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उत्तराखंड: हिमालयी फूलों की रानी “ब्लू पॉपी” एक बार फिर अपनी सुन्दरता से लुट रही विदेशी सैलानियों का दिल

ब्लू पॉपी को हिमालयी फूलों की रानी भी कहा जाता है। यह उत्तराखंड के कुमाऊँ से लेकर कश्मीर तक 3,000 से 5,000 मीटर की ऊँचाई पर पाया जाता है।हाल ही किये गए एक अध्ययन से ‘ब्लू पॉपी’ हिमालय के निचले क्षेत्रों तथा शैल-युक्त हिमोढ़ों से लुप्त होते जा रहे हैं।

ब्लू पॉपी को हिमालयी फूलों की रानी भी कहा जाता है. जुलाई से अगस्त के आखिर तक हेमकुंड साहिब व फूलों की घाटी में यह फूल प्रचुर मात्रा में खिलता है. दुनिया में ब्लू पॉपी की 40 प्रजातियां मौजूद हैं. इनमें से 20 तो भारत में ही पाई जाती हैं. इस फूल की जड़ों को जहरीला माना जाता है.

यहां पर चमोली जिले में  87.5 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैली घाटी हिमालयी जैव विविधता का बेहद ही अद्भतु खजाना है. दरअसल यहां पर दुनियाभर के दुर्लभ पक्षी, दुर्लभ प्रजाति के फूल, वन्य, जीवजंतु और औषधीय वनस्पति आदि पाए जाते है.

यही वजह है कि फूलों की घाटी प्रकृति प्रेमियों और वनस्पति शास्त्रियों की पहली पसंद है. इन दिनों घाटी जापान में राष्ट्रीय पुष्प ब्लू पॉपी से महक रही है.

समुद्रतल से 12,500 फीट की ऊंचाई पर 87.5 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैली फूलों की घाटी जैव विविधिता का खजाना है. यहां पर दुनिया के दुर्लभ प्रजाति के फूल, वन्य जीव-जंतु, जड़ी-बूटियां व पक्षी पाए जाते हैं. फूलों की घाटी को वर्ष 1982 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया. वर्ष 2005 में यूनेस्को ने इसे विश्व प्राकृतिक धरोहर का दर्जा प्रदान किया.

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