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14 सितम्बर को केवल हिन्दी दिवस ही न मनाएँ, अपितु हिन्दी का अपनी लेखन व वाक्शैली में अत्यधिक प्रयोग करें : अभय

बिधूना। हिन्दी दिवस पर कवि, लेखक एवं शोधार्थी (प्रबन्ध संकाय) अभय मिश्र ने कहा कि हम लोगों के द्वारा हिन्दी दिवस मनाना, एक विडम्बना ही नहीं है अपितु अपनी जनभाषा के प्रति हमारी घोर उदासीनता का प्रमाण भी है।

उन्होंने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि वह 14 सितम्बर को केवल हिन्दी दिवस ही न मनाएँ अपितु हिन्दी का अपनी लेखन व वाक् शैली में अधिक से अधिक प्रयोग करें और हिन्दी की गरिमा व महानता को जीवंत रखें। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी भाषा का ज्ञान होना व यथोचित प्रयोग करना वांछित हो सकता है परन्तु बाध्यकारी नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ‘हिन्दी’ अत्यन्त सुलभ एवं वैज्ञानिक भाषा है जबकि आंग्ल भाषा में कहीं अनुच्चरित शब्दों की समस्या, कहीं आरोहण तो कहीं अवरोहण का अभाव रहता है। अतएव हिन्दी दिवस पर इतना प्रण अवश्य लें कि हम सब, सामान्य लिखित व मौखिक सम्प्रेषण में हिन्दी का अधिक से अधिक प्रयोग करेंगे और गर्व का अनुभव करेंगे, और यही इस दिवस विशेष की सार्थकता है। अंत में उन्होंने सभी को हिन्दी दिवस पर शुभकामनाएँ दीं।

रिपोर्ट-राहुल तिवारी 

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