पराली जलाने से फैलती हैं कई प्रकार की बीमारियां – जिलाधिकारी

औरैया। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार ककोर में जनपद में पंजीकृत कम्बाइन हार्वेस्टर मालिकों की बैठक आहूत की गई। जिसमें जिलाधिकारी महोदय द्वारा निर्देशित किया गया कि जनपद के अंदर किसी अन्य प्रदेश, अन्य जनपद में पंजीकृत कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ ही साथ जनपद में पंजीकृत कम्बाइन हार्वेस्टर सुपर स्टार मैनेजमेंट सिस्टम सहित ही कटाई कार्य कर सकते हैं। यदि उनकी कम्बाइन हार्वेस्टर में सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम नहीं लगा है तो वह सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम के विकल्प के रूप में अन्य फसल अवशेष प्रबंधन के यंत्र जैसे सुपर सीडर, स्ट्रारीपर, स्ट्रारेक व बेलर, मल्चर, पैड़ी स्ट्रॉचॉपर, श्रब मास्टर, रोटरी स्लेशर, रिर्वेसेबुल एमबी प्लाऊ इत्यादि की उपलब्धता के बगैर कटाई का कार्य न करें, अर्थात यदि आपकी कंबाइन हार्वेस्टर के द्वारा कटाई का कार्य किया जा रहा है तो प्रणाली के प्रबंधन की जिम्मेदारी आपकी एवं किसान दोनों की है। किसी भी दशा में पराली जलाई नहीं जानी है।

सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि अन्य प्रदेश व अन्य जनपदों में पंजीकृत कम्बाइन हार्वेस्टर को जनपद में सुपरस्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम अथवा इन सीटू यंत्रों की उपलब्धता होने पर ही जनपद में प्रवेश करने दिया जाए‌ यदि कोई भी कम्बाइन हार्वेस्टर बिना सुपर एस. एम. एस. अथवा फसल अवशेष प्रबंधन के अन्य यंत्रों को प्रयोग में लाए बगैर कटाई का कार्य करते हुए पाया जाए तो उक्त कम्बाइन हार्वेस्टर को तत्काल सीज किया जाए तथा कम्बाइन हार्वेस्टर मालिक के विरुद्ध प्रदूषण फैलाने में सहायक करने के कारण विधिक कार्यवाही भी की जाएगी।

जिलाधिकारी महोदय द्वारा बताया गया कि पराली प्रबंधन अति आवश्यक है। पंजाब में पराली जलाए जाने की घटनाएं अधिक घटित होती हैं। पराली जलाए जाने से जो धुआं निकलता है उससे फेफड़े संबंधी कई प्रकार की बीमारियां होने के साथ ही साथ कैंसर जैसी भयंकर बीमारी का भी खतरा बना रहता है।

उप कृषि निदेशक ने बताया कि जनपद में पंजीकृत समस्त कम्बाइन हार्वेस्टरों का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है जिसमें कम्बाइन हार्वेस्टर मालिक कटाई करते समय अपनी लोकेशन एवं फोटो भेजेंगे।

रिपोर्ट-अनुपमा सेंगर

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