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बागवानी से कृषि आय में वृद्धि

डॉ दिलीप अग्निहोत्रीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों की आय दुगुनी करने करने के प्रति कटिबद्ध है। उनकी सरकार इसके अनुरूप अनेक योजनाओं का क्रियान्वयन कर रही है। इनके सकारात्मक परिणाम भी दिखाई दे रहे है। उत्तर प्रदेश में भी इन योजनाओं पर प्रभावी कदम उठाए जा रहे है। लखनऊ राजभवन में आयोजित तीन दिवसीय प्रादेशिक फल,शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी के माध्यम से भी किसानों को जागृत किया गया।

इसका शुभारंभ राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। समापन पर राज्यपाल ने विजेताओं को पुरष्कृत किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रदेश की अधिकांश छोटी जोत के कृषकों के लिए अल्प अवधि की बागवानी फसलें निरन्तर आय देने में सक्षम हैं।

आकर्षक पुष्प आकृतियां

प्रदर्शनी स्थल पर पुष्पों से बनाई गयी अनेक प्रकार की उत्कृृष्ट आकृृतियों ने दर्शकों को बहुत प्रभावित किया। बड़ी संख्या में दर्शकों ने यहां हाँथ जोड़कर अपनी आस्था व्यक्त की। यहां रामदरबार, शिवलिंग, त्रिशूल, शंख, गौतम बुद्ध आदि को बहुत प्रशंसा मिली। इसके लिए अल्पना राठी,रंगोली जन शिक्षण संस्थान,कानपुरलखनऊ को विशेष स्मृृति चिन्ह देकर पुरस्कृृत किया गया। आनन्दी बेन ने कहा कि बागवानी फसलें हमेशा से जनमानस को पोषण तो उपलब्ध कराती ही हैं, साथ ही आकर्षित एवं रोमांचित भी करती रही हैं।

भारतीय संस्कृति में पुष्पों की सदैव से सद्भाव,सुन्दरता एवं शांति के प्रतीक के रूप में मान्यता रही है। इसी कारण यह फसलें दिनों दिन महत्वपूर्ण होती जा रही हैं। इनकी मांग में निरन्तर वृद्धि हो रही है इसकी पूर्ति हेतु आने वाले समय में बागवानी फसलों का उत्पादन बढ़ाना होगा।

बागवानी का व्यवसायिक रूप

राज्यपाल ने कहा कि कृषि विकास में बागवानी क्षेत्र का विशेष स्थान है। बागवानी फसलों आज व्यावसायिक रूप ले रही हैं, जिसके कारण इन फसलों के उत्पादन की ओर कृषकों का रूझान बढ़ा है। औषधीय एवं सगंधीय फसलों के उत्पादन कटाई उपरान्त प्रबन्धन,प्रसंस्करण मूल्य संवर्धन एवं विपणन कार्यों से ग्रामीण अंचल में रोजगार की संभावनाओं में भी वृद्धि हो सकेगी। बदलते परिवेश में इस तरह के प्रयासों की मदद से हमें पर्यावरण संरक्षण करने में भी मदद मिलती है।

भारतीय औषधियों का महत्व

आयुर्वेद दुनिया की सर्वाधिक प्राचीन चिकित्सा धरोहर है। राज्यपाल ने कहा कि महामारी कोविड-19 के इस काल में औषधीय एवं सगंध पौधों की ओर जनमानस का ध्यान गया है। कोविड-19 से बचाव में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से बना काढ़ा बहुत कारगर साबित हुआ।

इस अवधि में चिकित्सा क्षेत्र के वैज्ञानिकों एवं आयुष मंत्रालय,भारत सरकार द्वारा भी शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाये जाने हेतु औषधीय एवं सगंधीय पौधों के उपयोग पर बल दिया गया। पूरी दुनिया ने आयुर्वेद के महत्व व उपयोगिता को स्वीकार किया है। यह आज भी पूरी तरह प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि तीन दिन की प्रदर्शनी समाप्त हो गयी है, लेकिन राजभवन उद्यान अभी आम जनता के अवलोकनार्थ बारह फरवरी तक प्रातः आठ बजे से सायं छह बजे तक खुले रहेंगे।

विजेताओं को पुरष्कार

राजभवन प्रांगण में आयोजित फल, शाकभाजी,पुष्प प्रदर्शनी के समापन अवसर पर विभिन्न वर्गों में प्रतिभाग करने वाले विजेताओं को पुरस्कार वितरण राज्यपाल द्वारा किया गया। जिसमेें सर्वाधिक पुरस्कार के रूप में राजभवन उद्यान को चल बैजन्ती के साथ सात हजार रूपये तथा प्रदर्शनी के सर्वोत्तम प्रदर्श के लिए मंजू वर्मा एवं ओम प्रकाश लोघी, भोला नर्सरी,लखनऊ को संयुक्त रूप से तीन हजार रूपये का नगद पुरस्कार दिया गया। प्रदर्शनी में सर्वोत्तम गुलाब का पुरस्कार जनार्दन प्रसाद तिवारी द्वारा एचएएल लखनऊ को दिया गया।

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