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सार्थक बहस के साथ मानसून सत्र संपन्न

संविधान के अनुसार विधानमंडल के दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का समय नहीं होना चाहिए। इसलिए कोरोना संकट के बाबजूद उत्तर प्रदेश विधानमण्डल का मानसून सत्र आहूत करना अपरिहार्य था। इसके अलावा सरकार को सत्रह विधेयक भी पारित कराने थे। सत्ता पक्ष यह दोनों लक्ष्य हासिल करने में सफल रहा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी प्रदेश की सर्वोच्च पंचायत का सार्थक उपयोग किया। वह इस माध्यम से सरकार की बात को जनता तक पहुंचाने में सफल रहे। कुछ लोग पिछले कुछ समय से ब्राह्मण क्षत्रिय मुद्दा उठा रहे है। योगी ने इसका जबाब दिया। कहा कि राम व परशुराम के नाम पर जातिवादी राजनीति चल रही है। कुछ लोग तिलक और तराजु के नाम पर समाज में जहर फैला रहे थे। राम व परशुराम में कोई भेद नहीं है बल्कि कुछ लोगों की बुद्धि में भेद हैं।

अपरोक्ष रूप से उन्होंने जन्मभूमि पर राम मंदिर निर्माण का विरोध करने वालों पर तंज भी कसा। कहा कि परशुराम ही सही,कम से कम राम का नाम तो लिया। अब तो रोम के लोग भी राम का नाम ले रहे हैं। चलो अच्छा है कि ये भी राम नाम जपने लगे। इन्हेंं पता चल गया है कि राम के बिना वैतरणी पार नहीं होगी। यह सब वही लोग है जो रामसेतु का भी विरोध करते थे। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त हो चुका है।उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी हमारी है और हम उसको बखूबी निभा भी रहे हैं।

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कोरोना संक्रमण के काल में महामारी पर अंकुश लगाने के प्रयास के साथ प्रदेश में विकास कार्य को भी गति दे रहे हैं। प्रदेश की कानून व्यवस्था हमारी प्राथमिकता थी और रहेगी। दिल्ली में गिरफ्तार आतंकी ने माना है कि उनकी राम मंदिर शिलान्यास के एक महीने के भीतर आतंकी हमला करने की थी। हम लगातार सतर्क हैं,शायद इसी कारण उनके मंसूबों पर पानी फिर गया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमने उपद्रव करने वालों को नहींं छोड़ा है। सीएए के विरोध में उपद्रव के दौरान सरकारी तथा निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से वसूली की है। जुर्माना देने वाले बाहर हैं जबकि जुर्माना न भर पाने वाले जेल में हैं। हमारी ही इस नीति का अनुसरण अब अन्य राज्य भी कर रहे हैं। हमने उपद्रवियों से वसूली करने के साथ संपत्तियों की कुर्की की है। हमारी सरकार आज ही विधानसभा में उपद्रवियों के खिलाफ वसूली और संपत्ति कुर्की का विधेयक लेकर आई है।

अधिवेशन के तीसरे दिन सत्रह विधेयक पारित कराने में सरकार को कोई कठिनाई नहीं हुई। उत्तर प्रदेश लोक एवं निजी सम्पत्ति क्षति वसूली विधेयक,उत्तर प्रदेश आकस्मिकता निधि संशोधन विधेयक, उत्तर प्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन द्वितीय संशोधन विधेयक, उत्तर प्रदेश राज्य विधानमंडल सदस्यों की उपलब्धियों और पेंशन संशोधन विधेयक, उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद संशोधन विधेयक, उत्तर प्रदेश कारखाना विवाद संशोधन विधेयक, उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास संशोधन विधेयक, कारागार अधिनियम संशोधन विधेयक, उत्तर प्रदेश मूल्य संवर्धित कर संशोधन विधेयक, उत्तर प्रदेश मंत्री वेतन भत्ता, और प्रकीर्ण उपबंध संशोधन विधेयक, उत्तर प्रदेश कतिपय श्रम विधियों से अस्थाई छूट संशोधन विधेयक,उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मंडी संशोधन विधेयक, उत्तर प्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं महामारी रोग नियंत्रण विधेयक, उत्तर प्रदेश गोवध निवारण संशोधन विधेयक, उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय शुल्क विनियमन संशोधन विधेयक कारागार उत्तर प्रदेश संशोधन विधेयक, उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल विधेयक को पारित कराया गया।

डॉ.दिलीप अग्निहोत्री

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