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मोदी और राहुल के विदेश यात्रा में दिए बयानों के औचित्य

डॉ दिलीप अग्निहोत्री

प्रधानमन्त्री और विपक्षी नेता की विदेश यात्रा पर तुलना अजीब लग सकती है .लेकिन देश की छवि के दॄष्टिगत, इस पर विचार अवश्य होना चाहिए. लन्दन में राहुल गांधी के बयान देश की प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं थे. दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी ने जापान के विश्व मंच पर भारत को शानदार रूप में प्रतिष्ठित किया. नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के ठीक पहले राहुल गांधी ब्रिटेन गए थे. वह विपक्ष के प्रमुख नेता है. प्रधानमन्त्री का विरोध करना उनका अधिकार है, किन्तु ऐसा करते समय देश की प्रतिष्ठा का ध्यान रखना चाहिए.

विदेश में तो अधिक सावधानी रखनी चाहिए. राहुल गांधी से य़ह अपेक्षा करना बेमानी है. देश से लेकर विदेश तक उनकी फ़ितरत एक जैसी रहती है. वह अपने बयानों से होने वाले असर से सदैव बेपरवाह रहते है. गनीमत य़ह है कि उनके बयानों को गंभीरता से नहीं लिया जाता. फिर भी बात विदेश की थी तो उनके बयानों की भरपाई जरूरी थी. सन्योग था कि उसी समय नरेंद्र मोदी जापान यात्रा पर पहुँचे. उन्होंने राहुल गांधी का नाम नहीं लिया.इसकी आवश्यकता भी नहीं थी.फिर भी राहुल के बयान निरर्थक साबित हो गए. य़ह संदेश गया कि विश्व में शांति और सौहार्द के लिए भारत का योगदान सर्वाधिक महत्वपूर्ण है. इस पर चर्चा से पहले राहुल के बयान पर ध्यान देना आवश्यक है.

राहुल गांधी ने लंदन में कहा कि देश में हालात ठीक नहीं है। नरेंद्र मोदी किसी की नहीं सुनते हैं. देश में लोगों की आवाज दबाने की कोशिश हो रही है। चीनी सेना लद्दाख में घुस चुकी है। यहां स्थिति रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी है. पूरे देश में केरोसिन छिड़क दिया गया है. एक चिंगारी से आग भड़क सकती है. राहुल गांधी लंदन के कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में आइडियाज फॉर इंडिया’ प्रोग्राम में बोल रहे थे. यहां से उनका बयान खूब प्रसारित किया गया. भारत का विपक्षी नेता कह रहा था कि भारतीय सीमा पर यूक्रेन जैसे हालात है. दूसरी तरफ दुनिया अमेरीका यूरोप के देश रूस यूक्रेन समस्या के समाधान में भारत की सहायता मांग रहे है. ब्रिटेन के प्रधानमन्त्री पिछले दिनों भारत आए थे. उन्होंने भी भारत से सहयोग की अपेक्षा की थी. उसी ब्रिटेन की राजधानी में राहुल कह रहे थे कि हमारे देश में केरोसिन छिड़क दी गयी है. सीमा पर यूक्रेन जैसी स्थिति है .राहुल के कहने का निहितार्थ य़ह की भारत से कोई उम्मीद मत करिए .यहां की स्थिति बहुत खराब है. कल्पना करिए की देश में केरोसिन छिड़क दी गई है के बयान का आतंकी संगठनों ने क्या मतलब निकाला होगा.

जाहिर है कि राहुल के बयान अनुचित थे, लेकिन विश्व मंच पर नरेंद्र मोदी ने बिना कुछ कहे राहुल के बयानों को फिजूल साबित कर दिया. जापान में भारत की प्रतिष्ठा बुलन्द हुई. दुनिया के प्रमुख देशों ने इसको सहज रूप में स्वीकार किया. वस्तुतः राहुल गांधी ने अपने को विदेश में भी अविश्वसनीय बनाया है. जापान में प्रमुख देशों ने भारत के वैश्वीक महत्व को स्वीकार किया. नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय हित और प्रतिष्ठा का संवर्धन किया. क्वाड शिखर सम्मेलन में भारत के प्रस्ताव को महत्व दिया गया. हिन्द प्रशांत क्षेत्र में आधारभूत ढांचे के विकास की इस महत्वपूर्ण पहल पर सहमति बनी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा और आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस के बीच वार्ता में तय किया गया कि इस क्षेत्र में आधारभूत ढांचे के विकास के लिए सदस्य देश मिलकर काम करेंगे.

इस काम के लिए सरकारी और निजी दोनों ओर से निवेश होगा. संयुक्त वक्तव्य में कहा गया कि आधारभूत ढांचे के विकास के लिए पचास अरब डॉलर की धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। सदस्य देश इस काम में अपनी क्षमता और अनुभव के आधार पर योगदान करेंगे। क्वाड की इस पहल को चीन के वन बेल्ट वन रोड योजना का जवाब माना जा रहा है। विभिन्न देशों के सामने मौजूद कर्ज संबंधी मसलों और चुनौतियों का सामना करने के लिए जी ट्वेंटी देशों के संगठन की परिधि में कदम उठाये जायेंगे। विभिन्न देशों की आर्थिक संस्थाओं के सहयोग से पारदर्शिता के साथ कर्ज संबंधी समस्याओं से उबरने के लिए प्रयास किए जायेंगे। सदस्य देशों ने इसके लिए ‘क्वाड कर्ज प्रबंधन संसाधन पोर्टल’ कायम करने का फैसला किया जिसमें द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग हासिल किया जाएगा।सूचनाओं के आदान-प्रदान और आपूर्ति श्रृंखला के संबंध में चुनौतियों का आकलन किया जाएगा।

क्वाड देशों ने अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए क्वाड उपग्रह डाटा पोर्टल बनाया जाएगा. छब्बीस ग्यारह और पठानकोट हमलों की निंदा की गई . क्वाड देश सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में स्पष्ट रूप से आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की निंदा करते हैं। पाकिस्तान का नाम लिए बिना परदे के पीछे से संचालित आतंकवाद की निंदा की गई है। इसमें कहा गया है सीमापार आतंक के लिए आतंकवादी समूहों को रसद, वित्त या सैन्य सहायता बंद होनी चाहिए। मोदी ने कहा कि सम्मेलन लोकतांत्रिक शक्तियों को नई ऊर्जा और उत्साह दे रहा है। क्वाड के स्तर पर आपसी सहयोग से एक फ्री,ओपन और समावेशी ‘इंडो पैसिफिक क्षेत्र’ को प्रोत्साहन मिल रहा है। यह साझा उद्देश्य है।

क्वाड ने कम समय में इंडो-पैसिफिक में शांति सुनिश्चित की है। संयुक्त रूप से क्षेत्र और विश्व स्तर पर ओपन साइंस की अवधारणा विकसित होगी . भारत, अमेरिका,जापान और आस्ट्रेलिया के राष्ट्र प्रमुखों की टोक्यो में मुलाकात हुई। इस समिट में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन, आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज शामिल हुए. क्वाड समूह ने विश्व पटल पर एक महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है।

भारत और जापान रक्षा निर्माण के क्षेत्र में द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा सहयोग को बढ़ाने पर सहमति हुए . अगली टू प्लस टू विदेश और रक्षा मंत्री स्तरीय बैठक जल्द से जल्द जापान में आयोजित होगी .दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक संबंध मजबूत हो रहे है . अगले पांच वर्षों में जापान से भारत में सार्वजनिक और निजी निवेश और वित्त पोषण में पांच ट्रिलियन येन के अपने निर्णय को लागू करने की दिशा में संयुक्त रूप से काम करेंगे . जापानी कंपनियां भारत में अपना निवेश बढ़ा रही हैं. फाईव जी, बियॉन्ड फाईव जी और सेमीकंडक्टर्स जैसी महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ेगा. भारत और अमेरिका के बीच हुए निवेश प्रोत्साहन पर समझौता हुआ. इससे भारत के स्वास्थ्य, अक्षय ऊर्जा, छोटे और मझौले उद्योग और आधारभूत ढांचा में अमेरिका के निवेश का रास्ता साफ होगा। दोनों देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी संस्थाएं इस पहल को आगे बढ़ायेंगी। राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि वह चाहते हैं कि भारत अमेरिका के बीच दुनिया में सबसे अधिक घनिष्ठ संबंध कायम हों।

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