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पर्यावरण संरक्षण का भारतीय चिंतन

रिपोर्ट-डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल इस समय कोरोना आपदा राहत,ई शिक्षण आदि में सक्रिय भागीदरी कर रही है। वह स्वयं मेधावी छात्रा और फिर शिक्षिका भी रही है। शिक्षा,समाज और संस्कृति के संबन्ध में उनकी व्यापक जानकारी है। प्रकृति व पर्यावरण कार्यक्रमों में भी उनकी बहुत रुचि रही है। उनके प्रयासों से राजभवन में पौधरोपण समारोह आयोजित किया गया था। इसके अलावा कुछ महीने पहले राजभवन में औषधीय पौधों की वाटिका और एक छोटा प्राणी उद्यान भी बनाया गया है। जैव विविधता दिवस पर उन्होंने ऑनलाइन व्याख्यान दिया इसमें प्रकृति चेतना व पर्यावरण संरक्षण को उन्होंने रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि विश्व की जैव विविधता में भारत की सात प्रतिशत भागीदारी है। आनन्दी बेन पटेल ने भारत की प्रचीन मान्यताओं का उल्लेख किया। यह सही है कि हमारे ऋषियों ने आदिकाल में ही पर्यावरण संरक्षण का सन्देश दिया था। वह युग दृष्टा थे। वह जानते थे कि प्रकृति के प्रति उपभोगवादी दृष्टिकोण से समस्याएं ही उतपन्न होंगी। इसी लिए उन्होंने प्रकृति की शांति का मंत्र दिया। प्रकृति को दिव्य माना गया। इसी संदर्भ आनन्दी बेन पटेल ने कहा कि भारत का इतिहास और संस्कृति दोनों जैव विविधता के महत्त्व को समझते है। यहाँ तक कि अथर्ववेद में विभिन्न औषधियों का उल्लेख है।

इस संगोष्ठी का मूल विषय हमारे समाधान प्रकृति में था। राज्यपाल ने इसकी प्रासंगिकता का उल्लेख किया। कहा कि जैव विविधता को बढ़ावा देना और अधिक से अधिक पेड़ और औषधियां लगाना हम सबका कर्तव्य है। उन्होंने शोधकर्ताओं से आग्रह किया कि जैव विविधता में आगामी एक वर्ष के दौरान होने वाले परिवर्तन पर विचार करें। इसके लिए सभी स्तर पर यथासंभव प्रयास करना चाहिए। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से आग्रह किया कि राजभवन के जैव विविधता का भी एक सूचकांक तैयार करें। यह बताएं कि राजभवन में क्या करने कीआवश्यकता है। जिससे प्रकृति में सुधार लाया जा सके। राज्यपाल ने कहा कि जैव विविधता से हमारी पारिस्थितिकीय तंत्र का निर्माण होता है। जो एक दूसरे के जीवन यापन में सहायक होते हैं। जैव विविधता पृथ्वी पर पाई जाने वाली जीवों की विभिन्न प्रजातियों को कहा जाता है। भारत अपनी जैव विविधता के लिए विश्व विख्यात है। भारत सत्रह उच्चकोटि के जैव विविधता वाले देशों में से एक है। भारत की भौगोलिक स्थिति देशवासियों को विभिन्न प्रकार के मौसम प्रदान करती है। भारत में सत्रह कृषि जलवायु जोन हैं, जिनसे अनेक प्रकार के खाद्य पदार्थ प्राप्त होते हैं। देश के जंगलों में विभिन्न प्रकार के नभचर,थलचर एवं उभयचर प्रवास करते हैं। इनमें रहने वाले पक्षी, कीट एवं जीव जैव विविधता को बढ़ाने में सहायक होते हैं। प्रकृति मनुष्य एवं जीव जन्तुओं के जीवन के प्रारम्भ से अंत तक के लिये खाने पीने,रहने आदि सभी की व्यवस्था उपलब्ध कराती है। मनुष्य खेती कर भूमि से अपने भोजन हेतु अन्न एवं सब्जियां उगाता है। अस्वस्थ होने पर प्रकृति प्रदत्त औषधियों से उपचार करता है।आनंदीबेन पटेल ने कहा कि हमारा देश वैदिक काल से ही अपनी औषधीय विविधता के लिए प्रसिद्ध रहा है। अथर्ववेद में औषधीय पौधे एवं उनके प्रयोग का उल्लेख मिलता है। इसी तरह रामायण में भी बरगद,पीपल,अशोक, बेल एवं आंवले का उल्लेख मिलता है। कोरोना से बचाव हेतु क्लोरोक्विन दवा का प्रयोग कई देशों द्वारा किया जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा उत्पादन एवं निर्यात भारत द्वारा पूरे विश्व में किया जा रहा है। इस दवा का प्रयोग मलेरिया बीमारी के लिए होता है। यह चिनकोना पेड़ से प्राप्त होता है।

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इसके अलावा राज्यपाल ने लखनऊ विश्वविद्यालय में निर्मित होने वाले महिला प्रसाधन केंद्र का ई-माध्यम से शिलान्यास किया। इसके लिए उन्होंने अपने विवेकाधीन कोष से विश्वविद्यालय को दस लाख रुपये की धनराशी भी अवमुक्त की है। उन्होंने मासिक न्यूजलेटर द कोरस के नए इंटरैक्टिव अंक का लोकार्पण और लखनऊ के जैव विविधता सूचकांक का विमोचन किया। जैव विविधता दिवस के उपलक्ष पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का उदघाटन भी राज्यपाल ने किया। इसमें भारत सहित जापान, दक्षिण अफ्रीका, यु ए ई, आदि विभिन्न देशों से आमंत्रित वक्ता भी मौजूद थे। जिनमे डॉ शकील अहमद,प्रो रुबेन यूसफ़, श्रैनो केम्प,डॉ केरी क्रिगर, प्रो सिल्विया तुर्रेल, प्रो हावीयेर एलेना,जेम्स चीज़मन और प्रो युकिहिरो औज़ाकि प्रमुख थे। लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो आलोक कुमार राय ने सभी सहभागियों का स्वागत किया। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा किये जा रहे कार्यों से लोगों को अवगत कराया। बताया कि दस अभिलक्षणों वाला विश्वविद्यालय का सीबीसीएस प्रोग्राम भारत का ऐसा पहला कार्यक्रम है। यह देश का पहला विश्वविद्यालय होगा जो अपना कार्बन फूट प्रिंट मापने जा रहा है। यह देश का पहला विश्वविद्यालय है जिसने किसी भी शहर के बायो डाइवर्सिटी इंडेक्स को कैलकुलेट किया है। देश का पहला विश्वदियालय है जिसके एक को छोड़ कर अन्य सभी विभागों के अपने यू-ट्यूब चैनल है। जिनका इस लॉक डाउन के दौरान अच्छा इस्तेमाल किया जा रहा है। यह अपना नया पीएचडी आर्डिनेंस बना चुका है। और अगले अकादमिक काउंसिल की मीटिंग होते ही यह लागू भी कर दी जाएगी। अकादमिक कार्यों को गति प्रदान करने विश्वविद्यालय ने नए अकादमिक सेल का भी गठन किया गया है।

छात्रों के लिए नयी अभिनव योजनाये शुरू की गयी है। स्टूडेंट ओ पी डी आवर पुपिल्स डे और त्रिस्कीम टीचिंग, रीचिंग, एम्बोल्देनिंग, इवोल्विंग पुअर बॉयज फण्ड का नाम बदलकर स्टूडेंट वेलफेयर फण्ड किया गया है। उसी के तहत छात्र कल्याण जो कि एक स्कालरशिप की स्कीम है और कर्म योगी जो अर्ण व्हाइल यू लर्न की स्कीम की शुरुआत की गयी है। अध्यापकों के लिए तीन स्कीम भी विश्वविद्यालय शुरू कर रहा है। उद्दीपन अर्थात रिसर्च प्रमोशन के लिए प्रोत्साहन नए अध्यापकों के लिए और एक्लेम उत्कृष्ट शोध करते अध्यापकों के रिकग्निशन के लिए है। अध्यापकों के प्रमोशन और रिक्रूटमेंट के कार्य को देखने लिए विश्वविद्यालय नए सेल का गठन कर चुका है।रिटायर्ड अध्यापकों की मेधा का लाभ उठाने की योजना बनाई गई है। इसके लिए प्रोफेसर ऑफ़ एमिनेंस की स्कीम चलाई जाएगी। विश्वविद्यालय दस करोड़ से ज्यादा की रिसर्च फंडिंग के लिए अप्लाई कर चुका है।
कुलाधिपति की मंशा के अनुरूप योग व वैकल्पिक चिकित्सा के संकाय का सृजन और कोविद जैसी संक्रामक रोग पर टीचिंग, रिसर्च और ट्रेनिंग को आगे बढ़ाने के लिए एक इंस्टिट्यूट के प्रस्ताव पर भी काम हो रहा है।कंडक्ट इन क्लासेज, कनेक्ट विथ स्टूडेंट्स और कंटेंट क्रिएशन इस त्रिकोणीय मॉडल पर विश्वविद्यालय अपने ई कक्षाएं चला रहा है। विश्वविद्यालय अपने सेनेटाइजर का टेक्नोलॉजी ट्रान्सफर कर चुका है,काढ़ा भी बना चुका है। काउंसलिंग के लिए यूपी पुलिस के साथ एम ओ यू भी कर चुका है। यूपी आपदा प्रबंधन के साथ भी सहयोग की शुरुआत होगी। छह अप्रैल से विश्वविद्यालय का कम्युनिटी किचन सफलता से चल रहा है। अब तक चालीस हजार लोगो को खाना खिला चुके है। गर्भ संस्कार के कार्यक्रम की सभी तैयारी हो चुकी है और इंस्टिट्यूट ऑफ़ वीमेन स्टडीज में यह एक प्रोग्राम के रूप में भी आने जा रहा है।

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