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मंडलीय अपर निदेशक स्वास्थ्य ने किया आईएमआई 5.0 के दूसरे चरण का शुभारंभ

• डीडीयू चिकित्सालय पर बच्चों को पिलाई पोलियो की खुराक, 16 तक चलेगा दूसरा चरण

• छूटे पाँच वर्ष तक के 17476 बच्चों एवं 3333 गर्भवती का होगा टीकाकरण

वाराणसी। पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय स्थित नियमित टीकाकरण बूथ से चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण वाराणसी मण्डल की अपर निदेशक डॉ मंजुला सिंह ने सोमवार को सघन मिशन इंद्रधनुष (आईएमआई-5.0) के दूसरे चरण का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई । बूथ पर कई बच्चों को मीजल्स-रूबेला सहित अन्य टीके भी लगाए गए। इसके अतिरिक्त समस्त आठ ब्लॉक स्तरीय सीएचसी-पीएचसी व स्वास्थ्य केन्द्रों पर भी दूसरे चरण की शुरुआत की गई।

मंडलीय अपर निदेशक स्वास्थ्य ने किया आईएमआई 5.0 के दूसरे चरण का शुभारंभ

डॉ मंजुला ने कहा कि नियमित टीकाकरण अभियान में किसी कारणवश छूटे पाँच वर्ष तक के बच्चों व गर्भवती को प्रतिरक्षित करने के लिए सघन मिशन इंद्रधनुष 5.0 शुरू किया गया है। सोमवार से अभियान का दूसरा चरण शुरू हुआ है। यह चरण 16 सितंबर तक चलेगा। उन्होंने परिजनों से अपील की कि अपने घर के आसपास के परिजनों को पाँच वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण कराने के लिए पीएचसी-सीएचसी जाने के लिए प्रेरित करें। कोई भी बच्चा छूटा हो तो उसका टीकाकरण अवश्य कराएं। सभी टीके पूर्ण रूप से सुरक्षित हैं। टीका लगने के बाद सामान्य बुखार हो सकता है लेकिन घबराने की आवश्यकता नहीं है। गंभीर स्थिति या प्रतिकूल प्रभाव से निपटने को रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) तैयार की गई है।

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इस दौरान चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ दिग्विजय सिंह एवं अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (प्रतिरक्षण) डॉ एके मौर्य ने भी बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई। डॉ एके मौर्य ने बताया कि आईएमआई 5.0 के दूसरे चरण के लिए जिले के छूटे पाँच वर्ष तक के 17476 बच्चों एवं 3333 गर्भवती को टीकाकरण के लिए लक्षित किया गया है। इसके लिए जनपद में कुल 1753 टीकाकरण सत्र आयोजित किये जाएंगे। पहले चरण में जनपद में लक्ष्य के सापेक्ष 94 प्रतिशत बच्चों और 97 प्रतिशत गर्भवती का टीकाकरण किया गया। अभियान में बच्चों को प्रमुख रूप से मीजल्स-रूबेला का टीका लगाया जाएगा। साथ ही गर्भवती को टिटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका लगाया जाएगा।

मंडलीय अपर निदेशक स्वास्थ्य ने किया आईएमआई 5.0 के दूसरे चरण का शुभारंभ

यह टीका गर्भवती को दिये जाने से उनका व उनके गर्भस्थ शिशु को टिटनेस व डिप्थीरिया (गलघोंटू) रोग से बचाता है। इसके साथ ही बच्चों को 11 बीमारियों से बचाव के लिए टीका लगाया जाता है जिनमें डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, पोलियो, क्षय (टीबी), हेपेटाइटिस-बी, मैनिंजाइटिस, निमोनिया, हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप-बी संक्रमण, डायरिया रोटा वायरस और खसरा-रूबेला (एमआर) शामिल है। उन्होंने बताया कि आईएमआई 5.0 का तीसरा चरण नौ से 14 अक्टूबर तक चलाया जाएगा।

इस मौके पर डीएचईआईओ हरिवंश यादव, यूनिसेफ से प्रदीप विश्वकर्मा व डॉ शाहिद, डब्ल्यूएचओ से एसएमओ डॉ श्रीराम स्वामी व डॉ सतरुपा एएनएम वर्तिका एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।

पाँच साल-सात बार, टीका न छूटे एक भी बार-टीकाकरण एक सतत प्रक्रिया है जो कि जन्म से लेकर पाँच वर्ष तक सम्पादित की जाती है।

• जन्म के समय बच्चों को हेपेटाइटिस बी संक्रमण से बचाने के लिये एवं पोलियो वैक्सीन की जीरो डोज खुराक एवं बीसीजी की वैक्सीन दी जाती है।

• तत्पश्चात बच्चे की आयु डेढ़ माह, ढाई माह एवं साढ़े तीन माह होने पर डिप्थीरिया, कालीखांसी, टिटनेस, रोटावायरस, डायरिया, हेपेटाइटिस बी, हेमेसिफिलस संक्रमण एवं न्यूमोकोकल वैक्सीन, न्यूमोकोकल इन्फेक्शन के संक्रमण से बचाने के लिये टीका लगाया जाता है।

• इसके साथ ही नौ महीने की उम्र पूरी होने पर10वें महीने पर मीजिल्स-रूबेला की पहली डोज़ तथा 16-24 महीने पर मीजिल्स-रूबेला की दूसरी डोज दी जाती है।

• इसके बाद 16 से 24 माह पर डिप्थीरिया, काली खांसी एवं टिटनेस के संक्रमण से बचाव के लिये डी०पी०टी० वैक्सीन की बूस्टर डोज़।

• पुनः 05 वर्ष पूर्ण होने पर डी०पी०टी० की दूसरी बूस्टर खुराक दी जाती है।

• किशोर एवं किशोरियों को 10 वर्ष एवं 16 वर्ष की उम्र पर डिप्थीरिया एवं टिटनेस से बचाव के टीके दिये जाते हैं।

रिपोर्ट-संजय गुप्ता

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