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जल जीवन है जीवन जल है, बिन जल के जीना मुश्किल है..

● यूपी महोत्सव में नीला जहान फाउण्डेशन ने किया एवं प्रकृति-काव्य-पाठ का आयोजन
● रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के निजी सचिव डॉ. राघवेन्द्र शुक्ल ने साहित्यप्रेमियों, कवियों और पत्रकारों का किया सम्मान
● नीला जहान फाउण्डेशन के संस्थापक जलदूत नन्द किशारे वर्मा की मुख्य अतिथि ने की सराहना
● गीत, गजल, कविताओं से जल बचाने और उसकी उपयोगिता पर जनजागरण का चला एक अभियान

लखनऊ। जल जीवन है जीवन जल है, बिन जल के जीना मुश्किल है…और कर्ज धरती का कुछ तो चुका दीजिये, धरा को हरा भरा फिर बना दीजिये… जैसे गीत और कविताओं से जल को बचाने और उसकी उपयोगिता पर राजधानी में प्रकृति काव्य-पाठ और जल और नदियों को बचाने के लिए कार्य कर रहे समाजसेवियों को प्रकृति साहित्य सम्मान से नवाजा गया।

आयोजन यूपी महोत्सव में नीला जहान फाउण्डेशन की ओर से आयोजित किया गया। प्रकृति साहित्य सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि रक्षामंत्री भारत सरकार के निजी सचिव डॉ. राघवेन्द्र शुक्ल रहे। उन्होंने कहा कि दुनिया को और अधिक बेहतर बनाने वालों का सम्मान धर्म कार्य है। उन्होंने फाउण्डेशन के संस्थापक जलदूत नन्द किशोर वर्मा के कार्यों को अनुकरणीय बताते हुए जलश्रोतों के संरक्षण में आम जन को सक्रिय सहभागिता हेतु आवाहन किया।

कवयत्री रूपा पाण्डेय सतरूपा की वाणी वंदना से शुरू हुई काव्य गोष्ठी में गीतकार मनीष मगन ने “जल जीवन है जीवन जल है, बिन जल के जीना मुश्किल है” पढ़ा तो सभी भावुक हो उठे। वहीं जब प्रदीप सारंग ने पढ़ा- द्वारे मेड़े बिरवा लगावौ, धरा पै हरियाली बढ़ावौ” तो वाह वाह से मंच गूंज गया। आकाश यादव ने गजल पढ़ी- “तखल्लुस में तुम्हारा नाम लिखकर सोचता हूँ कि मेरी माँ तुम्हारे नाम से मशहूर हो जाऊं”। राम सनेही सजल ने गीत पढ़ा ” कर्ज धरती का कुछ तो चुका दीजिये, धरा को हरा भरा फिर बना दीजिये। कवि राजेश श्रेयस ने पढ़ा- नदी झील और ताल आदि पावन स्थान बन जाते हैं, अंत में जलदूत नंद किशोर वर्मा की गंगा कथा से काव्य पाठ का समापन हुआ और समारोह अध्यक्ष डॉ बीपी सिंह के अध्यक्षीय संबोधन के साथ समारोह का समापन हुआ। समारोह में सीके सिंह, आयोजन सचिव शिवांग वर्मा, अरुण वर्मा, दीक्षा वर्मा, मोहित यादव, विमलेश वर्मा, मिथलेश वर्मा, मालती वर्मा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

इनको मिला प्रकृति साहित्य सृजन सम्मान

यूपी महोत्सव समारोह में सामाज सेविका रूपा पाण्डेय सतरूपा, सांस्कृतिक सचिव सीमा गुप्ता, समाचार वाचिका प्रतिमा गौतम, पर्यावरण प्रेमी प्रदीप सारंग, गीतकार मनीष मगन, साहित्य समीक्षक राजेश कुमार ‘श्रेयस’, छायाकार फूलचंद्र, नदी प्रेमी पल्लव शर्मा, प्रकृति प्रेमी राम सनेही विश्वकर्मा, गजलकार आकाश यादव को मोमेंटो, शाल, प्रशस्ति पत्र, गमला पौध के द्वारा प्रकृति साहित्य सृजन सम्मान प्रदान किया गया।

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