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केंद्रीकृत व्यवस्था ही भ्रष्टाचार की जननी: सुनील सिंह

लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने केंद्र द्वारा भ्रष्टाचार व्यवस्था की फैक्ट्री चलाने को लेकर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि कृषक, उपज, व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश, 2020 एवं मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और सुरक्षा) समझौता अध्यादेश, 2020 किसी भी तरह से ‘अन्नदाता’ के हित में नहीं है। भारतीय अर्थव्यवस्था का डिजाइन किसान के अनुरुप है ही नहीं। एक राष्ट्र-एक बाजार, जैसे अध्यादेश अगर कानून बन गए तो देश के 80 फीसदी किसान, जिनके पास दो हेक्टेयर से भी कम कृषि योग्य भूमि है, वे तो हमेशा के लिए दब जाएंगे।

उन्होंने कहा, सरकार सदियों से चली आ रही मंडी प्रथा खत्म करने जा रही है। छोटे किसान ट्रेन में बैठकर 200 किलोमीटर दूर अपनी सब्जी या फल बेचने जाएंगे तो वे मुनाफा लेने की बजाए कर्जदार बन जाएंगे। ये किसान तो अपने खेत से पांच दस किलोमीटर दूर स्थित मंडी में जा सकते हैं। सत्र में केंद्र सरकार इस अध्यादेश को कानून का दर्जा दिलाने का प्रयास करेगी, जिसे सहन नहीं किया जाएगा।

सुनील सिंह का कहना है कि देश में अभी जोत का औसत आकार 1.15 हेक्टेयर है। इससे 80.6 फीसदी किसान तो लघु एवं सीमांत श्रेणी में आते हैं। डेढ़-दो हेक्टेयर से अधिक जोत वाले किसानो की संख्या .37 फीसदी है। किसान चाहते हैं कि उनकी उपज को बेचने के लिए गांव एवं उसके आसपास कोई व्यवस्था हो जाए। केंद्रीकृत व्यवस्था तो भ्रष्टाचार की जननी है, विकेंद्रित व्यवस्था उसकी अपेक्षा अधिक कारगर है। सरकार ग्राम स्तर पर छनाई, छंटाई, श्रेणीकरण व तेलांश मापने की प्रयोगशाला की स्थापना करती है तो गांव का युवा किसान अपनी पैदावार को विश्वस्तर पर बेचने में सक्षम हो सकता है। सरकार ने इस ओर कोई प्रयास नहीं किया और अब यह काम बड़े बड़े पूंजी वालों को सौंप दिया है। इससे छोटी जोत वालों की व्यापार करने की यह संभावना भी समाप्त हो गई। चार-पांच साल पहले किसान अपने फसल लेकर उन्हें बाजार में बेचने चले गए, तो वहां पर उनका मूल्य उतना आया जो ट्रक का भाड़ा चुकाने में भी कम पड़ गया था।

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श्री सिंह ने आरोप लगाया है कि व्यापारी सिखायेंगे किसानों को खेती करना किसानों को सदियों से पीढ़ी दर पीढ़ी खेती का अनुभव है। हैरानी की बात तो ये है कि अब वे लोग किसानों को खेती करना सिखायेंगे, जिन्होंने कभी खेती नहीं की।ऐसे लोग अब किसानों को खाद, बीज व कीटनाशक आदि देंगे भारत सरकार ने इन अध्यादेशों ने व्यापारियों को किसानों के साथ लूट मचाने का एक मार्ग उपलब्ध करा दिया है। किसानों को उन्हीं के खेतों पर मजदूर बना दिया जाएगा। बीज की खेती भी किसानों को उन्हीं सेवा प्रदाता/व्यापारियों के द्वारा कराई जाएगी। यह छद्म युद्ध है, जिसमें छल के आधार पर सरकार बड़े पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना चाहती है। किसान रेल चलाई गई है। मेरा सवाल है कि इसका फायदा किसे होगा। क्या किसान को इसका लाभ होगा, बिल्कुल नहीं होगा। दो हेक्टेयर जमीन पर खेती करने वाला किसान इस गाड़ी में बैठकर फसल बेचने जाएगा। ये कैसे संभव होगा। हां, बड़े पूंजीपति इस किसान रेल का भरपूर लाभ लेंगे। उन्हीं का माल इस गाड़ी में लदेगा।

भारत सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात 2016-17 में कही थी। अभी तक किसानों की आय में बढ़ोतरी के लिए सरकार ने कोई भी कानून नहीं बनाया है। अध्यादेश के कारण मंडियां निष्प्रभावी हो जाएंगी। इन मंडियों के कानून बनाने के लिए स्वतंत्रता के पूर्व से किसान नेताओं के साथ असंख्य लोगों ने संघर्ष किया है। इन मंडियों में अभी संपूर्ण उपजों में से 25 फीसदी उपजों का व्यापार होता है। उसके शुल्क द्वारा ये मंडियां चलती हैं। सरकार अब मंडियों को खत्म करने की योजना बना रही है। बिना पूर्ण तैयारी के लाए गए अध्यादेश अब कानून बनते हैं तो किसानों का बड़ा अहित होना तय है।

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