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चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से…युह शनिवार ऐतिहासिक होय गवा

नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान
नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान

आज सुबह जब प्रपंच चबूतरे पर पहुंचा तो वहां सन्नाटा था। मौसम बेहद सर्द था। ठंड से हड्डियाँ कांप रही थीं। कोहरा घना होने के कारण चबूतरे से थोड़ी दूर पर भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। तभी चतुरी चाचा की कड़क आवाज सुनाई दी। रिपोर्टर, अयसी मड़हम निकरि आव। आजु हियां प्रपंच होई। मैं चाचा के मड़हे में पहुंच गया। वहां मुंशीजी व कासिम चचा अलाव ताप रहे थे। चतुरी चाचा कम्बल ओढ़े एक तख्त पर विराजमान थे। वह आज कोरोना टीके की शुरुआत होने से बहुत खुश थे।

चतुरी चाचा बोले- भइया, युह शनिवार ऐतिहासिक होय गवा। भारत मा कोरउना क्यार टीका लगब शुरू होय गवा। काल्हि पूरे दयास मा टीका-त्योहार मनावा गवा। तीन लाख हेल्थ वर्करन केरे टीका लागि गवा। मोदी सरकार तीन करोड़ कोरउना योद्धन क्यार मुफ्त मा टीकाकरण कय रही हय। मुंशीजी ने चतुरी चाचा की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत इतिहास पर इतिहास रचता जा रहा है। कोरोना के एक नहीं दो टीके बनाकर भारत ने पूरे संसार में अपनी धाक जमा ली है। भारत में दुनिया का सबसे बड़ा टीका अभियान शुरू हो गया है। अपने देश में कोविशील्ड और कोवैक्सिन कल से लगने लगी है। अभी कोरोना के कुछ और स्वदेशी टीके बन रहे हैं। तभी ककुवा व बड़के दद्दा की जोड़ी प्रकट हो गई।

आजु ककुवा शाल की जगह कम्बल ओढ़कर आए थे। बड़के दद्दा भी मंकी कैप जड़े थे। ककुवा बोले- भाई आजु तौ बड़ी गलन हय। भोरहे याक दायँ बिस्तर ते उठेन। तनुक बाहर टहलेन अउ फिरि बिस्तर मा घुसि गयेन। पहिले परपंच मा आवै केरी हिम्मत नाय रहय। मुला अबहीं बहुरिया जब गरमागरम गिलास भरिके चाय दिहिस। तब शरीर मा गरमी आय गय। फिरि बड़के ते कहेन चलव भइय्या प्रपंच कय लीन जाय। हमका यतने जाड़े मा परपंच क्यार चस्का खैंचि लावा।

चतुरी चाचा ने चुटकी लेते हुए कहा- ककुवा भाई, तुम शुरुवातय ते बड़े परपंची रहव। ककुवा ने पलटवार किया- चतुरी भाई, तुम तौ मेहरूवन ते सात घाता परपंची हौ। पूरे गांव कय कुंडली राखत हौ तुम। इस नोकझोंक पर हम सब खूब हंसे। इसी बीच चंदू बिटिया गुड़-सोंठ के लड्डू, गुनगुना नींबू पानी और तुलसी, अदरक, गुड़ वाली कड़क चाय लेकर आ गयी। वह तख्त पर ट्रे रखकर तपते में हाथ सेंकेने लगी। हम सबने गुड़-सोंठ के स्वादिष्ट लड्डू खाने के बाद पानी पिया। फिर सबने चाय का कुल्हड़ उठा लिया। चंदू बिटिया घर चल गई।

चाय के साथ बड़के दद्दा ने प्रपंच को आगे बढ़ाते हुए कहा- किसान आंदोलन का आज 93वां दिन है। केंद्र सरकार ने कल 9वीं बार किसान नेताओं से वार्ता की थी। परंतु, किसान तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने पर अड़े रहे। अंततः पहले की तरह यह बातचीत भी बेनतीजा रही। अब दोनों पक्ष आगामी 19 जनवरी को 10वीं दौर की वार्ता करेंगे। सुप्रीम कोर्ट इस भीषण ठंड में दिल्ली बॉर्डर पर धरना दे रहे किसानों को लेकर चिंतित है। मोदी सरकार भी नए कृषि कानूनों को वापस लेने के मूड में नहीं दिखाई दे रही है। हालांकि, केंद्र सरकार सभी कानूनों में संशोधन करने को तैयार है। कुलमिलाकर स्थिति ठीक नहीं है।

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चतुरी चाचा इस बात पर बोले- मेरे हिसाब से देखा जाए तो तीनों कानून किसान के हित में हैं। इनसे न मंडी खत्म होगी और न ही फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म होगा। सरकारी खरीद पहले की तरह जारी रहेगी। जहां तक बात ठेके पर खेती करने की है, तो उससे किसानों का कोई अहित नहीं होगा। इसके बाद भी सरकार किसान नेताओं को बुलाकर बार-बार बात कर रही है। केंद्र सरकार इन कानूनों में संशोधन करने को भी तैयार है। हकीकत यह है कि विपक्षी दलों ने कुछ राज्यों के किसानों को बरगला रखा है। सवाल यह है कि आखिर पंजाब और हरियाणा व यूपी के ही कुछ किसान संगठनों द्वारा विरोध क्यों किया जा रहा है? बाकी पूरे देश में नए कृषि कानूनों का विरोध क्यों नहीं हो रहा है?

कासिम चचा ने कहा- मोदी सरकार को हठधर्मिता छोड़कर किसानों की मांग मान लेनी चाहिए। जब किसान नहीं चाहते हैं, तो आखिर नए कृषि कानूनों की जरूरत ही क्या है? उच्चतम न्यायालय ने भी केंद्र सरकार को फटकार लगाई है। इस भीषण ठंड में हजारों किसान, बुजुर्ग, महिलाएं व बच्चे खुले आसमान के नीचे बैठे हैं। आंदोलन कर रहे तमाम लोग ठंड से बीमार हो रहे हैं। कुछ लोगों की मौत भी हो चुकी है। आखिर केंद्र सरकार असंवेदनशील क्यों बनी हुई है? लोकतंत्र में राजहठ की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

अंत में हमेशा की तरह चतुरी चाचा ने मुझसे कोरोना अपडेट देने को कहा। साथ ही अपने घर से दूसरी चाय मंगवा ली। हमने सबको बताया कि विश्व में अबतक करीब 9 करोड़ 32 लाख लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से करीब 20 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। इसी तरह भारत में अबतक एक करोड़ 54 लाख से ज्यादा लोग कोरोना से पीड़ित हो चुके हैं। यहाँ भी एक लाख 52 हजार से अधिक लोगों की मौत हो गयी है। भारत सहित दुनिया के 18 देशों में लोगों को कोरोना की वैक्सीन दी जा रही है। भारत उन पांच देशों की सूची में शामिल है, जो अपने देश में अपनी स्वदेशी वैक्सीन प्रयोग कर रहे हैं। बाकी सारे देश दूसरे देशों की वैक्सीन पर निर्भर हैं। एक बात और खास है कि भारत दुनिया में वैक्सीन का सबसे बड़ा निर्माता भी है।

घना कोहरा और गलन को देखते हुए चतुरी चाचा ने आज पहली बार परपंचियों को दोबारा चाय पिलाई। दूसरी चाय पीने के साथ आज का प्रपंच समाप्त हो गया। मैं अगले रविवार को चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे पर होने वाली बेबाक बतकही लेकर फिर हाजिर रहूँगा। तबतक के लिए पँचव राम-राम!

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