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पुरूष भी निभाएं जिम्मेदारी, छोटे परिवार के हैं बड़े फायदे

महिला नसबंदी की अपेक्षा पुरुष नसबंदी अत्यधिक सरल और सुरक्षित : सीएमओ

पुरुष भी खुले मन से परिवार नियोजन साधनों को अपनाने को आगे आयें

कानपुर। परिवार को सीमित रखने में अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए पुरुष भी आगे आ रहे हैं। वर्ष 2021-22 में 132 पुरुषों ने नसबंदी करवाई है। वहीं,कंडोम का इस्तेमाल भी लोगों द्वारा किया जा रहा है। हालांकि,कोरोनाकाल में इसमें कमी आई है लेकिन अब फिर से अस्थाई साधन अपनाने वालों की संख्या बढ़ने लगी है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नेपाल सिंह का कहना है कि परिवार नियोजन सेवाओं को सही मायने में धरातल पर उतारने और समुदाय को छोटे परिवार के बड़े फायदे की अहमियत समझाने की हरसम्भव कोशिश सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा अनवरत की जा रही है। यह तभी फलीभूत हो सकता है जब पुरुष भी खुले मन से परिवार नियोजन साधनों को अपनाने को आगे आयें और उस मानसिकता को तिलांजलि दे दें कि यह सिर्फ और सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी है। इसमें जो सबसे बड़ी दिक्कत सामने आ रही है वह उस गलत अवधारणा का परिणाम है कि पुरुष नसबंदी से शारीरिक कमजोरी आती है। इस भ्रान्ति को मन से निकालकर यह जानना बहुत जरूरी है कि महिला नसबंदी की अपेक्षा पुरुष नसबंदी अत्यधिक सरल और सुरक्षित है। इसलिए दो बच्चों के जन्म में पर्याप्त अंतर रखने के लिए और जब तक बच्चा न चाहें तब तक पुरुष अस्थायी साधन कंडोम को अपना सकते हैं। वहीं,परिवार पूरा होने पर परिवार नियोजन के स्थायी साधन नसबंदी को भी अपनाकर अपनी अहम जिम्मेदारी निभा सकते हैं।

परिवार नियोजन के नोडल डॉ. एसके सिंह का कहना है कि पुरुष नसबंदी चंद मिनट में होने वाली आसान शल्य क्रिया है। यह 99.5 फीसदी सफल है। इससे यौन क्षमता पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता है। उनका कहना है कि इस तरह यदि पति-पत्नी में किसी एक को नसबंदी की सेवा अपनाने के बारे में तय करना है तो उन्हें यह जानना जरूरी है कि महिला नसबंदी की अपेक्षा पुरुष नसबंदी बेहद आसान है और जटिलता की गुंजाइश भी कम है। नसबंदी की सेवा अपनाने से पहले चिकित्सक की सलाह भी जरूरी होती है ।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक अश्विनी बताते हैं कि कानपुर जनपद में पुरुष नसबंदी करवाने पर लाभार्थी को दो हजार रुपये उसके खाते में दिये जाते हैं । पुरुष नसबंदी के लिए चार योग्यताएं प्रमुख हैं- पुरुष विवाहित होना चाहिए, उसकी आयु 60 वर्ष या उससे कम हो और दंपति के पास कम से कम एक बच्चा हो जिसकी उम्र एक वर्ष से अधिक हो। पति या पत्नी में से किसी एक की ही नसबंदी होती है। गैर सरकारी व्यक्ति के अलावा अगर आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी पुरुष नसबंदी के लिए प्रेरक की भूमिका निभाती हैं।

अपर शोध अधिकारी कमरुल अंसारी ने बताया कि जिले में वित्तीय वर्ष 2018-19 में 270 पुरुषों ने नसबंदी करवाई और 2019-20 में 365 पुरुषों ने नसबंदी करवाई । 2020-21 में 53 पुरुषों ने नसबंदी करवाई वहीं वर्ष 2021-22 में 132 पुरुषों ने नसबंदी करवाई है। वहीं,कंडोम का इस्तेमाल भी लोगों द्वारा किया जा रहा है। कोरोनाकाल में इसमें कमी आई है। वर्ष 2019-20 में.893559 यूजर को कंडोम विभाग द्वारा वितरित किए गए।

यह भी प्रावधान : उप स्वास्थ्य शिक्षा सूचना अधिकारी राजेश यादव बताते हैं कि नसबंदी के विफल होने पर 60,000 रुपए की धनराशि दी जाती है। नसबंदी के बाद सात दिनों के अंदर मृत्यु हो जाने पर चार लाख रुपए की धनराशि दी जाती है नसबंदी के 8 से 30 दिन के अंदर मृत्यु हो जाने पर 1,00,000 रुपए की धनराशि दिये जाने का प्रावधान है। नसबंदी के बाद 60 दिनों के अंदर जटिलता होने पर इलाज के लिए 50,000 रुपए की धनराशि दी जाती है।

रिपोर्ट-शिव प्रताप सिंह सेंगर 

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