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सांसत में मरीजों की जान, ऑक्सीजन का पड़ा अकाल

 अनुपम चौहान

राजधानी लखनऊ में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। ऐसे में अब ऑक्सीजन की किल्लत ने दोहरी परेशानी खड़ी कर दी है।ऑक्सीजन सप्लायरों के यहां पूरे दिन सिलेंडर की रिफिलिंग व नए सिलेंडर लेने के लिए बुधवार को दिनभर लोगों की भीड़ देखने को मिली। आलम यह है की सप्लायरों की दुकानें बंद होने पर भी लोग बाहर खड़े उनका इंतजार करते रहे।

उधर लखनऊ के अधिकांश अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी कमी होने लगी है। लखनऊ के गोमती नगर स्थित मेयो हॉस्पिटल में ऑक्सीजन खत्म होने के कारण अस्पताल प्रशासन कोरोना मरीजों को वापस भेज रहा है। इतना ही नहीं ऑक्सीजन की कमी के चलते हॉस्पिटल में पहले से भर्ती मरीजों की जान संकट में आ गयी है। राजधानी के मेयो हॉस्पिटल के अलावा वागा हॉस्पिटल समेत अन्य प्राइवेट एवं सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी कमी हो रही है। बलरामपुर अस्पताल में पूछने पर बताया गया की अभी तो अस्पताल में कल तक के लिए ऑक्सीजन मौजूद है, लेकिन अगर जल्द ही सप्लाई नहीं की गयी तो यहां भर्ती मरीजों के लिए दिक्कत बढ़ जाएगी।

सच कहा जाये तो राजधानी समेत समूचे प्रदेश में ऑक्सीजन का आपातकाल चल रहा है। कई शहरों में ऑक्सीजन की भारी किल्लत है। इनमें झांसी, मेरठ, कानपुर, वाराणसी, गोंडा, अलीगढ़ व कन्नौज प्रमुख हैं। जहां ऑक्सीजन की कमी के चलते मरीज दम तोड़ रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन ने पत्र लिखकर मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए तुरंत ऑक्सीजन सप्लाई करने की मांग की है। इन सभी जगहों पर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जितनी जल्दी हो सके ऑक्सीजन की सप्लाई की जाए वरना मरीजों के लिए परेशानी बढ़ जाएगी।

कमोबेश यही हाल देश की राजधानी दिल्ली का भी है। यहां सेंट स्टीफंस अस्पताल ने बुधवार को एक बयान जारी करके बताया कि उनके यहां ऑक्सीजन की भारी कमी हो गई है। अस्पताल में केवल एक से डेढ़ घंटे की ऑक्सीजन बची है। यहां 350 मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। यदि अस्पताल को जल्द ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं मिलती है तो इन मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है। वहीं गंगाराम अस्पताल भी ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहा है। अस्पताल में केवल पांच घंटे की ऑक्सीजन शेष बची है। इसकी जानकारी खुद अस्पताल प्रशासन ने दी। अस्पताल में आईसीयू में 10 सहित 58 कोविड मरीज भर्ती हैं। और करीब 35 मरीज भर्ती होने के इंतजार में हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाली कंपनी ने ऑक्सीजन की सप्लाई देने से मना कर दिया है। अगर जल्द ही ऑक्सीजन सप्लाई नहीं की गयी तो मरीजों के लिए परेशानी बढ़ जाएगी।

उधर ऑक्सीजन सिलेंडर को लेकर बाजार में मची मारामारी के बीच तमाम लोग ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीदने लखनऊ के लालबाग और अमीनाबाद पहुंचे। जहां पर आपदा में अवसर का लाभ उठाने वालों ने परेशान लोगों को ठगना शुरू कर दिया। यहां 30 से 35 हजार रुपये तक में मिलने वाला ऑक्सीजन कंसंट्रेटर अब 70 हजार रुपये में बिक रहा है और वो भी  तुरंत मिलना मुश्किल है।

राजधानी लखनऊ का आलम तो यह है की जिन अधिकारियों को प्लांटों से ऑक्सीजन की आपूर्ति देखने की जिम्मेदारी दी गयी है, उनके नंबर या तो उठ नहीं रहे हैं या स्विच ऑफ जा रहे हैं। मेयो हॉस्पिटल के गेट के बाहर ऑक्सीजन का स्टॉक खत्म होने और मरीजों को हायर सेंटर ले जाने का नोटिस चस्पा होते तीमारदारों में हड़कंप मच गया। राजधानी के एक अन्य अस्पताल टीएस मिश्रा हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। नोटिस लगते ही मरीजों के परिजन दहशत में आ गए और गुहार लगाने लगे। जिसके बाद करीब 30 मरीजों को टीएस मिश्रा हॉस्पिटल से ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में फ़िलहाल कोविड के 350 बेड ही सक्रिय हैं। एक ओर जहां ऑक्सीजन के लिए चहुंओर हाहाकार मचा हुआ है वहीं प्रदेश सरकार का दावा है कि ऑक्सीजन की बिल्कुल भी कमी नहीं है। लेकिन मौजूदा हालातों को देखते हुए सरकार के दावे और हकीकत दोनों एक दूसरे से बिलकुल भी मेल नहीं खा रहे हैं।

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