नहीं था कि प्यार इंसानों से किया जाता है। स्टार हमेशा अपने स्टारडम की फिक्र करता है। तुम खुद को क्या स्टार समझती था? नादान थी, लड़कियां भी कहीं स्टार होती हैं। वह तो एक जुगनू की तरह होती हैं, टिमटिमाती तो हैं, लेकिन आकाश नहीं मिल पाता।

तुम्हारा कसूर यह भी था कि सुशांत की तमाम गर्ल फ्रेंड की तरह तुम्हारे पास कई ब्वायफ्रेंड्स नहीं थे। तुमने सिर्फ एक से प्यार किया था। जो सबका होकर रहता है वह वास्तव में किसी का नहीं हो पाता लेकिन लेकिन जो किसी एक का होकर रहता है, वह खुद का भी नहीं हो पाता।

खामियाजा भुगता न .. देखते- देखते देश की सबसे कुख्यात किरदार बन गई। बेटी बचाओ का नारा लगाने वाले बेटी फंसाओ तक पहुंच गए। तुमको मालूम नहीं था कि आरोपों में प्रदेशवाद चलता है। तुम्हारा गुनाह यह भी था कि तुम बंगाली थी, अगर तुम किसी और प्रदेश से होती तो काला जादू की मास्टरनी न कहलाती।

एक प्रेमी से हत्यारन और डायन में रूपांतरण होने में देरी नही लगती, बस चुनाव पास हों। तुमको तो मालूम ही नहीं रहा होगा कि तुम्हारा प्रेमी, एक प्रेमी होने से पहले बिहारी था। बिहार की अस्मिता और शौर्य का प्रतीक। तुमने फिल्मी पोस्टरों में देखा था उसको, लेकिन वह चुनावी पोस्टरों में भी आ सकता था, इसका तुम्हे जरा भी इल्म नहीं रहा होगा। अब तुम्हारा प्रेमी ‘ मुद्दा’ बन चुका है। तुम जमानत मांगती रह गई ,उसके नाम पर वोट मांगने की तैयारी है।

तुम पर आरोप लगे कि तुम अपने प्रेमी को गांजा देती थी। वह भी न कितना भोला था, चुपचाप ले लेता था। चिलम सुड़कता जाता था, बिना किसी को बताए निर्वात में,किसी शिव मंदिर के किनारे बैठे मौनी बाबा की तरह। तुम उसको बहला फुसलाकर विदेश टूर के लिए कहती थी और वह मासूम, नादान बालक चल पड़ता था एक हाथ मे पासपोर्ट लेकर और क्रेडिट कार्ड तुम्हे देकर। तुमने उसे अपने घर से दूर करने के लिए क्या क्या नहीं किया। इतना दबाव डाल दिया कि बेचारा तुम्हारे साथ लिव इन रिलेशनशिप में ही रहने लगा। जब इतना सब है तो यह भी तो हो सकता है तुमने उकसाया हो और हर बात मानने वाला वह मासूम उकसावे में आ गया हो।

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मैं तुमसे कभी मिला नहीं, ज़्यादा मालूम भी नहीं था। तुम्हे पहली बार सफेद सूट में सुबकते हुए सुशांत के अंतिम संस्कार वाले दिन देखा था। बाद में मीडिया द्वारा मालूम चला कि वह आंसू घड़ियाली थे। दिखावटी थे। नाटक था आदि आदि। शायद तुम प्यार में कई बार रोयी होगी। हर प्यार करने वाला रोता ही है। लेकिन वहां क्यों रोई। क्या तुम कुछ देर के लिए अपने आंसू रोक नहीं पाई थी। उधर कैमरे चमक रहे थे, क्या लोकतंत्र के इतने बड़े खम्भे को देख नहीं पाई थी।

खैर, यह तो देख ही रही होगी कि हाथरस की बिटिया के साथ क्या हुआ। तुम्हारी गाड़ी के पीछे भागते हुए,शीशे को ठोंकते और घेर कर खड़े तमाम पत्रकारों को देखकर लगता था कि माइक भी रेप करते होंगे। इमोशनल रेप। ऐसा रेप जिसे पूरी दुनिया लाइव देखती है। यह भूल जाना कि इनमें से कोई तुमसे माफी माँगेगा। है तो आखिर लोकतंत्र खम्भा ही, और खम्भों में संवेदनाएँ थोड़े होती हैं।

रिया, तुमको जमानत मिली है। लेकिन तुमने बहुत कुछ दे दिया है- गुप्तेश्वर पांडे को टिकट मिला, अर्नब गोस्वामी को नम्बर वन बना दिया और कंगना को वाई प्लस सुरक्षा दिला दी। ईश्वर से प्रार्थना है कि तुम्हारी सहनशक्ति और मजबूत हो।

पंकज प्रसून,लखनऊ
पंकज प्रसून
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